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#HumanStory: वो डॉक्टर जो मरीजों को पिछले जन्म में ले जाता है

News18Hindi
Updated: October 30, 2019, 10:07 AM IST
#HumanStory: वो डॉक्टर जो मरीजों को पिछले जन्म में ले जाता है
हिप्नोथेरेपिस्ट डॉ खेतावत हजारों मरीजों को उनके पिछले जन्म में ले जा चुके हैं

आंखों के आगे डोलता चमकीला पत्थर. पत्थर के पार एक जोड़ा आंखें आपकी आंखों पर थिर हैं. दूर कहीं से एक गहरी आवाज आती है- 'तुम्हें नींद आ रही है.' इसके साथ ही आपकी आंखें भारी होने लगती हैं. आप सोए हुए हैं और वही कर रहे हैं जो वो आवाज आपसे कहे.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 10:07 AM IST
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'सम्मोहन लफ्ज सुनते ही जेहन में एक भारी आवाज गूंज जाती है. ये आवाज किसी को भी वश में करके उससे मनचाहा काम करवाती है. सम्मोहन इससे बढ़कर है. मैं मरीज को वहां ले जाता हूं, जहां बीमारी की असल वजह है. अक्सर हम साथ-साथ उसके पिछले जन्म की सैर कर आते हैं.' ये कहना है डॉ सुधीर खेतावत का. पढ़ें, हिप्नोथेरेपिस्ट डॉ खेतावत को, जो अपने हुनर से हजारों मरीजों को उनके पिछले जन्म में ले जा चुके हैं.

बात दसेक बरस पुरानी है. मैं रोज की तरह क्लिनिक में था, तभी धड़धड़ाती हुई एक एंबुलेंस आकर रुकी. इससे पहले ही माजरा समझूं, स्ट्रेचर पर एक लाश सामने रखी थी. साथ में हाथ जोड़े उसके मां-बाप.

वे चाहते थे कि मैं क्लिनिकली डेड बताई जा चुकी उनकी बिटिया को जिंदा कर दूं. फोन पर बोलते हुए डॉ खेतावत की आवाज में सिहरन थी.

वे आगे कहते हैं- मैंने कागज देखे. शहर के सबसे नामी अस्पताल ने उसे डेड घोषित कर दिया था. युवती की पल्स या हार्ट बीट नहीं थी. मैंने बेचारगी से मां-बाप को देखा. उनकी आंखों में यकीन था. मां ने कहा- इसका दिमाग अब भी काम कर रहा है. ये आपको सुन तो सकती है. मैं जिंदगी में पहली बार किसी मृत घोषित किए हुए शख्स का इलाज कर रहा था. मैं रोजाना उसके कानों के पास मुंह लेकर दोहराता- तुम्हें आंखें खोलनी हैं. इस बीच डॉक्टर मित्रों के फोन आते. वे लगातार कहते कि एक लगभग मर चुकी मरीज को अपने क्लिनिक में लेकर मैंने अपनी हिस्ट्री बिगाड़ ली है. एक ने कहा- वो किसी भी मिनट चली जाएगी. उसे रफा-दफा करो.

शहर के सबसे नामी अस्पताल ने उसे डेड घोषित कर दिया था (प्रतीकात्मक फोटो)


दस दिनों बाद आखिर उसने आंखें खोल दीं. लाइफ-सपोर्ट हटा लिया गया. अगले दिन वो युवती देश के तमाम अखबारों की सुर्खियां थीं.

40 सालों से भी ज्यादा वक्त हुआ यही काम करते. एक से बढ़कर एक अजीबोगरीब मामले आए. एक बार एक लड़की लाई गई. दो साल पहले अचानक उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी. डॉक्टरों ने उसे रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बताया. और ये भी कि उसकी बीमारी लाइलाज है. सम्मोहन के सेशन के दौरान वो फफककर रो पड़ी. नींद में ही रोते हुए उसने बताया कि उसके भाई की रोड एक्सिडेंट में मौत हो गई थी. उसके बाद से वो गहरे अवसाद में रही. और धीरे-धीरे उसके दिल में ये बात बैठ गई कि भाई नहीं है तो मुझे कुछ भी नहीं देखना. मैंने उसे खूब समझाया. कई सेशन चले. अब वो मरीज एकदम ठीक है.
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सम्मोहन कोई जादू नहीं. इसमें चेतन मन को सुलाकर अवचेतन मन को जगाया जाता है. यही मन खुद को पिछले हादसों तक ले जाता है, जहां किसी दर्द या बीमारी की जड़ होती है.

कई बार मरीज पीछे लौटते-लौटते पिछले जन्म में चला जाता है. आर्मी से रिटायर्ड एक मरीज को अस्थमा हो गया. अटैक इतना गहरा और इतना लगातार होता कि वो ऑक्सीजन पर ही रहने लगा. मेरे साथ सेशन शुरू हुआ तो पहले तो उसे सम्मोहित करने में ही दिक्कत हुई. आर्मी से था. दिल और दिमाग दोनों से ही तगड़ा और क्रिटिकल. उसका लॉजिकल माइंड काफी तेज था. लंबी काउंसलिंग के बाद वो सम्मोहन को विज्ञान समझ सका. इसके बाद काम आसान हो गया. सेशन के दौरान ही पता चला कि किसी एक जन्म में वो रेगिस्तान का बाशिंदा था. एक रोज रेतीले तूफान में घिरकर उसकी जान चली गई.

