शर्म की वजह से आप भी नहीं कह पाते दिल की बात? आखिर क्यों शर्म करती है बेहाल, जानें

शर्म पैदा हो जाती है वो जन्म से ही हमारे संग नहीं होती है.
Image Credit: pexels-anna-shvets

शर्म पैदा हो जाती है वो जन्म से ही हमारे संग नहीं होती है. Image Credit: pexels-anna-shvets

Psychology Of Shyness: शर्म आती हैं मगर आज ये कहना होगा...अगर आपको भी कुछ कहने करने में इस तरह की शर्म (Shyness) महसूस होती है तो ये न्यूरोबॉयलॉजी (Neurobiology) के कमाल के साथ ही पेरेंटिंग प्रैक्टिस और जीवन के अनुभवों का असर भी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 10:41 AM IST
  • Share this:
Psychology Of Shyness: अगर आप भी अपने शर्मीले स्वभाव की वजह से लोगों के निशाने पर रहते हैं तो आपको इस एहसास के बारे में जानने की सख्त जरूरत है.शर्मीलापन (Shyness) एक अजीब तरह के डर या आशंका का एहसास है जो कुछ लोग दूसरों के पास जाने पर या दूसरों के उनसे संपर्क करने पर लगातार महसूस करते हैं. इसे डर की प्रतिक्रिया कह सकते हैं. साइकोलॉजी टुडे में छापी रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च बताती हैं कि शर्मीलेपन की एक न्यूरोबायोलॉजी (Neurobiology) है जो ब्रेन में न्यूरॉन्स के एक स्पेसिफिक सर्किट में वैसे ही काम करती है जैसे किसी वाद्ययंत्र में संगीत रचा (Orchestrated) जाता है,लेकिन इसमें रंग मंडली (Repertoire) की जगह हम स्वभाव रखते हैं. इसके साथ ही शर्मीलेपन पर हमारे परिवेश का भी बहुत अधिक असर पड़ता है. मसलन हमारे माता-पिता के हमें पालने के तरीकों और जिंदगी के अनुभवों से भी हमारा शर्माना या न शर्माना तय होता है. आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि आखिर शर्म आती क्यों है.

क्या है शर्म की वजहः  

शर्म के लिए हमारे कुछ खास कैरेक्टरिस्टिक जवाबदेह होते हैं. मसलन सेल्फ कांशसनेस, खुद के लिए नेगेटिव सोच,लो सेल्फ स्टीम, और दूसरों के द्वारा जज किए जाने और अस्वीकारे जाने का डर. शर्मीले लोग अक्सर दूसरों से अपना अवास्तविक सोशल कंपैरिजन करते हैं, सबसे जीवंत लोगों से वह खुद की तुलना करते हैं और यह मानते है कि दूसरे लोग लगातार उनका खराब मूल्यांकन कर रहे हैं, शर्मीले लोग नए सोशल अवसरों को खो देते हैं, नतीजन वह अपने सोशल स्किल को सुधारने में नाकामयाब रहते हैं.

ये भी पढ़ेंः फ्रेंड बनाने से पहले खुद के बेस्ट फ्रेंड बनिए, फायदे में रहेंगे आप,जानें कैसे 
क्या लोग शर्मीले पैदा होते हैंः 

शर्मीलापन अत्यधिक आत्म-चेतना, नेगेटिव आत्म-मूल्यांकन और खुद के बारे में नेगेटिव सोचने में बिजी (Self-Preoccupation) रहने का नतीजा है. इंसान को खुद के होने का एहसास 18 महीने की उम्र से होना शुरू होता है, इसलिए कहा जा सकता है कि लोग शर्मीले पैदा नहीं हो सकते. लगभग 20 फीसदी बच्चे उच्च प्रतिक्रियाशील (Highly Reactive Temperament) स्वभाव के साथ पैदा होते हैं, लेकिन यह गारंटी नहीं देता है कि वे शर्मीले होंगे या अपने व्यवहार को बदलने में नाकामयाब रहेंगे.

