#HumanStory: मर्द पहले फसाद किया करते, अब कहते हैं- चलो, तुम्हारा 'इनब्हाइट' आया है

पहली बार ड्रम पकड़ा तो लाज आ रही थी. 'टरेनर' ने सिखाना शुरू किया- एक- दो- तीन. हम लोग अकबक देख रहे थे. हम 16 जने थे. किसी को गिनती नहीं आती थी. फिर कहा गया- भात- दाल- रोटी. ये समझना आसान था. धीरे-धीरे हम समझने लगे लेकिन धुन पकड़ने में डेढ़ साल लगे.

News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 10:46 AM IST
#HumanStory: मर्द पहले फसाद किया करते, अब कहते हैं- चलो, तुम्हारा 'इनब्हाइट' आया है
बिहार की पंचम देवी महादलित महिलाओं के रॉक बैंड नारी गुंजन का हिस्सा हैं
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Updated: August 2, 2019, 10:46 AM IST
पंचम देवी महादलित औरतों के रॉक बैंड नारी गुंजन में ड्रमर हैं. वे कहती हैं- शुरू में सब ठट्ठा करते. मर्द टंटा लगाते. घर से बाहर निकलने पर फसाद करते. अब यही लोग कहते हैं- भीतर का काम छोड़ो, तैयार हो जाओ. तुम्हारा 'इनब्हाइट' आया है.

बिहार के दानापुर में एक खोया हुआ मोहल्ला- ढीबरा. यहां की संकरी-सांवली गलियों में वैसे तो खामोशी रहती है लेकिन हर हफ्ते के आखिर में धूम मच जाती है. वजह- एक छत पर जमा 10 औरतों का झुंड.

हंसते-खिलखिलाते चेहरों वाली ये औरतें ठेठ गिरस्थन हैं. देसी साड़ियों में लिपटी, सिर पर चौड़ी पाड़ करके सिंदूर भरे हुए. कटे-घिसे हाथ अपना इतिहास खुद बता रहे हैं. यही हाथ एकाएक हरकत में आ जाते हैं. गले में बड़े-छोटे ड्रम लटके हैं. हरेक के हाथ में कोई न कोई इंस्ट्रुमेंट हैं. दसों बड़ी शिद्दत से एक धुन छेड़ते हैं और उसपर ताल देते हैं. ये उन औरतों का रॉक बैंड है जो पहले घर से बाहर निकलते हुए हिचका करती थीं.

शुरुआती दिनों के बारे में बताते हुए पंचम की आवाज खनक रही है

2012 की बात है. जब ड्रम गले में टांगा तो बहुत घबरा रहे थे. ट्रेनर बोलते- एक- दो- तीन. हम हक्का-बक्का देखे जा रहे थे. इसी एक- दो- तीन पर हमें ड्रम पर ताल देनी थी. हमने कहा- हमको तो गिनती नहीं आती, कुछ ऐसा कहें जो हमारी समझ में आए. वो थोड़ी देर सोचते रहे, फिर कहा- भात- दाल- रोटी. हम लोग समझ गए और ड्रम पर डंडा मारने लगे थे.

पंचम देवी महादलित औरतों के रॉक बैंड नारी गुंजन में ड्रमर हैं (प्रतीकात्मक फोटो)


रोज घंटा- दो घंटा 'पिरेकटिस' के लिए पक्का हो गया लेकिन रोज कोई न कोई फसाद होता.
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हम जैसे ही बाहर जाने के लिए निकलते, मर्द रोक लेते. मेरा मर्द टोकता- ये क्या टुनटुना बजा रहे हो? ये सब औरतों का काम नहीं. घर बैठो. बच्चा संभालो. हमारी ठन जाती. बाहर निकलो तो पास-पड़ोस नीची निगाहों से देखता.

उस वक्त हम रहते भी तो कैसे थे! पंचम याद करती हैं. एक साड़ी लगातार पहनी हुई. बाल बने हैं या बिखरे हैं, इसकी परवाह नहीं. बन-ठनकर कभी बाहर नहीं निकले थे, लोग तो वैसे ही देखेंगे न. अब जब से अपना बैंड बनाया है, हम रोज बाल कोरते हैं. अच्छी साड़ी पहनते हैं. थोड़ा-बहुत बनाव-सिंगार भी कर लेते हैं.

