#HumanStory: 'बच्चों की आत्माएं उनकी ही तरह जिद्दी होती हैं, जल्दी मानती नहीं'

Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 12:13 PM IST
#HumanStory: 'बच्चों की आत्माएं उनकी ही तरह जिद्दी होती हैं, जल्दी मानती नहीं'
7 सालों से आत्माओं पर 'तहकीकात' कर रहे हैं वकार

दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) की उस पार्किंग (parking) में एक के बाद एक कई सुसाइड (suicide) हुए. प्रॉपर्टी मालिक ने हमें बुला भेजा. वहां अक्सर एक नन्ही-सी छाया घूमती दिखती. इंफ्रारेड कैमरे (infrared camera) में भी वो आई. पता चला वहां एक बच्चे की मौत (death) हुई थी. वो खेलना चाहता था, लोग डर जाते थे. बच्चों की आत्माएं (spirit) अक्सर जिद्दी होती हैं. आसानी से नहीं जातीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2019, 12:13 PM IST
  • Share this:
वकार राज का पेशा है आत्माओं की खोज (ghost hunting). पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर (paranormal activity investigator) का काम कर रहे वकार कहते हैं- आत्माएं अपने होने का कोई न कोई संकेत देती हैं. जैसे फुल बैटरी दिखाता मोबाइल एकदम से लो हो जाए, कैमरा खराब हो जाए, लाइट बंद हो जाए या खटखटाने या दूसरी तरह की आवाजें होने लगें.

पढ़ें, सात साल से आत्माओं पर 'तहकीकात' कर रहे वकार को.

साल 2014 की बात है. तब तक 25 से ज्यादा मामलों पर काम कर चुका था. कहीं कुछ नहीं मिला. यकीन था कि भूत-प्रेत बेकार की बात है. तभी कुलधरा जाने का मौका मिला. जैसलमेर के पास एक जगह. रेत के समंदर में 3 किलोमीटर के दायरे में फैले इस गांव को हॉन्टेड गांव (haunted village) कहते हैं. कहते हैं करीब 200 साल पहले कुलधरा और इसके आसपास के 84 गांववाले रातोंरात गायब हो गए. तब से ये गांव कभी बसा नहीं. कभी किसी ने कोशिश की तो उसे तुरंत भागना पड़ा. हमारी टीम साजो-सामान के साथ वहां पहुंची. हम एक TV शो का हिस्सा थे. मेरी टीम सेटअप करके शूट में लगी थी. मैंने तकनीकी चीजें चेक कीं और अकेला घूमने लगा.

सुनसान गलियां. खंडहर हो चुकी ढाणियां. मेरे पास एक कैमरा, एक टॉर्च और वॉकीटॉकी था. घूमते हुए एक छोटे से घर में जा घुसा. मिट्टी का वो घर अंधेरे का हिस्सा हो चुका था.


शायद वहां लंबे वक्त से कोई घुसा नहीं था. मकड़ी के जाले और चमगादड़ यहां-वहां दिख रहे थे. मैं मौज में था. यकीन था कि कुछ नहीं मिलेगा. चिल्लाकर हवा से बातें करने लगा- अगर कोई है तो अपने-आप को दिखाओ वरना मैं जा रहा हूं. मेरा ये कहना था कि K2 मीटर एकदम से हवा में उठ गया. मैं कुछ समझ पाता, उससे पहले जोरों की आवाज हुई और लकड़ी का दरवाजा बंद हो गया.

वो आत्माओं का मुझे पहला इशारा था. उसके बाद से अब तक 15 सौ से ज्यादा जगहों पर पैरानॉर्मल चीजों की खोज में जा चुका हूं. कहीं थे, कहीं हौआ बनाया गया.



कुलधरा और इसके आसपास के 84 गांववाले रातोंरात गायब हो गए

Loading...

अक्सर घरों के मालिक हमें 'भूत भगाने' के लिए बुलाते हैं.

