Motivational Story: जिंदगी में दुख को कम करने के लिए खुशी को दोगुना कर दीजिए

बीती बातों को लेकर बैठे रहना किसी समस्या का हल नहीं है. खट्टी यादों के साथ मीठी मुस्कानों को घोल दीजिए, जिंदगी में स्वाद बढ़ जाएगा.

News18Hindi
Updated: September 8, 2018, 7:50 AM IST
Motivational Story: जिंदगी में दुख को कम करने के लिए खुशी को दोगुना कर दीजिए
प्रेरक कथाएं
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Updated: September 8, 2018, 7:50 AM IST
एक कालेज का छात्र था जिसका नाम था रवि. हमेशा वह बहुत चुपचाप सा रहता था. किसी से ज्यादा बात नहीं करता था इसलिए उसका कोई दोस्त भी नहीं था. वह हमेशा कुछ परेशान सा रहता था. पर लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे.

एक दिन वह क्लास में पढ़ रहा था. उसे गुमसुम बैठे देख कर उनकी क्लास टीचर उसके पास आये और क्लास के बाद मिलने को कहा.

क्लास खत्म होते ही रवि टीचर के कमरे में पहुंचा.

“रवि मैं देखता हूँ कि तुम अक्सर बड़े गुमसुम और शांत बैठे रहते हो, ना किसी से बात करते हो और ना ही किसी चीज में रूचि दिखाते हो, इसलिए इसका सीधा असर तुम्हारी पढ़ाई में भी साफ नजर आ रहा है! इसका क्या कारण है ?” टीचर ने पूछा.

रवि बोला, मेरा भूतकाल का जीवन बहुत ही खराब रहा है, मेरी जिन्दगी में कुछ बड़ी ही दुखदायी घटनाएं हुई हैं, मैं उन्ही के बारे में सोच कर परेशान रहता हूँ, और किसी चीज में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता हूं.

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अध्यापक महोदय ने ध्यान से रवि की बातें सुनी और मन ही मन उसे फिर से सही रास्ते पर लाने का विचार करके रविवार को घर पर बुलाया.
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रवि निश्चित समय पर अपने टीचर के घर पहुंच गया.

“रवि क्या तुम नींबू शरबत पीना पसंद करोगे?” अध्यापक ने पुछा.

जी...रवि ने झिझकते हुए कहा.

अध्यापक महोदय ने नींबू शरबत बनाते वक्त जानबूझ कर नमक अधिक डाल दिया और चीनी की मात्रा  कम ही रखी.

शरबत का एक घूंट पीते ही रवि ने अजीब सा मुंह बना लिया.

अध्यापक महोदय ने पुछा,  “क्या हुआ, तुम्हें ये पसंद नहीं आया क्या?”

जी, वो इसमे नमक थोड़ा अधिक पड़ गया है, रवि ने कहा

टीचर ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा- “कोई बात नहीं मैं इसे फेंक देता हूँ, अब ये किसी काम का नहीं रहा.”

ऐसा कह कर अध्यापक महोदय गिलास उठा ही रहे थे कि रवि ने उन्हें रोकते हुए कहा, नमक थोड़ा सा अधिक हो गया है तो क्या, हम इसमें थोड़ी और चीनी मिला दें तो ये बिलकुल ठीक हो जाएगा.

इस पर टीचर ने कहा “बिलकुल ठीक रवि यही तो मैं तुमसे सुनना चाहता था. अब इस स्थिति की तुम अपनी जिन्दगी से तुलना करो, शरबत में नमक का ज्यादा होना जिन्दगी में हमारे साथ हुए बुरे अनुभव की तरह. इस बात को समझो, शरबत का स्वाद ठीक करने के लिए हम उसमे में से नमक नहीं निकाल सकते, इसी तरह हम अपने साथ हो चुकी दुखद घटनाओं को भी अपने जीवन से अलग नहीं कर सकते, पर जिस तरह हम चीनी डाल कर शरबत का स्वाद ठीक कर सकते हैं. उसी तरह पुरानी कड़वाहट और दुखों को मिटाने के लिए जिन्दगी में भी अच्छे अनुभवों की मिठास घोलनी पड़ती है.

दोस्तों बीती बातों को लेकर बैठे रहना किसी समस्या का हल नहीं है. खट्टी यादों के साथ मीठी मुस्कानों को घोल दीजिए, जिंदगी में स्वाद बढ़ जाएगा.

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