#HumanStory: कुरान बांटने से इन्कार करने वाली लड़की ने दिया था तर्क- कल गोश्त खाने कहेंगे

इस बार कुरान बांटने को कहा. अगली बार 2 दिनों के लिए इस्लाम कुबूल करने कहेंगे या फिर किसी गैर मजहब वाले से गीता पाठ कराएंगे.

Mridulika Jha
Updated: July 18, 2019, 7:39 PM IST
Mridulika Jha
Updated: July 18, 2019, 7:39 PM IST
(अपडेट- सोशल साइट पर एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में फंसी ऋचा पटेल को नए आदेश के अनुसार कुरान की प्रतियां नहीं बांटनी होंगी. उन्हें नियमित जमानत मिली है.)

रांची के पिठौरिया गांव का नाम आपने शायद ही सुना हो. कोई ऐसी वजह भी नहीं जो इसे खास बनाती हो. लेकिन गांव में 12 जुलाई से गहमागहमी है. आबादी से ज्यादा गाड़ियां नजर आ रही हैं. वे सुनार टोली के बगैर पलस्तर वाले एक घर के सामने रुकती हैं. सबका मकसद है उस लड़की यानी ऋचा पटेल को टटोलना, जिसने कुरान बांटने से मना कर दिया था.

ऋचा 3 दिन जेल में रहीं. उनपर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप था. 15 जुलाई को इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे कुरान की 5 प्रतियां बांटें. उन्होंने इन्कार कर दिया. महज 19 साल की कॉलेज की लड़की के इन्कार ने जलजला ला दिया. तबसे सुनार टोली नाम का उनका बित्तेभर का मुहल्ला लंबी-पॉश गाड़ियों से चौंधिया रहा है. दर्जनों माइकों पर ऋचा बेबाकी से बोल रही हैं.

वे कहती हैं- 'जिन पोस्टों पर बवाल हो रहा है, वो महीनों पहले डाली थीं. वो भी कॉपी-पेस्ट या फॉरवर्डेड थीं. मैंने उन्हें अपनी वॉल पर रखा क्योंकि मैं उनसे इत्तेफाक रखती थी. मेरे मुहल्ले के दूसरे मजहब के लड़के इसी बात मुझपर नाराज थे. वो अक्सर मेरी पोस्ट पर भद्दे-भद्दे कमेंट करते.

उससे काम नहीं बना तो मुझे ऐसे घेर लिया. सोचा- लड़की है, जेल जाएगी तो डर जाएगी.'

 

रांची के पिठौरिया गांव में ऋचा का घर (फोटो- न्यूज18 झारखंड)
रांची के पिठौरिया गांव में ऋचा का घर (फोटो- न्यूज18 झारखंड)

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तब! डर लगा!
पूछताछ करते पुलिस घर पहुंची तो डर लगा था. वजह जानने पर वो भी खत्म हो गया. मैंने कोई गलती नहीं की. अगर की है तो मुझसे कहीं ज्यादा गलतियां मेरी ही फेसबुक वॉल पर दिख जाएंगी. लोग धमकियां देते हैं. गालियां देते हैं. एक बार मैंने सलमान पर लिखा- सलमान खान, हम तुम्हारी फिल्में नहीं देखेंगे. इसपर लोगों ने मुझे ट्रोल कर दिया. वे गंदे-गंदे नाम सुझाने लगे कि मुझे कैसी और कौन सी फिल्में देखनी चाहिए.

2015 में फेसबुक पर आई थी. दसवीं में थी. तब फॉरवर्डेड शेरो-शायरी पोस्ट किया करती. फोटो डाला करती. बचकानी चीजें लिखा करती.

धीरे-धीरे न्यूज देखने लगी. आदत बढ़ती गई. मैं वही बातें पढ़ने-पोस्ट करने लगी जो न्यूज में होतीं. चुनाव के वक्त पार्टियों से जुड़ी बातें डालने लगीं. किसने क्या कहा. किसने क्या किया. थोड़ा-बहुत मलाल भी मुझसे ये करवा रहा था. 18 की हो चुकी थी. वोट करना चाहती थी लेकिन वोटर आईडी नहीं बना था. मैंने सारे वो ग्रुप जॉइन कर डाले, जो राजनीति और इंडियन आर्मी से जुड़े हुए हैं. उन्हें पढ़ना अच्छा लगता है. जो पसंद आए, वो पोस्ट अपनी वॉल पर डाल देती हूं.

ऋचा की फेसबुक वॉल किसी भी आम युवा की वॉल से अलग नहीं दिखती (फोटो- फेसबुक)
ऋचा की फेसबुक वॉल किसी भी आम युवा की वॉल से अलग नहीं दिखती (फोटो- फेसबुक)


धीरे-धीरे जाना कि मुहल्ले के लड़के मुझे टारगेट कर रहे हैं. खोज-खोजकर मेरी पोस्ट पर आते, गंदी कमेंट करते. मैं कभी जवाब देती तो कभी ब्लॉक कर देती.