कई बार स्कूलों, पार्क, सड़क के किसी खास हिस्से, गोदाम में भी पैरानॉर्मल चीजें दिखती हैं और हमें बुलाया जाता है. ऐसे ही एक बार एक पार्किंग में घोस्ट हटाने के लिए पहुंचे. वहां कई नाइट गार्ड्स ने खुदकुशी की थी. हिस्ट्री चेक की तो पता चला कि वहां एक बच्चे की बड़ी तकलीफ में मौत हुई थी. वो गार्ड्स के साथ खेलना चाहता था और डरे हुए गार्ड्स अपने ही डर के कारण मर रहे थे.

अगले रोज हम फिर वहां पहुंचे. इस बार बॉल और खिलौने लेकर गए थे. बॉल खेली जाने लगी. खिलौने मूव करने लगे.


मैंने बच्चे की आत्मा से बात करने की कोशिश की. उसे वहां से जाने के लिए मनाने की कोशिश. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पूजा-पाठ भी हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद फिर एक्टिविटीज शुरू हो गईं. बच्चों की आत्मा अमूमन बड़ी जिद्दी होती हैं. और उतनी ही नासमझ भी. आप जो भी कहें, वो समझ ही नहीं पाती हैं.

पूरी उम्र में मौत हो तो आत्मा शांत रहती है. उसे कोई लालच नहीं होता और वो अपनी दुनिया में लौट जाती है. किसी ट्रॉमा में मौत हो तो अक्सर वहां पैरानॉर्मल हरकतें देखी जा सकती हैं.

लोग हमपर अक्सर सवाल उठाते हैं. कहा जाता है कि हम अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं. हकीकत इससे उलट है. हम विज्ञान और खासकर फिजिक्स के नियमों पर काम करते हैं.


कई उपकरण हैं जो घोस्ट डिटेक्टर का काम करते हैं. मिसाल के तौर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर. इससे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी चेक करते हैं. ये फ्रीक्वेंसी उन तमाम जगहों पर होती है, जहां भी मोबाइल टावर या स्ट्रॉग वाईफाई राउटर या सड़क के नीचे तार जा रहे हों. बस फर्क ये है कि उन जगहों पर फ्रीक्वेंसी स्थिर होती है, जबकि जहां आत्माएं हों, वहां ये बदलती रहती है. बार-बार ब्लिंक करती है.

अब तक 15 सौ से ज्यादा जगहों पर पैरानॉर्मल चीजों की खोज में जा चुका हूं (प्रतीकात्मक फोटो)


हम हवा में सवाल करते हैं लेकिन डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर में जवाब कैद हो जाता है. अक्सर ये फुसफुसाहट होती है. कई बार गालियां, चीखें और रोने की आवाज भी आती है. नाइट विजन फुल स्पेक्ट्रम कैमरा, कंपास और वॉकीटॉकी होना जरूरी है. हर चीज फुली चार्ज्ड होनी चाहिए क्योंकि उस जगह अगर हकीकत में पैरानॉर्मल चीजें हैं तो वो सबसे पहले बैटरी खाएंगी.

जैसे हम खाना खाते हैं, आत्माओं को भी खुराक चाहिए होती है. ये मिलती है मोबाइल से, एसी से, किसी भी तरह के इलेक्ट्रानिक और इलेक्ट्रिकल सामान से और यहां तक इंसानों से भी. एकाएक सिर भारी हो जाए, सांस फूली लगे, पसीना-पसीना हो जाएं तो समझें कि वहां मौजूद आत्मा आपकी ताकत भी सोख रही है.


कुलधारा में ऐसे खूब वाकये घटे हैं. वहां कैमरे में शैडो भी पकड़ाए, आवाजें, रोना, नाम भी सुने. वहां कैमरे समेत हमारे बहुत सारे उपकरण टूटे हैं. कैमरा अचानक आगे बढ़ता है, ऊपर उठता है और गिर जाता है. धड़ाम. मोबाइल की बैटरी चली जाती है. टॉर्च बंद हो जाती है.