अब लोग भी हमको सीरियसली लेने लगे हैं. जब भी कोई प्रोग्राम होता है, कार बुक करते हैं. दरवाजे पर बड़ी सी चमचमाती गाड़ी लगती है. हमारा इंतजार करती है.

पहले घर से निकलना हो तो 10 रोज पहले बताते थे. बार-बार याद दिलाना होता था ताकि ऐन समय पर मना न हो जाए. अब देश के सारे बड़े-बड़े शहरों से बुलावा आता है. दिल्ली, बंबई, केरल- सब देख लिया. हवाई जहाज में भी बैठे. कैसा है पहली फ्लाइट की याद! पंचम खिलखिलाती हुई कहती हैं- बहुत मजा आया. बैठे तो थोड़ी धुकधुकी हुई. जहाज उड़ा तो भगवान का नाम ले रहे थे. पेट में दर्द भी हुआ लेकिन जैसे ही जहाज ऊपर उठा, सब भूल गई.

रॉक बैंड में 10 महिलाएं हैं जो देश के तमाम बड़े शहरों में परफॉम कर चुकी हैं


सोचे नहीं थे कि कभी गांव से बाहर जाएंगे, अब हवाई जहाज में भी जाते हैं. जहाज में दुनिया के लोग बैठते हैं, लेकिन कोई भेदभाव नहीं. गांव जैसे हाल नहीं कि लोग दूर हटने को कहें. लौटते हैं तो घर-पड़ोस जमा हो जाता है.

शुरू में छतवा पर बैठकर सीखते थे. ड्रम बजाते तो डंडा आड़ा-तिरछा होता. नीचे गांववालों का हुजूम हंसता. लाज लगती थी. जैसे ही लाज छूटी, काम अपने-आप आ गया.

अब भी इनब्हाइट आए, चाहे न आए, हम हर हफ्ते प्रैक्टिस करते हैं. 10 औरतों हैं. किसी के घर जमा होती हैं और छत पर बैठकर ही बजाती हैं. नीचे अब भी हुजूम रहता है लेकिन मजाक उड़ानेवालों का नहीं, हैरानी से देखने वालों का.

'बड़का मोबाइल पर खोलके देखिए न, आपको हम दिखेंगे'. पंचम बात करते हुए इसरार करती हैं.

पहले छुटपुट जरूरतों के लिए मर्द से मांगना होता था. अब अपना सामान खुद खरीदते हैं. बच्चों को भी अच्छे से पढ़ा रहे हैं. त्यौहार आए तो मन नहीं मारते. उसी दुकान में घुसते हैं, जहां अपनी पसंद के कपड़े मिलें. वही पति, जो शुरू में टोक लगाता था, अब खुद कहता है- काम-धाम छोड़ो, तैयार हो जाओ.

ये उन औरतों का रॉक बैंड है जो पहले घर से बाहर निकलते हुए हिचका करतीं


16 औरतों ने ड्रम सीखना शुरू किया. टोक-ताने-ठट्ठों के बीच एक-एक करके कई औरतें पीछे हटीं. अब 10 बाकी हैं. सब एक ही गांव से हैं. पहले मिलतीं तो घर-गिरस्थी के टंटे रोतीं.

अब किस प्रोग्राम में कहां जाना है- ये बात होती है. शादी-ब्याह- सरकारी कार्यक्रम सबमें खूब बुलावा आता है. लोग फोन करते हैं तो पूछते हैं- आप लोग फलां दिन खाली हैं क्या? बताते हुए पंचम की आवाज खिलखिला रही है. एडवांस बुकिंग होती है. हम पूरी तैयारी के साथ जाते हैं और जब स्टेज पर हमारा बैंड शुरू होता है तो लोग आ-आकर फोटो खिंचवाते हैं.

30 साल के आसपास होंगे. जन्मदिन नहीं पता. शादी कब हुई, नहीं याद. ऐसा लगता है जनमते ही शादी हो गई. जनमते ही गिरस्ती में जुट गए.

सोचा नहीं था कि कभी हवाई जहाज में बैठेंगे. जिन शहरों के नाम हमारे बच्चे किताबों में पढ़ते हैं, वहां जाएंगे और 'परफारम' करेंगे. पहले बगल में खड़े हो जाओ तो लोग मुंह बनाते थे. अब रॉक स्टार कहते हैं. फोटो खिंचवाते हैं.

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First published: August 2, 2019, 10:46 AM IST
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