इस लड़के ने बनाया वो ऐप, जहां किराए पर लड़के मिलते हैं

29 साल के कौशल प्रकाश ने एक ऐप बनाया है- रेंट ए ब्‍वॉयफ्रेंड. उस ऐप पर ढेर सारे लड़के मौजूद हैं. जाइए, प्राइस देखिए, पसंद कीजिए और मुलाकात कीजिए. लेकिन कौशल कहते हैं, ये लड़के दोस्‍त हैं, बिकाऊ माल नहीं.

Manisha Pandey
Updated: September 10, 2018, 3:15 PM IST
Manisha Pandey
Updated: September 10, 2018, 3:15 PM IST
"रेंट ए ब्‍वॉयफ्रेंड" नाम जितना चौंकाने वाला लगता है, वास्‍तव में ये है नहीं. ये ऐप बनाने के पीछे वजह सिर्फ एक ही थी- हम एक ऐसे वक्‍त में जी रहे हैं, जहां अकेलापन बहुत बढ़ता जा रहा है. लोग डिप्रेशन में है, आत्‍महत्‍या कर रहे हैं, उनसे बात करने वाला कोई नहीं. मुझे लगा, एक ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां लोग बिना अपेक्षा, बिना डर और बिना जजमेंटल हुए नए लोगों से मिल सकें और वो सब कह सकें, जो वो कहीं और नहीं कह पाते. "रेंट ए ब्‍वॉयफ्रेंड" अपने अकेलेपन से अकेले-अकेले जूझ रहे लोगों को मिलाने की एक कोशिश है.

दोस्‍त हजार, लेकिन दुख बांटने वाला कोई नहीं
मैं 29 साल का हूं और एक गुजराती बिजनेस फैमिली से आता हूं. मॉडलिंग की दुनिया से भी मेरा ताल्‍लुक रहा है. मैं भी अकेलापन महसूस करता हूं. कितनी सारी ऐसी बातें हैं, जो मैं परिवार वालों से नहीं कर सकता. चाहे वो मुझे कितना भी प्‍यार करते हों और उन्‍हें मेरी कितनी भी परवाह क्‍यों न हो. प्‍यार करना एक बात है और समझना दूसरी. ये सच है कि इस पीढ़ी की परेशानियां, उनका अकेलापन और उनकी तकलीफों को समझने में हमारे परिवार नाकाम रहे हैं. कोई अपनी फैमिली से कहे कि उसे डिप्रेशन है तो मां-बाप को ये बात समझ ही नहीं आती. वो डांटते हैं या नजरंदाज कर देते हैं. कहते हैं, पढ़ने-लिखने, करियर बनाने की उम्र में तुम्‍हें किस बात का डिप्रेशन है. आप किसी से कह नहीं सकते. ऑफिस में काम कर रहे हैं, लेकिन वहां भी कोई दोस्‍त नहीं. फेसबुक पर हजारों फ्रेंड हैं, जो हर फोटो, हर स्‍टेटस को लाइक करते हैं, लेकिन बहुत निजी तकलीफें बांटने के लिए वो भी नहीं हैं. कोई किसी का दुख नहीं सुनना चाहता, सब सिर्फ खुश लोगों से मिलना और खुशी की बात करना चाहते हैं. खुशी की बात कैसे होगी क्‍योंकि खुशी तो है नहीं. इसलिए यहां आओ, "रेंट ए ब्‍वॉयफ्रेंड" करो और अपने मन की बात करो.



रेंट ए ब्‍वॉयफ्रेंड क्‍यों?
जब इस ऐप का आइडिया मेरे मन में आया तो हमने तकरीबन दो साल तक सौ से ज्‍यादा मॉक किए और लोगों से पूछा कि ऐसे किसी प्‍लेटफॉर्म के बारे में उनका क्‍या ख्‍याल है. हमने ये भी पूछा कि उन्‍हें सबसे ज्‍यादा कमी और जरूरत किस चीज की महसूस होती है. हर मॉक में समाज के अलग-अलग तबकों, वर्गों, प्रोफेशन और एज ग्रुप के लोग थे. सबका सांस्‍कृतिक, भाषाई परिवेश अलग था, लेकिन सबकी तकलीफ एक थी. सबको जिंदगी में एक ही चीज की कमी महसूस होती थी- एक नॉन जजमेंटल फ्रेंड. एक ऐसा दोस्‍त, जिससे हम अपने मन के सारे अंधेरे कोने बांट सकें, जिसके साथ हम सच्‍चे हो सकें. आवरण इतना बड़ा और गहरा है कि आज लोग अपने साथ भी सच्‍चे नहीं हैं. कितनी ऐसी बातें हैं जो हम खुद से भी स्‍वीकार करने से डरते हैं. वो बातें मन में इकट्ठा होते-होते एक दिन नासूर बन जाती हैं. आज इतने सारे लोग आत्‍महत्‍या क्‍यों कर रहे हैं. इन लोगों से कोई बात करने वाला होता तो ये अपनी जिंदगी खत्‍म करने का रास्‍ता नहीं चुनते.

"रेंट ए गर्लफ्रेंड" क्‍यों नहीं ?
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हम एक लड़के का प्रोफाइल ