'डांस का शौक था, अब झीने कपड़े पहन दूसरों की शादी में नाचती हूं'

ये दास्तां है 40 बरस की रेखा रानी की. हालातों ने उन्हें शादियों में ठुमके लगाने को मजबूर कर दिया. रेखा उन सैकड़ों औरतों का चेहरा हैं जो बिहार, उत्तरप्रदेश में लौंडिया डांस करती हैं.

Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 11:02 AM IST
Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 11:02 AM IST
गांव में एक रुआबदार घर की शादी में रेखा आई हुई हैं. एक तंग, बंद खिड़की वाले कमरे में वे साथियों के साथ तैयार हो रही हैं. साथ में कई बैग रखे हुए हैं. इनमें चमकीली-भड़कीली मेकअप किट और झीने-चमकीले कपड़े रखे हैं. लड़कियां साथ में तैयार होते हुए अपने घरों की बात करती हैं. अपने दुख-दर्द बांटती हैं. पिछली शादी का अनुभव दोहराती हैं. कैसे शराब के नशे में धुत्त मर्द स्टेज पर चढ़ आए. कैसे किसी ने किस लड़की की कमर में हाथ डाल लिया!

जिस कमरे में लड़कियां तैयार हो रही होती हैं, उसकी एक झलक से भी डांस का मिजाज पता चल सकता है. सीलनभरे कमरे में पंखा पूरी रफ्तार से घूमता होता है ताकि परफॉर्मर्स का मेकअप न उतरे. नकली पलकें, स्मोकी आइज़, बालों के छल्ले यहां-वहां झूलते हुए और उसपर गहरी लाल या कत्थई लिपस्टिक.

रेखा बताती हैं, लोगों को इसी तरह का मेकअप देखना अच्छा लगता है. और मेल खाते कपड़े! ट्रांसपरेंट गाउन होता है ताकि पेट, पीठ और जितना जो हो सके, दिखे. पतली पट्टी वाली चोली के साथ हॉट पेंट पहन लेते हैं. ट्रांसपरेंट ही कपड़े पहनने होते हैं. अमूमन भोजपुरी गानों पर नाचते हैं. मांग हो तो बॉलीवुड के तड़काऊ-भड़काऊ गानों पर भी नाचना होता है.



देश के पूर्वी हिस्से में शादियों में नाच-गाने की परंपरा पुरानी है. पहले लड़की वाले जनवासे यानी बारातियों के ठहरने की जगह में नाचने वालों को बुलाया करते. लड़के वाले भी शादी के बाद लौंडिया नाच की 'व्यवस्था' रखते. रेखा मजबूरी के तहत इस व्यवस्था का हिस्सा बन गईं. वे याद करती हैं, मुझे डांस का शौक था. ठीक वैसा ही जैसा किसी भी खुशदिल लड़की को हो सकता है. शौक को पेशा बनाने का सोचा नहीं था, मजबूरी में ऐसा करना पड़ा.

वहां सब गंदी नजरों से देखते हैं

मजबूरी में रेखा लौंडिया डांस का हिस्सा तो बन गईं लेकिन वहां का माहौल उन्हें काम का हिस्सा बनने नहीं दे रहा. धीमी आवाज में कहती हैं, वहां पे लोग गाली से भी ज्यादा गंदा बोलते हैं. क्या बताऊं! मर्द ही ज्यादा होते हैं. अश्लील गाने बजते हैं, उसपर सीटियां और भद्दी कमेंट्स. स्टेज पर पैसे फेंकते हैं. रात बिताने का ऑफर देते हैं. एक रात के इतने मिलेंगे, दो रातों के उतने, चिल्ला-चिल्लाकर बोलते हैं. कपड़ों पर टीका-टिप्पणी करते हैं. शादी में जिसकी मार्फत बुलाए जाते हैं, उनकी शर्त होती है कि हम छोटे कपड़े पहनें. जितना हो सके, शरीर दिखना चाहिए.
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गुस्सा तो बहुत आता है लेकिन मुंह लगेंगे तो पार नहीं पाएंगे न! यही हमारी रोजी-रोटी है. कल को कोई मार देगा तो बच्चे अनाथ हो जाएंगे, ये डर मुंह सिले रखता है.



 

झीने कपड़े पहन मर्दों के सामने 'नाचने वालियों' की क्या सुरक्षा

'हिफाजत के बंदोबस्त' पर रेखा लंबी चुप के बाद बताती हैं, थोड़े दिनों पहले छत्तीसगढ़ से आई एक लड़की को स्टेज पर ही गोली मार दी गई. वो नाच रही थी. नशे में धुत्त लोगों को कोई बात नागवार गुजरी और गोली चल गई. ऐसा हमारे साथ होता ही रहता है. छेड़छाड़ और अश्लील भाषा तो जैसे हमारा नाम पुकारा जाने की तरह है. नीचे बैठे मर्द चिल्लाते हैं- हमारी तरफ देखो, इस तरफ आकर नाचो. उनके हुक्म की नाफर्मानी हुई और धड़ से गोली चलती है. कई बार गाड़ी लेकर रातोंरात भागना होता है. कई बार इंतजार करते हैं कि जैसे-तैसे नाच खत्म हो और रात बीते.

कभी कुछ बहुत ही गड़बड़ हो जाए तो हमें स्टेज से हटा दिया जाता है लेकिन 'वेडिंग ऑर्गेनाइजर' ऐसा कम ही करते हैं. ऐसा करने से उनका नाम खराब होता है. अगली शादी में बुलौआ नहीं आता.

लगभग दो घंटे का शो होता है, जिसके लिए पूरे ग्रुप को 20 से 25 हजार मिलते हैं. दूर-दराज जाने, अनजान शादी में अनजान चेहरों के सामने नाचने और जान की कीमत पर स्टेज पर बने रहने पर हरेक के हिस्से दो से तीन हजार आते हैं. रेखा को हालांकि इसका मलाल नहीं. वे सूनी आवाज में कहती हैं, लोग कला नहीं, शरीर देखने आते हैं. हमें ठुमके लगाने होते हैं, आंखों से इशारे करने होते हैं- उनके लिए यही डांस है.

बचपन में शौक से नाचती लेकिन अब इतना थक चुकी हूं कि अपने घर की शादी में भी पैर नहीं थिरकते.

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