जानिए गणेश चतुर्थी की पूजा और व्रत की विधि

इस बार का स्थापना मुहूर्त सुबह 11 बजकर 08 से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. भक्त इसी बीच गणेश मूर्ति की स्थापना करेंगे.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 1:27 PM IST
जानिए गणेश चतुर्थी की पूजा और व्रत की विधि
भगवान गणेश की प्रतिमा
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Updated: September 11, 2018, 1:27 PM IST
इस बार 13 सितम्बर से गणेश चतुर्थी पूजा की शुरुआत होगी. इस बार का स्थापना मुहूर्त सुबह 11 बजकर 08 से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. भक्त इसी बीच गणेश मूर्ति की स्थापना करेंगे.

गणपति की पूजा की सामाग्री:
इस दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए इलाइची, नारियल, चांदी का वर्क, सुपारी, लौंग पंचमेवा, घी कपूर, पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा, गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, कलावा जनेऊ, गंगाजल पहले से एकत्र कर लें. ध्यान रहे कि जिस प्रतिमा का इस्तेमाल आप पूजा के लिए करने जा रहे हैं वह नई हो. अगर आप प्रतिमा नहीं खरीद सकते हैं तो एक साबुत सुपारी को भी गणपति का स्वरूप मानकर उसे आप घर में स्थापित कर सकते हैं.
कैसे करें तैयारी:

सुबह उठकर सबसे पहले तो स्नान करें. इस दिन लाल वस्त्र धारण करें. पूजा के पहले कुछ भी ग्रहण ना करें. पहले भगवान गणेश की मूर्ति को विधिपूर्वक नहलाएं और भगवान की चौकी लगाएं. ध्यान रहे कि चौकी का कपड़ा भी लाल रहे और चौकी की दिशा भी शास्त्रानुकूल हो.

मूर्ति की स्थापना:
लाल वस्त्र बिछी चौकी पर अक्षत छिड़कें. उसके ऊपर गणपति को स्थापित करें. इसके बाद गणपति को दूर्वा या पान के पत्ते के सहारे गंगाजल से नहलाएं. इसके बाद पीले रंग भगवान गणेश को पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें. कपड़े की जगह भगवान को मोती भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद अक्षत और फूल भी भगवान को चढ़ाएं.

रिद्धि-सिद्धि की स्थापना:
भगवान गणेश की दो पत्नी 'रिद्धि-सिद्धि' हैं और इनके दो पुत्र हैं जिन्हें हम शुभ और लाभ के नाम से जानते हैं. गणेशजी के पुत्रों के नाम हम 'स्वास्तिक' के दाएं-बाएं लिखते हैं. घर के मुख्य दरवाजे पर हम 'स्वास्तिक' मुख्य द्वार के ऊपर मध्य में और शुभ और लाभ बायीं तरफ लिखते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करने से पहले प्रतिमा के दोनों ओर रिद्धि-सिद्धि के रूप में एक-एक सुपारी भी रखें.

ऐसे करें पूजा:
गणपति की चौकी के पास तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर रखें. कलश गणपित के दांई ओर होना चाहिए. इस कलश के नीचे चावल या अक्षत रखें और इसपर मोती अवश्य बांधें. गणपति के बांई तरफ चावल के ऊपर घी का दिया अवश्य जलाएं. पूजा और माला जपने का समय एक रखेंगे तो मनचाहा लाभ होगा. इसके बाद भगवान की आरती करें.
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

संकल्प ज़रूर लें:
गणपति की स्थापना के बाद दांए हाथ में गंगाजल लेकर भगवान गणेश स्थापना के दिवस का संकल्प लें. अर्थात आप कितने दिनों तक गणपति को अपने घर में रखना चाहते हैं. 3, 5, 7, 9 या फिर 11 दिन. संकल्प को ज़रूर पूरा करें.

जाप करें:
ओsम गणेशाय नम: का जाप करते हुए भगवान से घर में रिद्धि-सिद्धि सहित रहने का आह्वान करें. और कृपा बनाए रखने को की विनती करें.

घर में समृद्धि के लिए करें ये काम:
अगर आप चाहते हैं कि आपका घर हमेशा समृद्द बना रहे और सुख रहे तो शुभ-लाभ की भी पूजा करें. इसके लिए रोजाना भगवान को 5 दूर्वा अर्पित करें. इसके अलावा इस बात का ध्यान रखें कि जितने दिन भगवान गणेश घर में हैं उन्हें 3 समय भोग लगाएं और मोदक अर्पित करें.

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