घर से काम करने का एक्‍सपीरियंस थोड़ा खट्टा, थोड़ा मीठा, WFH में कुछ ऐसे बदल गई लाइफ

धीरे-धीरे लोगों ने खुद को WFH में ढाल लिया है. Image/shutterstock

धीरे-धीरे लोगों ने खुद को WFH में ढाल लिया है. Image/shutterstock

वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) में लोगों के जीवन में कई बदलाव हुए हैं. जहां कामकाजी जीवन में परिवर्तन (Change) आया है, तो वहीं इसका असर लोगों की पर्सनल लाइफ (Personal Life) पर भी पड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 12:14 PM IST
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कोरोना काल (Corona Era) में संक्रमण के मद्देनजर बीते साल से ही कई कंपनियों के कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) कर रहे हैं. ऐसे में लोगों के जीवन में कई बदलाव हुए हैं. जहां कामकाजी जीवन में परिवर्तन आया है, तो वहीं इसका असर लोगों की पर्सनल लाइफ (Personal Life) पर भी पड़ा है. यानी पहले के मुकाबले में अब जीवन में काफी कुछ बदल गया है. हालांकि हर बदलाव के कुछ फायदे, कुछ नुकसान तो होते ही हैं और जो भी हो धीरे-धीरे ही सही मगर लोगों ने खुद को इसमें ढाल लिया है. ऐसे में लाइफ पूरी तरह से जैसे बदल गई है. आप भी जानिए वर्क फ्रॉम होम से कितना बदला है जीवन-

लोगों ने खुद को ढाल लिया 

पहले जब ऑफिस जाना होता था तब सुबह उठ कर ऑफिस की तैयारी करते थे. नहाना, कपड़े चेंज करना आदि. मगर अब जबसे वर्क फ्रॉम होम हो गया है तब से अक्‍सर लोग बिस्‍तर से ही वर्क फ्रॉम होम शुरू कर देते हैं. सेहत के नजरिये से यह सही नहीं है और अपना रूटीन वैसे ही बनाना चाहिए जैसे ऑफिस जाने के समय होता था. हालांकि कुछ लोगों ने अपना टाइम टेबल सेट किया हुआ है. यानी लोग घर पर काम करने के तरीके में खुद को ढाल रहे हैं.

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घर में बन गई काम की जगह 

वर्क फ्रॉम होम की शुरुआत में लोगों ने सोचा था कि यह थोड़े दिन का है इसलिए वे घर में कहीं भी बैठ कर अपना काम करने लगे. यानी घर में काम के लिए कोई जगह तय नहीं थी. लेकिन अब जबकि एक साल हो गया है और लोग इसमें ढलने लगे. साथ ही यह सुगबुगाहट भी होने लगी कि वर्क फ्रॉम होम को कुछ कंपनियां पर्मानेंट कर सकती हैं, ऐसे में लोगों ने अपने घरों में ही अपना ऑफिस बना लिया है. काम करने की एक जगह तय कर ली है. पूरे दिन बेड पर बैठ कर स्‍क्रीन पर नजर जमाए बैठे रहने से कमर दर्द, गर्दन दर्द आदि कई तरह की दिक्कतें होने का खतरा तो है ही. ऐसे में यह जरूरी भी है कि ऑफिस की तरह ही घर पर भी काम की जगह हो और अच्छे फर्नीचर के साथ लाइटिंग आदि सुविधाएं हों.

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बच्‍चों को मिला साथ

वर्क फ्रॉम होम के दौरान इस अच्‍छी बात यह हुई कि जो कामकाजी महिलाओं को अपने बच्‍चों के साथ ज्‍यादा समय रहने का मौका इसके जरिये मिल गया. पहले ऑफिस में सारा दिन बीतता था, मगर घर पर काम करने के दौरान बीच बीच में ब्रेक लेकर अपने बच्‍चों की केयर करना आसान हुआ है. कोरोना संक्रमण के इस दौर में बच्‍चे भी ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, तो उनको भी अपने पैरेंट्स का साथ मिल जाता है.

रिश्‍तों में बढ़ी समझ

कई जगह कपल्‍स वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. ऐसे में दोनों को ज्‍यादा समय पास रहने का मौका मिल रहा है. हांलाकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अक्‍सर काम का दबाव और अन्‍य जिम्‍मेदारियों का बोझ दो लोगों में कुछ समय के लिए तनाव भी पैदा कर देता है, लेकिन यह भी सही है कि इस दौरान दोनों ने एक दूसरे की जरूरतों और समस्‍याओं को अच्‍छी तरह समझा भी है. यही वजह है कि घर के कामों में भी कपल्‍स की साझेदारी हो रही है. यानी घर के काम हों या अन्‍य जिम्‍मेदारियां दोनों ने मिल कर इन्हें पूरा करना सीख लिया है.
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