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बच्चे पैदा होने में आ रही है समस्या, मां बनने के लिए महिलाएं करें ये काम

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Updated: January 7, 2020, 1:17 PM IST
बच्चे पैदा होने में आ रही है समस्या, मां बनने के लिए महिलाएं करें ये काम
मां बनने के लिए महिलाएं करें ये काम

महिलाओं के लिए मां बनने से बड़ा सुख शायद ही कोई दूसरा हो. लेकिन इंफर्टिलिटी की वजह से कई महिलायें इस सुख से मरहूम रह जाती हैं.

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  • Last Updated: January 7, 2020, 1:17 PM IST
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विश्व भर में तकरीबन 16 प्रतिशत लोग इंफर्टिलिटी की समस्या का शिकार हैं. इंफर्टिलिटी लोगों के लिए काफी बड़ी समस्या है. इंफर्टिलिटी की समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है. इंफर्टिलिटी की समस्या बायॉलजिकल भी हो सकती है और इसके अलावा भी इसकी कई वजहें हो सकती हैं. महिलाओं के लिए मां बनने से बड़ा सुख शायद ही कोई दूसरा हो. लेकिन इंफर्टिलिटी की वजह से कई महिलायें इस सुख से मरहूम रह जाती हैं. आइए वेबसाइट वेब एमडी के हवाले से जानते हैं कुछ ऐसे तरीके जिनसे महिलाएं इंफर्टिलिटी की समस्या से उबार सकती हैं और मां बनने का सुख हासिल कर सकती हैं...

दवाएं और हार्मोन: महिलाओं की इंफर्टिलिटी की समस्या से निजात दिलाने के लिए फर्टिलिटी की दवाइयां और हार्मोन काफी मददगार होते हैं. इससे महिलाओं में हार्मोन का स्तर सुधारने और अंडे (ovum) बनने की प्रक्रिया ठीक तरह से काम करने लगती है.

सर्जरी: महिलाओं में इंफर्टिलिटी की समस्या को ठीक करने के लिए सर्जरी भी एक अच्छा आप्शन है. सर्जरी के जरिए उन टिश्यू को महिला के शरीर से निकाल दिया जाता है जो उसकी फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं. इसके जरिए ब्लॉक हो चुकी फेलोपियन tube (fallopian tubes) को भी खोला जाता है.

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आईयूआई (intrauterine insemination): इस तकनीक में स्पर्म को कलेक्ट करके महिला के गर्भाशय में उस समय सीधे डाला जाता है जब उसके शरीर में अंड निषेचन (ovulating) की प्रक्रिया चल रही होती है.

आईवीएफ (in vitro fertilization): इस तकनीक में स्पर्म और एग्स को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है. फर्टिलाइज किया हुआ एग 3 से 5 दिन में विकसित हो कर भ्रूण बन जाता है. इसके बाद भ्रूण को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है.

जीआईएफटी और जेडआईएफटी ( gamete intrafallopian transfer and zygote intrafallopian transfer): इस तकनीक में स्पर्म और एग को कलेक्ट करके सीधे महिला की फेलोपियन tube में डाल दिया जाता है. जीआईएफटी की प्रक्रिया में स्पर्म और एग दोनों को फेलोपियन tube में डाल दिया जाता है. वहीं ZIFT में स्पर्म और एग को पहले लैब में फर्टिलाइज किया जाता है. इसके 24 घंटे बाद जब एग फर्टिलाइज हो जाता है तो इसे महिला की फेलोपियन tube में रखा जाता है.Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: January 7, 2020, 1:15 PM IST
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