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पब्लिक प्लेस पर दूसरों के साथ कैसे करें व्यवहार, बचपन से बच्चों को सिखाएं ये एटिकेट्स

News18Hindi
Updated: February 21, 2020, 3:48 PM IST
पब्लिक प्लेस पर दूसरों के साथ कैसे करें व्यवहार, बचपन से बच्चों को सिखाएं ये एटिकेट्स
बच्चों को बचपन से ही छोटी-छोटी चीजें बताएं जिसकी मदद से आपके बच्चे पब्लिक प्लेस में शिष्टाचार और अनुशासन के तहत व्यवहार करें.

बच्चों को शिष्टाचार सिखाने का सबसे शुरुआती सही तरीका यही है कि उन्हें बचपन से ही थोड़ा-थोड़ा करके अच्छी चीजों के बारे में बताया जाए.

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  • Last Updated: February 21, 2020, 3:48 PM IST
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बच्चों को व्यवहारिक बनाने के पीछे पैरेंट्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है. दो साल के बच्चे को पढ़ाने की तुलना में उन्हें लोगों से अच्छा व्यवहार करना सिखाना कठिन काम होता है. उन्हें Please और Thank You जैसे शब्द बचपन से ही सिखाने पड़ते हैं. बच्चों को बचपन से ही शिष्टाचार सिखाने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ती है. बच्चों को शिष्टाचार सिखाने का सबसे शुरुआती सही तरीका यही है कि उन्हें बचपन से ही थोड़ा-थोड़ा करके अच्छी चीजों के बारे में बताया जाए.

सरल शब्दों से शुरुआत करें और धीरे धीरे लोगों से अच्छा व्यवहार करना सिखाएं. ऐसे में अगर आपको उन्हें आचार-व्यवहार सिखाने में थोड़ी सख्ती भी करनी पड़े तो जरूर करें. साथ ही उन्हें अपने सभी सामाजिक संबंधों में विनम्र होने के लिए भी प्रोत्साहित करें. आपको बता दें कि अक्सर बच्चों के खराब व्यवहार और शिष्टाचार के कारण पैरेंट्स को शर्मिंदा होना पड़ता है.

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अगर आप घर से बाहर हैं तो अंजान लोगों के बीच भी आपका मजाक बन सकता है. इसलिए बच्चों को बचपन से ही छोटी-छोटी चीजें बताएं जिसकी मदद से आपके बच्चे पब्लिक प्लेस में शिष्टाचार और अनुशासन के तहत व्यवहार करें. आइए आपको बताते हैं कैसे करें उनकी मदद.



अपनी बारी का इंतजार करना
अपने बच्चे को शुरू से ही अपनी बारी का इंतजार करना सिखाएं. उन्हें समझाएं कि इंताजार करना जरूरी होता है. उन्हें धैर्य रखने के बारे में बताएं. अक्सर बच्चे काम को जल्दी निपटाने की जिद्द करने लगते हैं ऐसे में उन्हें धर्य रखना सिखाना चाहिए. उन्हें बताएं कि बातचीत करना हो या कुछ मांगना या खरीदना हो तो कभी भी जल्दी न करके अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए.

बच्चों को धैर्य रखने के लिए अपनी बारी का इंतजार करना सिखाया जाना चाहिए. उन्हें बाहर किसी भी व्यक्ति से बात करने का सही तरीका सिखाएं. उन्हें बताएं कि अपने से बड़ों से कैसे बातचीत करनी चाहिए. उन्हें कैसे सम्मान देना चाहिए.

अंदर और बाहर बात करने का तरीका
बच्चों को बाहर और अंदर बात करने के तरीके के बारे में बताना चाहिए. उन्हें इनडोर और आउटडोर आवाजों के बीच अंतर सिखाएं. उन्हें बताएं कि जब एक रेस्तरां, मूवी थियेटर, या किसी खास स्थान पर एक निश्चित शांति की जरूरत होती है, तो उन्हें अपनी आवाज को कैसे कम रखना चाहिए. उन्हें शांति से धीरे धीरे बात करने का गुण सिखाएं.

उन्हें समझाएं कि ऐसी जगहों पर ज्यादा तेज आवाज करने से दूसरे लोग परेशान होते हैं. वहीं घर पर केवल परिवार के सदस्य होते हैं इसलिए आवाज तेज रखी जा सकती है लेकिन बाहर आराम से बात करनी चाहिए ताकि सब आपकी बात न सुन सकें. बचपन से ही बच्चों को इन बातों के बारे में बताना चाहिए.

पर्सनल स्पेस का मतलब समझाएं
बच्चों को बताएं कि भीड़ भरे पब्लिक प्लेस पर, हर कोई किसी न किसी व्यक्तिगत स्थान का हकदार होता है. उन्हें सिखाएं कि वे सामने वाले व्यक्ति पर न गिरें उन्हें बताएं कि एक पार्क में उन्हें चारों ओर दौड़ने-भागने की अनुमति है लकिन घर में ऐसा नहीं है.

ये सब चीजें बच्चों को बतानी जरूरी होती हैं. अगर कुछ नियम हैं, जो आपके बच्चे की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह नियमों का पालन करें. उन्हें पर्सनल स्पेस के बारे में अच्छे से बताएं.

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सुरक्षा नियमों का पालन करें
बच्चे को शुरू से ही घर की सारे नियमों के बारे में बताएं और तय करें कि वो इसे फॉलो करें. इस तरह धीरे-धीरे उनके लिए सुरक्षात्मक नियम बनाएं. उन्हें बताएं कि ये नियम क्यों उनके लिए जरूरी हैं. किचन से लेकर बाथरूम तक के नियम उन्हें बताएं. उन्हें बताएं कि खाना खाने, चलने, बैठने और सोने का भी तरीका होता है. घर की साफ सफाई रखने के बारे में भी उन्हें बचपन से सिखाएं.

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First published: February 21, 2020, 3:48 PM IST
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