Human Story: मर्दों के लिए मोटी लड़की मतलब हॉट बिग एसेट, लेकिन वो हॉट लड़की से शादी नहीं करते

मोटे होने की शर्मिंदगी और हीन भावना से लेकर प्‍लस साइज फैशन ब्‍लॉगर और इंस्‍टाग्रामर बनने तक अनंदिता रॉय का सफर

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: October 10, 2018, 1:05 PM IST
Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: October 10, 2018, 1:05 PM IST
हर मोटे इंसान को होती है मोटे होने की शर्मिंदगी. मुझे भी थी. हर मोटा इंसान सोचता है कि बस कैसे भी, कुछ भी करके वो पतला हो जाए. मैंने भी सोचा. हर मोटा इंसान मोटापे की वजह से खुद को कमतर महसूस करता है, दुख महसूस करता है, मैंने भी किया.

पहले मैं चिढ़ जाती थी ये सुनकर, ये सोचकर कि मैं मोटी हूं. फिर जब समझ आई, खुद को स्‍वीकार करना आया तो लगा कि चिढ़ने की क्‍या जरूरत है. मोटी तो मैं हूं. मोटा होना एक तरह का होना है, मोटा होना बुरा होना नहीं है. जब हम स्‍कूल में पढ़ते थे तो हमें अनॉनिम्‍स पढ़ाया जाता था. सफेद का उल्‍टा काला, दिन का उल्‍टा रात, नाटे का उल्‍टा लंबा, छोटे का उल्‍टा बड़ा, पतले का उल्‍टा मोटा. ये अपोजिट था, गलत या बुरा तो नहीं था. जैसे पतला होना है, वैसे ही मोटा होना.

सवाल ये है कि पतला होना अच्‍छा और मोटा होना बुरा कैसे हो गया. सफेद अच्‍छा और काला बुरा कैसे हो गया. बंगाली में एक कहावत है, जिसका अर्थ है कि जो काला है, वो जगत की रौशनी है. दुनिया के पैमानों के हिसाब से जो बुरा है, जो शर्मिंदगी है, जो सुंदर नहीं है, वह भी जगत की रौशनी है. हमें जिस चीज का सबसे ज्‍यादा दुख होता है, वो दुख ही कई बार हमारी ताकत बन जाता है. दुख ही नजर देता है, बाकी दुखों को संवेदना और आत्‍मीयता से देखने की. दुख हमें निखारता है. मुझे मोटे होने का दुख था, मेरे दुख ने मुझे निखारकर और सुंदर बना दिया.



1985 में मेरा जन्‍म हुआ एक संभ्रांत बंगाली परिवार में. पिता का नौकरी में तबादला होता रहता था, तो मैं भी कभी एक जगह टिककर नहीं रही. मैं हमेशा से मोटी नहीं थी. उम्र बढ़ने के साथ वजन बढ़ने लगा. पापा को लगा कि कहीं थॉइरॉइड तो नहीं. फैमिली हिस्‍ट्री थी थॉइरॉइड की. डॉक्‍टर को दिखाया गया, जांच हुई, कुछ नहीं निकला. वजन बढ़ता चला गया. डॉक्‍टरों ने कहा कि ये हॉर्मोनल है. तुम चाहो तो पतली हो सकती हो. लेकिन चूंकि मेरे हॉर्मोन मेरे साथ नहीं थे, तो मुझे पतला होने के लिए बहुत ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती.

जीवन में कई बार ऐसा समय भी आया कि मैं जान देकर भी पतली होने को राजी थी. बहुत मेहनत करनी पड़ती और मैंने वो बहुत मेहनत करने की कोशिश की. लेकिन अगर आप भीतर से खुश हैं, सकारात्‍मक हैं, खुद को प्‍यार करते हैं और आपके आसपास के लोग भी आपको प्‍यार करते हैं तो दूसरों की तय की हुई परिभाषा आपको ज्‍यादा देर तक दुखी नहीं रहने दे सकती. जब दुख वाला समय आता तो मैं पतले होने के लिए जान लगा देती, लेकिन फिर सोचती कि मैं इतना क्‍यों मरी जा रही हूं. मैं कर क्‍यों रही हूं ये सब. सिर्फ इसलिए कि कुछ लोगों की परिभाषा में मोटापा असुंदर है या कि इसलिए कि दुनिया के सारे शादी के विज्ञापनों में लिखा होता है कि उन्‍हें गोरी, पतली लड़की चाहिए. कोई मूर्ख और छोटी सोच का है तो उसके लिए मैं क्‍यों अपनी जान जलाऊं.

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इस समझ का भी ऐसा है कि ये रातोंरात नहीं आती. धीरे-धीरे आती है. 2016 की बात है. मैं एक लड़के को डेट कर रही थी. हम टिंडर से मिले थे और बाद में पता चला कि हमारे कई कॉमन दोस्‍त भी हैं. मैं उसे बहुत प्‍यार करती थी और मुझे लगता था कि वो भी मुझे प्‍यार करता है. लेकिन वो मेरे शरीर पर हमेशा टिप्‍पणी करता और मुझे शर्मिंदगी का एहसास कराता. वो कहता है कि मेरा दिमाग, आत्‍मविश्‍वास उसे अच्‍छा लगता है लेकिन वो सेक्‍सुअली मेरे प्रति आकर्षित नहीं है. उसका व्‍यवहार हमेशा मुझे याद दिलाता कि मैं बाकी लड़कियों की तरह नहीं हूं, जो शादी मटेरियल होती हैं, जो पतली, सुंदर और सुशील टाइप की होती हैं. मैं अपने शरीर को लेकर शर्मिंदा रहने लगी, मुझे लगा कि मैं सुंदर नहीं हूं और प्‍यार किए जाने के लायक भी नहीं. मेरा जो आत्‍मविश्‍वास उसे पसंद था, उसके व्‍यवहार ने उसे तोड़ डाला. मेरा खुद पर से भरोसा जाता रहा. मैं खुद को उसकी आंखों से देखती और उसकी आंखें कहती थीं कि तुम सुंदर नहीं हो. कई बार खुद से प्‍यार करना, खुद पर भरोसा करना काफी नहीं होता. हम चाहते हैं कि कोई और हमें बहुत प्‍यार करे, हम पर भरोसा करे. आप उस प्‍यार के आईने में खुद को सुंदर देखना चाहते हैं. और वो आईना जब हर वक्‍त ये एहसास दिलाए कि आप सुंदर नहीं, आप मोटे हैं तो पूरी दुनिया उजड़ जाती है. पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है.

मैं प्‍यार करती थी. प्‍यार ने मुझे तोड़ दिया. पूरे रिलेशनशिप के दौरान कभी ऐसा नहीं हुआ कि हम करीब आए हों या उसकी आंखों में मैंने अपने लिए कोई कामना देखी हो. ये बहुत गहरा दुख था. मैं उस दुख को अकेले सह रही थी और फिर एक दिन अचानक वो चला गया. बिना कुछ कहे, बिना कोई कारण बताए. मैं बुरी तरह टूट चुकी थी, अवसाद में थी. किसी काम में मेरा मन नहीं लगता था. बस दिन-रात रोती रहती. दुख बहुत हुआ और जितना हुआ, उसमें जलकर मैं और निखरी. दुख से बड़ा गुरु और कोई नहीं. हम चाहते हैं कि जीवन में सब सुंदर हो, लेकिन सब सुंदर ही होता तो ये समझ, ये नजर कहां से आती, जो तब आई, जब कुछ भी सुंदर नहीं था.



मेरे आसपास बहुत अच्‍छे लोग भी थे. वो मुझे बहुत प्‍यार करते थे, लेकिन उस क्षण में वो सब बेमानी हो गया था. धीरे-धीरे मैं उस प्रेम की तकलीफ से बाहर निकली. मेरी एक दोस्‍त ने कहा कि तुम लिखती क्‍यों नहीं. तुम प्‍लस साइज फैशन के बारे में बात करो, बॉडी पॉजिटिविटी के बारे में बात करो. मैंने एक इंस्‍टाग्राम अकाउंट शुरू किया और बॉडी शेमिंग के खिलाफ बॉडी पॉजिटिविटी के बारे में बात करनी शुरू की. मैंने अपनी तस्‍वीरों के साथ अपनी कहानी, अपने अनुभव लिखे. धीरे-धीरे और लोग जुड़ते गए और उन्‍होंने अपनी कहानियां साझा करनी शुरू की. कहानियों से कहानियां जुड़ती गईं और जिंदगी का बड़ा नरेटिव तैयार हो गया.

आप एक दुख से गुजर रहे थे, फिर आपने दखा कि आप अकेले नहीं हैं. कितने लोग हैं इस दुनिया में जो ऐसे ही अनुभव से गुजरे हैं, गुजर रहे हैं. अभी भी उनके पास शब्‍द नहीं हैं कहने को. वो आपके शब्‍दों में अपनी कहानी को महसूस करते हैं. साझेपन के एक अदृश्‍य तार ने हम सबको जोड़ दिया. अनेकों लड़कियों ने अपनी बॉडी शेमिंग की कहानियां सुनाईं. एक लड़की ने कहा कि उसकी मां उसे उसके मोटापे को लेकर मानसिक रूप से प्रताडि़त करती है. किसी को लगता है कि वो मोटा है, इसलिए वो प्रेम के लायक नहीं, वो दोस्‍ती के लायक नहीं. किसी को लग सकता है कि दुनिया में इतने दुख हैं, ये भी कोई दुख हुआ भला. बड़ा रंगीन सा दुख है. कुछ मोटी लड़कियों का मान‍सिक शगल है. इस असंवेदना का कोई क्‍या जवाब दे भला. अवांछित होना, अकेला होना बहुत गहरा दुख है. यह कितना भयानक है कि कोई दुनिया में खुद को सिर्फ इसलिए अकेला महसूस करे, अवांछित महसूस करे क्‍योंकि वो मोटा है.
मैं इंस्‍टाग्राम पर अपनी तस्‍वीरें लगाती हूं तो मर्द तारीफ करते हैं, वो कहते हैं कि तुम हॉट हो. लेकिन उनसे पूछो कि शादी करोगे क्‍या तो भई बिलकुल नहीं. उनके लिए मोटी लड़की, प्‍लस साइज का मतलब है बिग एसेट. बिग एसेट हॉट है, लेकिन शादी के लिए हॉट नहीं, दुबली-पतली लड़की चाहिए.



अब मैं शर्मिंदगी और एहसास-ए-कमतरी के उस दौर से बाहर आ चुकी हूं. मैं पॉजिटिव तो हमेशा से थी, लेकिन अब खुद से बहुत प्‍यार भी करने लगी हूं. जब आप खुद को पसंद करते हैं, अपने शरीर को पसंद करते हैं, जब खुद को आईने में देखते हैं और आपकी आंखें खुशी से चमकने लगती हैं. मेरे साथ यही होता है. अपने लिए प्‍यार और खुशी से भरी हुई मैं बॉडी शेमिंग का शिकार हुई लड़कियों से बस यही कहती हूं कि जीवन में कभी किसी को इतना अधिकार मत दे दो कि वो तुम्‍हें तुम्‍हारी ही नजरों में कमतर महसूस करा दे. हमें कोई शर्मिंदा नहीं कर सकता, जब तक हम न चाहें.

इसलिए जरूरी ये नहीं कि कोई और हमें चाहता है या नहीं. जरूरी ये है कि हम खुद को प्‍यार करते हैं या नहीं.

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