#HumanStory: 'बुलेट पर जा रहे थे कि तभी शेर ने लंबी छलांग लगाई और...'

बीमार तेंदुआ कुछ ऐसी मासूमियत से देख रहा था, मानो तेंदुआ न हो, खरगोश हो. मैं यकीन करके पास पहुंच गया. देखने लगा कि उसे हुआ क्या है. बस, तभी भोली आंखों वाले तेंदुए ने मुझपर छलांग लगा दी...

Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: June 7, 2019, 7:15 PM IST
Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: June 7, 2019, 7:15 PM IST
पेड़ आपस में ऐसे गुंथे हुए कि दिन में भी गहरा अंधेरा रहे. हर तरफ से आती अजीबोगरीब आवाजें. आप सांस रोककर कदम रख रहे हों कि तभी पता चले, पेड़ों की एक पांत छोड़ शेर भी साथ चल रहा है. जंगल की जिंदगी में हर पल खतरे हैं. इन्हीं खतरों को जिंदगी के तकरीबन 40 बरस देने वाले अखिलेश कुमार खरे (डिप्टी कंसर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट) अपनी कहानी सुनाते हैं. 

नौकरी के शुरुआती दिन थे. मुझे शेर की हलचल ट्रैक करनी थी. जंगल इतना घना कि भीतर अपनी ही आवाज गुम हो जाए. हमारे पास चलने को एक बुलेट थी जो कभी चलती- कभी रुक जाती. तब हमने एक तरीका निकाला. हमारे साथ राजा के वक्त का एक महावत था- चांद खां. मैंने उसे जंगल में झरने के सबसे ऊपर बैठने को कह दिया. वहां से पूरा जंगल दिखता था.



थोड़ी-थोड़ी देर में चांद खां हांक लगाता. एकाएक उसने इशारा किया कि आसपास शेर है. मैं और मेरा साथी 'अलर्ट' हो गए. 

ट्रेनिंग के दौरान शेर से सामना होने के किस्से सुने थे लेकिन खुद कभी वास्ता नहीं पड़ा था. हम आगे बढ़ने लगे. आहट पाकर शेर छिप गया. चांद खां ऊपर बैठा सब देख रहा था. उसने हमें जाने का इशारा कर दिया. जाने के लिए जैसे ही मैंने बुलेट स्टार्ट की. जोर की आवाज से चिंहुककर शेर बाहर निकल आया. कुछ पल हमें देखता रहा, फिर एक लंबी छलांग लगाकर जंगल में गायब हो गया.



शेर से वो पहली मुलाकात... उसकी वो रुआबदार चाल देखकर 'फ्रीज' हो गए. उसके जाने के थोड़ी देर बाद होशोहवास लौटे. आज भी वो पल जिंदा है.

शेर को जंगल का राजा ऐसे ही नहीं कहते. जब वो मांद से निकलता है तो पूरे जंगल के जानवर अपने आसपास को चेताने लगते हैं. बंदर जोर-जोर से आवाज निकालते हैं ताकि सब संभल जाएं. पक्षी तेज आवाज में चहचहाते हैं. चीतल और दूसरे छोटे जानवर चीखकर छिप जाते हैं. ये सिग्नल है- आप भी संभल जाएं. शेर आसपास है.
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जंगल में रहना दूसरे पेशों से एकदम अलग है. यहां कदम-कदम पर कोई न कोई खतरा आपका इंतजार कर रहा होता है.

इंटरनेशनल रेंजर फेडरेशन की रिपोर्ट बताती है कि हमारा देश जंगल की नौकरी करने वालों के लिए सबसे खतरनाक देश है. यहां जंगली जानवरों के अलावा कई दूसरे खतरे भी होते हैं जैसे जंगल की आग या तस्करों का खतरा. वहीं पूरी जिंदगी जंगलों को देने वाले अखिलेश का नजरिया थोड़ा अलग है.

जब काम शुरू किया था तब सर्विस कंडीशन बहुत खराब थी. बुलेट पर दिन-रात की ड्यूटी होती. साथ में एक स्टाफ रहता. कई बार जान जाते-जाते बची. इसलिए नहीं कि जानवरों ने हमला कर दिया था, बल्कि इसलिए कि वो मोटरसाइकिल की आवाज से डरकर दौड़ने लगते थे और उन्हें देखकर हमारा बैलेंस बिगड़ जाता.



जानवरों के बीच रहना है तो आंखें खुली और दिमाग ठंडा रखना होता है. वरना जान जाते वक्त नहीं लगता. 

जानवरों के बारे में अखिलेश इस मुलायमियत और लगाव से याद करते हैं मानो वे उनके साथी हों.
जंगल से जब उन्हें चिड़ियाघर लाया जाता है तो वे काफी दिनों तक नाराज रहते हैं. खाना छोड़ देते हैं. मनुहार करनी होती है. खाएं, चाहे न खाएं लेकिन रोज शानदार खाना परोसना होता है. थककर एक दिन वो खुद खा लेते हैं. मांसाहारी और शाकाहारी जानवर दोनों इस मामले में एक से होते हैं.

शेर को ज्यादा दिक्कत होती है क्योंकि वो दूसरों का मारा शिकार नहीं खाते. लेकिन 'जू' आकर उन्हें भी आदत बदलनी पड़ती हैं.

इंसानों की ही तरह जानवरों की आदतें भी अजीबोगरीब हो सकती हैं. अखिलेश हंसते हुए याद करते हैं- एक बार मैं एक बीमार तेंदुए को 'एग्जामिन' कर रहा था. शक्ल से ही एकदम बेचारा और चलने-फिरने से लाचार दिख रहा था. हमें लगा कि वो अटैक नहीं करेगा. मैं उसके पास पहुंचा और उसकी आंखें-नाक चेक करने लगा. तभी बिजली की तेजी से उसने मेरे दाएं पैर पर हमला कर दिया. खून तेजी से बहने लगा.



तेंदुआ ऐसा ही है. अनप्रेडिक्टेबल. जंगल का सबसे बदमाश जानवर. तेंदुए की बाड़ में गैप बहुत कम रखते हैं क्योंकि वो कुछ भी कर सकता है.

जंगल के हर जानवर और हर पेड़-बूटे के बारे में अखिलेश के पास एक किस्सा है. भालू आए-दिन इंसानों पर हमला क्यों करता है, इसकी वजह उनके पास है. भालू इंसानों को अपना प्रतियोगी मानता है. जैसे हम भी महुआ और शहद खाते हैं, भालू को भी ये पसंद हैं.

खूब शौक से शहद पीने वाला ये जानवर जब देखता है कि इंसान उसका पसंदीदा खाना ले रहे हैं तो वो भड़क जाता है और हमला कर देता है.

दिन के 16 से 18 घंटे जंगलों की खाक छानते अखिलेश को परिवार का गुस्सा भी झेलना पड़ा. तब मेरी नई-नई शादी हुई थी. पन्ना में पहली पोस्टिंग मिली. दिनभर जंगलों में खूंखार जानवरों के बीच रहता. पत्नी परेशान रहती. घरवाले नाराज होते. शुरुआती साल काफी तनाव में बीते लेकिन तब भी नौकरी बदलने का ख्याल नहीं आया. वक्त के साथ घरवालों ने मेरी पसंद से प्यार करना सीख लिया.

लोग शेरों के बारे में कहानियों में पढ़ते हैं. जंगल में एक रात बिताने के लिए सालों इंतजार करते हैं. मेरा हर दिन जंगल और शेरों के बीच बीता है. अब जंगल की यादें ही मेरी पूंजी हैं.

 

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