बच्चे क्यों शर्माते हैंः  



देखा जाए तो शर्म के लिए जैविक (Biological) और पर्यावरणीय (Environmental) दोनों ही कारक जवाबदेह हैं. बच्चे अलग-अलग टेंपरामेंट के साथ पैदा होते हैं और बेहद संवेदनशील स्वभाव के साथ पैदा हुए बच्चों के अक्सर शर्मीले स्वभाव के होने की संभावना रहती हैं. हालांकि सपोर्टिव और सेंसिटिव पैरेंटिंग बच्चों में शर्म या सोशल एंग्जाइटी पनपने के खिलाफ उनका सुरक्षा घेरा बन सकती है.

ये भी पढ़ें - बच्‍चों के साथ निभाएं दोस्‍ती का रिश्‍ता, बढ़ेंगी नजदीकियां

शर्मीले और अंतर्मुखी स्वभाव में हैं अंतरः  

शर्मीला होना और अंतर्मुखी होना दोनों अलग- अलग स्वभाव हैं.इंट्रोवर्ट्स अकेले रहते हुए भी ऊर्जावान महसूस करते हैं, जबकि शर्मीले लोग अक्सर दूसरों के साथ जुड़ना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इंसानी बातचीत से होने वाली चिंता और दूसरे के द्वारा जज किए जाने के डर से कैसे पार पाया जाए.

शर्मीलेपन पर काबू कैसे करेंः

शर्मीले लोग अपनी पहचान को बदले बिना सामाजिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि अक्सर लोगों का अपनी शर्म को स्वीकार करना अधिक अच्छा होता है और ऐसे वह खुद को सेल्फ कांशस रहने के एहसास से फ्री कर सकते हैं. इसके लिए ठोस रणनीति बनाकर उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ सकता है.शर्मीले लोगों को सोशल इवेंट से बचने के बजाय वहां जाना चाहिए. इसके लिए वह इस इवेंट में जाने से पहले अपने सोशल स्किल को बढ़ाने की प्रैक्टिस कर सकते हैं. मसलन वह पहले ही इंवेट में बात करने के लिए कुछ सवाल और टॉकिंग प्वाइंट्स का अभ्यास कर सकते हैं. वे अपनी नेगेटिव रिएक्शन पाने की सोच रखने वाले माइंडसेट को बदलकर पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद लगाने की प्रैक्टिस भी कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें:कामयाबी के लिए जरूरी है टीम वर्क, जानें इसकी हिडन पावर का राज  

शर्मीलेपन पर ऐसे लगेगी रोकः  

किसी भी सामाजिक स्थिति से निपटने की पहले से की गई तैयारी से आपका ध्यान क्या गलत हो सकता है से हटकर क्या सही हो सकता है पर फोकस कर सकता है. दूसरों से पूछने के लिए सवाल और किस्से तैयार करें जिन्हें आप उनसे साझा करना चाहते हैं.दूसरों के लिए जिज्ञासा रखें और अपनी खुद की आलोचना में नरमी बरत कर आप शर्मीलेपन से छुटकारा पा सकते हैं.

शर्म को दें मातः  

शर्म अपने आप नहीं मिटती. शर्मीले लोग सबसे अधिक सफल होते हैं जब वे खुद के शर्मीले स्वभाव को समझते और उसे स्वीकार करते हैं और फिर इस सेल्फ अवेयरनेस के आधार पर काम करते हैं. वे मानते हैं कि छोटी सी बात स्वाभाविक रूप से नहीं कही जा सकती है, इसलिए वे इसके लिए पहले से ही प्लान करते हैं. सवालों और किस्सों का पूर्वाभ्यास करते हैं, और नई सेटिंग में सहज महसूस करने के लिए सोशल इवेंट में जल्दी पहुंचते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज