Human Story : थक के चूर हुए कैब ड्राइवर के लिए होटल में कमरा बुक किया

आरती के लिए लोगों को बड़े-छोटे काम के चश्मे से देखना मुश्किल है इसलिए हाल ही में उन्होंने कुछ ऐसा किया जो हम में से कम ही लोग करने का जज़्बा रख पाते हैं.

News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 2:43 PM IST
Human Story : थक के चूर हुए कैब ड्राइवर के लिए होटल में कमरा बुक किया
आरती चेन्नई में रहती हैं (AartiMadhusudan@facebook.com)
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Updated: December 21, 2018, 2:43 PM IST
किसी को अपने बराबर का समझना इतना मुश्किल क्यों है. यह सवाल अक्सर चेन्नई की आरती मधुसुदन के दिमाग में आता है जब वो अपने आसपास गैर बराबरी का माहौल खड़ा होते देखती हैं. आरती को लगता है हम कैसे इतनी आसानी से उन लोगों को अपने से कमतर समझने की हिम्मत कर बैठते हैं जो समाज की गठित परिभाषा में कथित रूप से 'छोटा' काम करते हैं. आरती के लिए लोगों को ऊंच-नीच के चश्मे से देखना मुश्किल है इसलिए हाल ही में उन्होंने कुछ ऐसा किया जो हम में से कम ही लोग करने का जज़्बा रख पाते हैं. पढ़िए आरती का अनुभव -

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लोगों को बराबरी का दर्जा देना क्योंकि हम सब बराबर ही हैं. मैं अपने माता-पिता के साथ चिदंबरम जा रही थी. ओला की कैब थी और हमारा ड्राइवर एलुमलई काफी शांत और धीरे बोलने वाला था लेकिन क्योंकि मैं आगे की सीट पर बैठी थी इसलिए उसके पास मेरे हजारों सवालों के जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था. सवाल उसकी ज़िंदगी के बारे में, उसके गांव, उसके बच्चों के बारे में. वो उसी दिन तिरुपति से ड्राइव करके आ रहा था और वो किसी भी सवारी को मना नहीं कर रहा था क्योंकि उसे अपना लोन जो चुकाना है. खैर, हम आगे बढ़े और हमने शहर के सबसे अच्छे होटल में अपनी बुकिंग करवाई. मुझे नहीं पता कि ओला अपने ड्राइवर्स के रुकने का प्रबंध करवाता है या नहीं और मुझे पता चला कि ऐसा कोई इंतज़ाम नहीं होता. ड्राइवर अक्सर कार में ही सो जाते हैं. मुझे एहसास हुआ कि छह घंटे की लंबी ड्राइव के बाद अगर किसी को सबसे ज्यादा आराम की ज़रूरत है तो वो एलुमलई है. मैंने उसके लिए उसी होटल में एक दूसरा रूम बुक करवा दिया.

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कैब ड्राइवरों के साथ झगड़ा आम सी बात होती जा रही है


हम शाम को छह बजे पहुंचे , हमने जल्दी से मंदिर के दर्शन किए और जल्दी सोने चले गए. हमने बड़ी बड़ी बातें की कि हम सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाएंगे और हमने एलुमलई को भी यही बोला. लेकिन हम सोते ही रह गए. अगली सुबह मैं देखने गई कि क्या उसका रूम आरामदायक था, उसका पंखा काम कर रहा था क्या, क्या गरम पानी आ रहा था और फिर मैंने उसे अपने साथ नाश्ता करने के लिए भी बुलाया. उसने बहुत ही भावुक होकर बोला कि कई हफ्तों से वो ठीक से सो नहीं पाया क्योंकि उसे हर राइड पर जाना होता था. काफी वक्त बाद ये पहली अच्छी नींद उसे नसीब हुई है. उसकी आंखों में आंसू थे और मेरे तो और ज़्यादा.

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ज़िंदगी हम में से कईयों के लिए बहुत मुश्किल है. हमें एक मौका मिलता है कि हम लोगों के साथ प्यार और संवेदनशीलता के साथ बर्ताव करें. मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि ये अवसर मुझे मिला और होटल स्टाफ का भी जिन्होंने एलुमलई का ख़्याल वैसे ही रखा जैसे वो किसी भी दूसरे ग्राहक का रखते हैं. वो उनसे बिल्कुल भी अलग नहीं था.
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आरती ने जो किया वो करना आसान नहीं है. कभी हमारी संवेदना इजाज़त नहीं देती, कभी हमारी जेब नहीं देती और कभी सामने वाला व्यक्ति का रवैया ही गलत होता है. कैब ड्राइवर हो या घरेलू कर्मचारी उन्हें लेकर हमने जो विचारधाराएं बना रखी हैं, वो अक्सर इस कदर कठोर हो जाती हैं कि हम उनके साथ बेहद ही असंवेदन हो जाते हैं. वक्त से दो मिनट लेट होने पर चिल्लाना, ड्राइव को कैंसल कर देना, झल्लाकर गालियां देना, यह सब कुछ हम इतनी आसानी से कर देते हैं कि अक्सर यह ख़्याल तक दिमाग में नहीं आता कि यह व्यक्ति किस परिस्थिति से गुज़र रहा होगा. आरती जैसा काम करने के लिए किसी रॉकेट साइंस को समझने की ज़रूरत नहीं है, बस उस व्यक्ति की जगह खुद को रखकर देखने की ज़रूरत है.

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