चैटिंग ऑफ कर रखी थी. हफ्तेभर पहले एक पुरानी पोस्ट पर धमकियां आने लगीं. मैंने कॉलेज जाना बंद कर दिया. थोड़ी घबराहट होने लगी थी. तभी 12 जुलाई की शाम पुलिस घर आई और बिना कोई सफाई सुने मुझे थाने ले गई. घर पर मां और छोटे भाई-बहन थे. सबके-सब रो रहे थे. फोन किया. आनन-फानन पापा थाने पहुंचे. तब जाकर माजरा कुछ साफ हुआ. अंजुमन इस्लामिया (पिठौरिया) के मंसूर खलीफा ने मुझपर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया था.

जिस ऋचा की 'न' पर तमाम पार्टियां भिड़ रही हैं, मीडिया में बहसें हो रही हैं, वही ऋचा बिना लागलपेट कहती हैं- अगर मैंने कुछ गलत किया है तो मेरे साथ उससे 4 गुना ज्यादा गलत हुआ है. एकतरफा आरोप पर मुझे जेल में रखा. छोड़ा तो शर्त रख दी थी. कुरान बांटने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी लेकिन डर लगता है कि कल मुलसमान बनने को कहा जाएगा! या फिर मुस्लिमों को गीता-रामायण पढ़ने!

कोर्ट पर भरोसा है इसीलिए तकलीफ भी हुई. कुरान की 5 कॉपियों की बजाए संविधान की 100 प्रतियां बांटने कह देते तो कोई एतराज नहीं था.

15 दिनों के भीतर ऋचा को कुरान की 5 कॉपियां बांटने की शर्त पर रिहाई मिली (फोटो- पिक्साबे)
15 दिनों के भीतर ऋचा को कुरान की 5 कॉपियां बांटने की शर्त पर रिहाई मिली (फोटो- पिक्साबे)


सोशल मीडिया की कॉपी-पेस्ट की रवायत ने रांची की इस गुमनाम लड़की की जिंदगी उथलपुथल कर दी. 3 दिन जेल में बिताकर लौटने के बाद से घर में कैद हैं.

बताती हैं- शुक्रवार शाम जेल गई. अंधेरा हो चुका था. मुहल्ले वाले देख रहे थे. पुलिस की भीड़ के साथ एक लेडी कॉन्सटेबल थी. डर लग रहा था. जैसे-तैसे रात बीती. अगली सुबह सुना कि हजारों लोग थाने के सामने जमा हैं. मेरे लिए! हजारों अनजान आवाजों ने बाहर तो निकाला लेकिन एक नई कैद में पहुंच गई.

घर के भीतर और बाहर चेहरे ही चेहरे हैं. हर चेहरे पर सवाल. सबको जानना है कि मैंने कुरान बांटने को न क्यों कहा? कोई ये नहीं पूछ रहा कि आप लोग कैसे रह रहे हैं. उठा ले जाने की धमकियां मिली हैं. हफ्तेभर से न मैं कॉलेज जा रही हूं, न छोटे भाई-बहन. वो डरे हुए हैं.

मां-पापा परेशान हैं. सोचा नहीं था कि फेसबुक पोस्ट जिंदगी ऐसे हिलाकर रख देगी.

घटना के बाद से ही ऋचा के घर पर लोगों का जमावड़ा है (फोटो- न्यूज18 झारखंड)
घटना के बाद से ही ऋचा के घर पर लोगों का जमावड़ा है (फोटो- न्यूज18 झारखंड)


इंटरव्यू के बीच में ही ऋचा को बुलावा आ जाता है. माफी मांगती हुई-सी आवाज में कहती हैं- 'अब आप पापा से बात कर लें'. फोन अब पापा यानी प्रकाश पटेल के पास है. सुरक्षा का सवाल करती हूं तो कहते हैं- 'अभी तो वक्त ही नहीं मिला. ऋचा के जेल से लौटने के बाद से घर पर लोग हैं. सुरक्षा का आवेदन करना होगा.'

उनकी आवाज इतनी सहज है जो खतरा भांप लेने के बाद ही आती है या फिर इस भरोसे पर कि सब ठीक ही होगा. 

'49 साल का हूं. दो बेटियों का बाप. ऋचा की फेसबुक वॉल देखी तो डर गया. ऐसी भद्दी-वाहियात गालियां कि बता भी नहीं सकता. ऋचा पढ़ने में बढ़िया है. रांची के सबसे अच्छे कॉलेज में पढ़ती है लेकिन इस वाकये के बाद से घर से नहीं निकल रही. अभी तो सब इंटरव्यू ले रहे हैं. मामला ठंडा पड़ेगा तो बस यही याद रहेगा कि बिटिया जेल गई थी.'

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First published: July 18, 2019, 10:32 AM IST
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