आत्माओं की टेंडेंसी होती है एनर्जी खाना. जहां से भी आसानी से मिले.

ट्रॉमा में मौत हो तो अक्सर उस जगह पर पैरानॉर्मल गतिविधियां देखी जा सकती हैं


रूह शरीर छोड़ती है तो उनका अलग ठिकाना होता है. कई बार वे अपने उस नए ठिकाने पर जाने को राजी नहीं होतीं. पुरानी जगह, पुराने लोग और पुराने इरादों के साथ बंधी रहती हैं. ऐसे में हम इंसानों को कम तकलीफ होती है, रूहों को ज्यादा.

वे देखती हैं कि हम बढ़िया खा रहे हैं, पहन रहे हैं, घूम रहे हैं, हंस रहे हैं, प्यार कर रहे हैं, पढ़ रहे हैं- वे भी सब करना चाहती हैं लेकिन कर नहीं पातीं. ये बहुत तकलीफ देता है. ऐसे में वो ध्यान खींचना चाहती हैं. बताना चाहती हैं कि वो भी यहां हैं, उनपर भी ध्यान दिया जाए. वे एनर्जी लेकर ताकत जुटाती हैं. दरवाजा खटखटाती हैं. सामान उठापटक करती हैं. और आप डर जाते हैं.

टीवी पर देखा होगा कि आत्माएं पूरे का पूरा घर हिला देती हैं. इंसानों को उठा-उठाकर पटकती हैं. सिर फोड़ देती हैं. ऐसा कुछ भी नहीं है.

वे भारी सामान को मेनिपुलेट नहीं कर सकतीं लेकिन अपने होने का सबूत देकर डरा जरूर पाती हैं. हालांकि सारी आत्माएं डराती भी नहीं. सिर्फ 2 प्रतिशत आत्माएं क्रिमिनल इरादे रखती हैं. लेकिन वो भी तब तक असहाय रहती हैं, जब तक कि आप डर न जाएं. जैसे ही डरेंगे, वे एनर्जी लेंगी और इतना डराएंगी कि आप खुद अपना नुकसान कर बैठेंगे.

अक्सर रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी के मालिकों का बुलावा आता है. वे हॉन्टेंड प्रॉपर्टी के टैग से छुटकारा चाहते हैं. हमारी टीम सेटअप के साथ जाती है और रिसर्च करती है. वाकई में वहां कुछ हो तो हम 'क्लींजिग' करते हैं. ये पूजा-पाठ से अलग इंसानी तरीका है.

हम आत्मा/आत्माओं से बात करते हैं और उसे मनाते हैं कि वो जगह छोड़ दे. वे बात करती हैं. इशारे देती हैं. इरादे जताती हैं.


बहुत सी जगहों का सिर्फ कमर्शियल फायदे के लिए हौवा बनाया गया है (प्रतीकात्मक फोटो)


कई बार खूब कोशिशों के बाद भी वो जाती नहीं हैं. ये अक्सर बच्चों की आत्माएं होती हैं. ऐसे में हम उस प्रॉपर्टी को छोड़ देते हैं. ज्यादातर लोग पूजा-पाठ भी करवाते हैं लेकिन ऐसे मामलों में भी अगर आत्मा का बने रहने का मन है तो वो नहीं जाएगी.

बहुत सी जगहों का सिर्फ कमर्शियल फायदे के लिए हौवा बनाया गया है, जैसे भानगढ़ का किला. कि वहां से आसमान से चिड़िया भी गुजरे तो भुन जाती है.

मैं वहां गया. अकेले दो रातें रहा और बिल्कुल साबुत लौटा. अवेयरनेस के लिए मैंने बताना शुरू किया तो खूब धमकियां मिलीं. वे हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम के फाउंडर का हवाला देते हुए कहते कि जैसे वो मरा, किसी इतवार तुम भी मरे मिलोगे. ये इंसानी धमकियां थीं. आत्माओं की नहीं.

