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घर में खुद का काम भी नहीं करते बच्चे? एक्सपर्ट्स की बताई ये टिप्स करेंगी हेल्प

एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों को कोई भी काम पूरी तरह से सौंपने के बजाए उनके साथ मिलकर काम करें. (फोटो-canva)

एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों को कोई भी काम पूरी तरह से सौंपने के बजाए उनके साथ मिलकर काम करें. (फोटो-canva)

How to Involve your children in household work : बच्चे खुद के काम कर सकते हैं, आपके काम में हाथ बंटा सकते हैं. लेकिन का ...अधिक पढ़ें

How to Involve your children in household work : बच्चों के होते हुए घर में पैरेंट्स का शांत रहना किसी चमत्कार से कम नहीं होता है क्योंकि उन्हें बच्चों के हर एक एक्ट पर रिएक्ट करने की आदत पड़ जाती है. कहीं वो किसी चीजे से चोट ना लगवा लें, कहीं कुछ गलती ना कर बैठें, कहीं कोई काम ना बिगड़ जाए. इन्हीं सबसे बचने के लिए अक्सर माता-पिता बच्चों को कदम-कदम पर इंस्ट्रक्ट करते रहे हैं. ऐसा व्यवहार जब बच्चे बहुत छोटे हैं तब तक तो ठीक है, लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े होने लगते हैं, उन्हें कोई काम खुद करने की आदत नहीं रहती है क्योंकि उन्हें लगता है कि काम करेंगे तो मम्मी-पापा डांटेंगे, कोई गलती हो जाएगी, कुछ टूट जाएगा. इसलिए वो चीजों को वहीं का वहीं छोड़ देते हैं. एक समय ऐसा भी आता है जब घर में बच्चे खुद के काम कर सकते हैं, आपके काम में हाथ बंटा सकते हैं लेकिन काम करते नहीं.

अब यहां पेरेंट्स के लिए दिक्कत बढ़ जाती है. होता ये है कि बात बच्चों को समझाने से आगे बढ़कर उन पर चिल्लाने और पिटाई तक पहुंच जाती है लेकिन समाधान नहीं निकलता कि कैसे आपके बोलते ही बच्चे काम कर दें. दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, अगर पैरेंट्स अपने कहने का अंदाज बदलकर या दूसरे तरीके से उन्हें काम की याद दिलाएं, तो ये मददगार हो सकता है. लेकिन कई बार देखने में आया है कि ये परेशानी सुलझती नहीं. दरअसल, बार-बार याद दिलाने और हताश होने का मतलब है कि आपका तरीका काम नहीं कर रहा है. आपको बताते हैं कि ऐसी समस्या निपटने में पेरैंटिंग एक्सपर्ट क्या कहते हैं.

बच्चों से जुड़े निर्णय में वो भी शामिल हों
कई बार ये देखने में आया है कि बच्चों से जुड़े फैसले लेते समय पैरेंट्स बच्चों की अनदेखी कर देते हैं. फिर ये आस करते हैं कि बच्चे उनके फैसले को मानेंगे. लेकिन ऐसा करना गलत है. अनकंडीशनल पेरैंटिंग (Unconditional Parenting) के लेखक एल्फी कोहेन (Alfie Cohen) के अनुसार, घर के बड़े अक्सर पहले निर्णय कर लेते हैं. बच्चों को बाद में शामिल करते हैं. फिर मानकर चलते हैं कि उनके निर्णय को माना जाएगा. और यहीं से संघर्ष शुरू होता है. इसलिए ऐसी स्थिति का हल निकालने पर जोर दें. बच्चों की फीलिंग्स का सम्मान करते हुए उन्हें समझाएं कि फलां काम करते तो कितना बेहतर होता.

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बच्चों पर काम पूरी तरह ना छोड़ें, उन्हें सिखाएं
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School) के एसोसिएट प्रोफेसर स्टुअर्ट एब्लॉन (Stuart Ablon) के अनुसार, 8 साल तक के बच्चों को कोई भी काम पूरी तरह से सौंपने के बजाए उनके साथ मिलकर काम करें. 8 साल से ज्यादा उम्र वाले बच्चे को भी शुरुआत में हेल्प करने और सिखाने की जरूरत होगी.

बच्चों को बताएं, उन्हें काम में सहभागी बनाएं
दरअसल, बच्चों को जिंदगी की सच्चाई पता नहीं होती है, उन्हें ये बताना माता-पिता की ही जिम्मेदारी होती है. उन्हें नहीं पता कि पूरे परिवार को चलाने के लिए एक दिन में कितने काम करने पड़ते हैं. द गुड न्यूज अबाउट बैड बिहेवियर (The Good News About Bad Behavior) की ऑथर कैथरीन रेनॉल्ड्स लुई (Katherine Reynolds Louis) के अनुसार, अपनी फैमिली के साथ बैठकर डिसकस करना हेल्पफुल हो सकता है. बच्चों को एक दिन या एक हफ्ते में होने वाले सभी कामों की लिस्ट दिखाएं. और उन्हें भी इन कामों में सहभागी बनाएं.

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बच्चों को बताएं उनकी भूमिका, चिड़चिड़ाहट से बचें
जिस घर में बच्चे होते हैं वहां अक्सर ये देखने को मिलता है कि घर में सामान इधर-उधर फैला हुआ है. बच्चे खेलकर अपनी चीजों को सही जगह नहीं रखते हैं, ऐसे छोट-छोटे काम नहीं करने पर बच्चों पर चिड़चिड़ाना नेचुरल है. इक्वल पार्टनर्स- इम्प्रूविंग जेंडर इक्वेलिटी एट होम (Equal Partners – Improving Gender Equality at Home) की ऑथर केट मैंगिनो (Kate Mangino) कहती हैं, अगर आप बच्चों पर इतनी सी बात पर चिड़चिड़ाते हैं तो इसका मतलब है कि आपका सिस्टम ठीक नहीं है. आप बच्चों को उनकी भूमिका बताकर चिड़चिड़ाहट से बचें. जब लगे कि आप बहुत ज्यादा तंग आ गए हैं, तो थोड़ा ठहरें और सोचें.

Tags: Lifestyle, Parenting, Parenting tips, Parents

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