कैसे बचाएं अपने बच्‍चों को यौन अपराधियों से ?

बच्‍चों के साथ इस तरह की घटनाओं को तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक हम बच्‍चों को यह न सिखाएं कि अगर कोई भी गलत तरीके से हाथ लगाता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करो.

News18Hindi
Updated: May 4, 2018, 3:28 PM IST
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Updated: May 4, 2018, 3:28 PM IST
(एक सप्‍ताह पहले हमने एक सीरीज शुरू की थी. आठ भागों में चलने वाली इस सीरीज का मकसद बाल यौन अपराधी यानी पीडोफाइल के मनोविज्ञान के विभिन्‍न पहलुओं की पड़ताल करना था. आज आप इस सीरीज की आठवीं और आखिरी किश्त पढ़ रहे हैं. लंदन स्थित प्रतिष्ठित मनोचिकित्‍सक डॉ. द्रोण शर्मा ने इस सीरीज में पीडोफाइल के मनोविज्ञान के विभिन्‍न पहलुओं पर रौशनी डाली. उसके कारणों, इलाज और बचाव के बारे में बात की. इस सीरीज के बाकी सभी आर्टिकल के लिंक इस अंक के आखिर में दिए गए हैं. अगर इस पर आपके कुछ विचार हैं या आपके मन में कोई सवाल है तो आप इस पते पर हमें भेज सकते हैं - ask.life@nw18.com. जल्‍द ही हम अपनी अगली सीरीज के साथ उपस्थित होंगे. )

बच्‍चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के सभी पहलुओं पर हमने बात की. अपराधी के मनोविज्ञान से लेकर उसके कारणों और इलाज तक सभी पहलुओं को देखा. लेकिन सबसे महत्‍वपूर्ण सवाल अभी तक अपनी जगह बना हुआ है वह ये कि अपने बच्‍चों को इससे बचाया कैसे जाए? अगर घर के अंदर और घर के बाहर, हर जगह हर वक्‍त बच्‍चों के साथ किसी न किसी रूप में यौन अपराध होने की संभावना बनी हुई है और आप खुद हर वक्‍त उसकी रक्षा करने के लिए उसके साथ मौजूद नहीं हो सकते तो ऐसे क्‍या जरूरी कदम उठाए जाएं कि हम अपने बच्‍चों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकें.



मुझे इसके लिए जो चीज सबसे बुनियादी और सबसे जरूरी लगती है, वो है सेक्‍स एजूकेशन. हिंदुस्‍तान में आज भी सेक्‍स एजूकेशन को लेकर एक साफ और ठोस अवधारणा नहीं है. सेक्‍स एजूकेशन की बात करते ही लोगों की भृकुटियां तन जाती हैं कि आप बच्‍चों को सेक्‍स के बारे में बताएंगे.

जब हम एकदम छोटे बच्‍चों को सेक्‍स एजूकेशन देने की बात करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्‍हें सेक्‍सुअल एक्टिविटी के बारे में बताया जाए. इसका अर्थ यह है कि उन्‍हें समझाया जाए कि गुड टच और बैड टच क्‍या होता है, सेफ और अनसेफ टच क्‍या होता है. शरीर का कौन-सा ऐसा हिस्‍सा सेंसिटिव होता है, जहां मम्‍मी-पापा के अलावा कोई और हाथ नहीं लगा सकता.

बच्‍चों के साथ इस तरह की घटनाओं को तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक हम बच्‍चों को यह न सिखाएं कि अगर कोई भी गलत तरीके से हाथ लगाता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करो. जब तक हम उन्‍हें ये सिखाएंगे नहीं कि ये गलत है और इसके बारे में हमेशा घर आकर बताओ तो वो मन ही मन डरता रहेगा, लेकिन बात नहीं करेगा. ये हमारे एजूकेशन सिस्‍टम की जिम्‍मेदारी है कि बच्‍चों को ऐसी ट्रेनिंग दी जाए. बच्‍चों के साथ-साथ पैरेंट्स को भी यह ट्रेनिंग दी जाए कि वे बच्‍चों को इस बारे में खुलकर बोलने के लिए प्रेरित करते रहें. बच्‍चा डरे नहीं.

बाकी समाज में क्‍या होता है, हम देखते ही हैं. कितने ऐसे मामले होते हैं, जहां परिवार के लोग खुद अपने लड़के के अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं, नेता बयान देते हैं कि लड़के हैं, गलती हो जाती है. तो समाज में तो यह हो ही रहा है. अगर कोई चीज इस स्थिति को बदल सकती है तो वो है एजूकेशन. मेरे लिहाज से यही बदलाव की सबसे महत्‍वपूर्ण कड़ी है.

पहली किश्‍त - पीडोफाइल होने का क्‍या अर्थ है?
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दूसरी किश्‍त - एक पीडोफाइल या बाल यौन अपराधी का मनोविज्ञान क्या होता है?
तीसरी किश्‍त - बच्‍चों के साथ यौन अपराध की घटनाएं कैसे घटती हैं ?
चौथी किश्‍त - बच्‍चे के साथ स्‍नेह और परवरिश का रिश्‍ता कैसे बदल जाता है यौन अपराध में?
पांचवी किश्‍त - क्‍या दवाइयों और काउंसिलिंग के जरिए एक पीडोफाइल का इलाज संभव है ?
छठी किश्‍त - क्‍यों होता है घरों के अंदर बच्‍चों के साथ यौन अपराध?
सातवीं किश्त- बच्‍चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के लिए पोर्नोग्राफी कितनी जिम्‍मेदार?
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