घोस्ट हंटिंग या पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन विज्ञान है
इसके कायदे फिजिक्स, मेटाफिजिक्स पर काम करते हैं. लेकिन तब भी ये इंजीनियरिंग या लेखकी या डॉक्टरी से अलग है. बाकी जगहों पर नाकामयाबी का डर रहता है और इसमें मौत का. जहां आप डरे, डर आपको निगल जाएगा. वो काम के मेरे शुरुआती दिन थे. अलसुबह कब्रिस्तान से लौटा. सोने के लिए कपड़े बदलने लगा तो गले में खरोंच का निशान दिखा. मैंने फोटो ली और तुरंत अपने 'लीड' को फोन किया.

उसकी आवाज एकदम शांत थी. 'राज भाई, इस काम में ये नॉर्मल चीजें हैं. सोचो मत. जाने दो.'फिर मैंने कभी नहीं सोचा.


नुकसान उनका होता है जो बिना पढ़े-समझे इस काम में घुस जाते हैं


हमारे पास टीम में शामिल होने के लिए ढेरों email आते हैं.

पिछले दिनों मुंबई से एक सॉफ्यवेयर इंजीनियर का मेल आया. फोन नंबर दिया गया. बात हुई तो समझ आया कि वो शख्स सुसाइडल टेंडेंसी रखता है. हमने उसे नहीं लिया. ऐसे लोग इस काम में बड़ा खतरा हो सकते हैं. ऐसे ही एक दफे एक तांत्रिक मिला. उसका दावा था कि वो मुर्दे को जमीन से 2 फुट ऊपर उठा देता है. हम श्मशान-कब्रिस्तान साथ गए. कुछ नहीं हुआ.

ऐसे लोगों को भी शामिल नहीं करते जो अंधविश्वास फैलाएं. दिल-दिमाग-शरीर सब दुरुस्त हों, वही ये काम कर पाता है.

एक्सिडेंटली इस पेशे में आया. जहां लोग दिन में भी नहीं जाते, वहां रातों में रहता हूं. अच्छा लगता है, जब आप किसी ऐसे की मदद कर पाएं, जिसके पास इच्छाएं तो हैं लेकिन शरीर नहीं. 

और पढ़ने के लिए क्लिक करें-

#HumanStory: सेक्सोलॉजिस्ट का क़बूलनामा: पहचान छिपाने को मरीज हेलमेट पहन आते और मर्ज़ बताते हैं

#HumanStory: लोग समझाते- लड़का गे होगा, तभी वर्जिनिटी जांचने से कतरा रहा है

#HumanStory: गटर साफ करते हुए कभी पैरों पर कनखजूरे रेंगते हैं तो कभी कांच चुभता है 

#HumanStory: दास्तां स्पर्म डोनर की- ‘जेबखर्च के लिए की शुरुआत, बच्चे देखकर सोचता हूं, क्या मेरे होंगे ये?’ 

#HumanStory: साइकेट्रिस्ट का तजुर्बा- 8 साल के उस बच्चे को घरवालों ने खूब पीटा ताकि डिप्रेशन भाग जाए

#HumanStory: कहानी उस गांव की, जहां पानी के लिए मर्द करते हैं कई शादियां

#HumanStory: क्या होता है जेल की सलाखों के पीछे, रिटायर्ड जेल अधीक्षक की आपबीती

#HumanStory: सूखे ने मेरी बेटी की जान ले ली, सुसाइड नोट में लिखा- खेत मत बेचना 

#HumanStory: एक साथ 11 मौतों के बाद ये है 'बुराड़ी के उस घर' का हाल, मुफ्त में रहने से भी डरते हैं लोग

#HumanStory: नशेड़ी का कुबूलनामा: सामने दोस्तों की लाशें थीं और मैं उनकी जेब से पैसे चुरा रहा था

(इस सीरीज़ की बाकी कहानियां पढ़ने के लिए human story news18 टाइप करें.) 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए ह्यूमन स्‍टोरी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 29, 2019, 10:20 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...