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Human Rights Day: सावधान! इस सदी के सबसे बड़े खतरे की तरफ बढ़ रहे हैं आपके कदम...


मानवाधिकार दिवस पर जानें क्या मौत की तरफ बढ़ रहे हैं आपके कदम?

मानवाधिकार दिवस पर जानें क्या मौत की तरफ बढ़ रहे हैं आपके कदम?

अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार दिवस (Human Rights Day): हर साल मौसम में होने वाले बदलाव की वजह से विश्व भर में करीब डेढ़ लाख लोग मौत का शिकार हो जाते हैं.

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    अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार दिवस (Human Rights Day): आज मानवाधिकार (human rights day) दिवस है. लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने हेतु हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. इस दिन विश्व के कई देशों में मानवता के हनन और अधिकारों और किस तरह से लोगों के अधिकार खतरे में हैं ये बताया जाता है. सांस लेने के लिए शुद्ध हवा, पानी और शुद्ध जलवायु हमारे ऐसे बुनियादी मानवाधिकार (basic human rights) हैं जिनसे हम ज़्यादातर अनजान ही रहते हैं. इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूएन एन्वायरमेंट प्रोग्राम की एक रिपोर्ट तैयार करवाई है. इस रिपोर्ट में उन बिंदुओं का जिक्र हैं जिन्हें लेकर हमें सावधान रहने की जरूरत है. आइए जानते हैं कि इस रिपोर्ट में ऐसा क्या ख़ास है...

    यूएन एन्वायरमेंट प्रोग्राम की इस रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि हर साल मौसम में होने वाले बदलाव की वजह से विश्व भर में करीब डेढ़ लाख लोग मौत का शिकार हो जाते हैं. मौसम में बदलाव से मतलब किसी प्राकृतिक आपदा से है जैसे कि तूफ़ान, बाढ़, प्रदूषण और दावानल (जंगल की आग). इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि भारत में इस साल तूफ़ान और बाढ़ की वजह से 370 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है.

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    रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि भारत की करीब 40 फीसदी आबादी प्रदूषण की गिरफ्त (जद) में है. हर साल जंगलों को साफ करने के लिए करीब 14 लाख हेक्टेयर की भूमि जलाई जाती है लेकिन इस्सकी वजह से 1200 टन मेगावाट टन जहरीली गैस उत्सर्जित होती है. दिल्ली-एनसीआर के अलावा अक्टूबर और नवंबर माह में कई शहर जहरीली हवा से प्रदूषित हैं. वहीं 10 करोड़ लोग जल संकट से जूझ रहे हैं.

    डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों की वजह से हर साल करीब 2.5 लाख मृत्यु दर बढ़ सकती है. मौसम में होने वाले इस बदलाव की वजह से पृथ्वी का तापमान 1.1 डिग्री बढ़ गया है. lancent के अनुसार, 21 वीं सदी में लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा मौसम में होने वाला बदलाव है.

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