आंखों में आंखें डाल लेने से कोई वश में नहीं होता (प्रतीकात्मक फोटो)


हमने इलाज के दौरान उसे यकीन दिला दिया कि पूरी रेत सक्शन पंप से बाहर निकल रही है. वो ठीक हो रहा है. और वो सचमुच ठीक हो गया. 

फिल्मों में जैसा सम्मोहन दिखाया गया है, असल में वैसा है नहीं. आंखों में आंखें डाल लेने से कोई वश में नहीं होता. डॉ खेतावत कहते हैं- मैंने जन्म से नेत्रहीन मरीजों का भी इलाज किया है. आंखों से इलाज नहीं होता. सम्मोहन में सारा खेल दिमाग का है. सामने वाला आपकी बात को कितने भरोसे से सुन रहा है ये मायने रखता है. कई लोग सम्मोहन को जादू-टोना समझते हैं. ऐसे मरीज सम्मोहित होने में काफी वक्त लेते हैं.

सम्मोहन सिर्फ मंदबुद्धि लोगों पर काम नहीं करता क्योंकि वे आपके कहे को समझ ही नहीं पाते हैं.

क्या सम्मोहन के कुछ खतरे भी हैं? तमाम जिंदगी सिर्फ और सिर्फ हिप्नोथेरेपी करते रहे डॉ खेतावत इससे इन्कार करते हैं. वे बताते हैं- ये साइंस पर काम करता है. मैं और मेरे दोनों थेरेपिस्ट मरीज के साथ एक शांत कमरे में बैठते हैं. मरीज चाहे तो बिस्तर या सोफे पर भी रह सकता है. कई लोग खड़े हुए भी सेशन लेना पसंद करते हैं. तब हमारी एक थेरेपिस्ट उन्हें सहारा देती है ताकि सम्मोहन में जाकर वे गिर न जाएं. सेशन के दौरान मरीज योगनिद्रा में पहुंच जाता है. अब वो सोया हुआ है. इसे टेस्ट करने का भी एक तरीका है. मैं मरीज से कहता हूं- मेरे 3 गिनते ही तुम्हारे सिर में तेज दर्द होगा. मैं गिनता हूं और मरीज सोए हुए ही सिर पकड़कर कराहने लगता है. मैं फिर कहता हूं- अब 2 गिनते ही दर्द एकदम चला जाएगा और हम बातें करेंगे. इसके बाद शुरू होता है असल इलाज.

5 हजार से भी ज्यादा लोग पास्ट लाइफ (पूर्वजन्म) में जा चुके हैं (प्रतीकात्मक फोटो)


सारी बातचीत को केस हिस्ट्री के लिए रिकॉर्ड किया जाता है. बात खत्म होते ही सन्नाटा हो जाता है और लगभग 5 मिनट बाद मरीज की नींद खुल जाती है. कई मरीज डरे हुए आते हैं कि सम्मोहन के बाद वे वापस होश में नहीं आ सकेंगे. तब हम काउंसलिंग से उन्हें राजी करते हैं.

इतने सालों के पेशे के दौरान कई किस्म के लोग आए. बहुतों को हिप्नोथेरेपी पर यकीन नहीं था. तब साइंस के तरीके से ही उन्हें समझाया गया. सम्मोहन में जाते ही मरीज से सिर से जुड़े इलेक्ट्रोड के चलते ईईजी मशीन (electroencephalogram EEG) पर डेल्टा वेव्स आने लगती हैं. सम्मोहन टूटते ही ये वेव्स तुरंत गायब हो जाती हैं. इस तरीके से अबतक हजारों मरीजों का इलाज हो चुका है. और 5 हजार से भी ज्यादा लोग पास्ट लाइफ (पूर्वजन्म) में जा चुके हैं. बीमारी की वजह जानते ही हम मरीज के दिमाग से उस वजह का असर मिटा देते हैं. ये सबकुछ बातचीत से होता है. सोए हुए मरीज के अवचेतन को हम राजी कर लेते हैं कि तुम्हारी बीमारी ठीक हो चुकी है.

कितने ही लोग, कितने ही ऐसे केस आए, जिनके कारण मैं रातें जागा. एक मरीज जो कभी शहर से बाहर भी नहीं गया था, धड़ाधड़ रशियन बोलने लगा. हमें कई सेशन ये समझने में लगे कि ये भाषा क्या है. फिर हमने रशियन के प्रोफेसर को बुलाया और उसकी मदद से इलाज किया.

बहुतेरे लोग आए जो इस जिंदगी के साथ-साथ पास्ट लाइफ की तकलीफ भी झेल रहे थे. उनका इलाज बहुत प्यार, बहुत तसल्ली मांगता है.

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First published: October 30, 2019, 10:07 AM IST
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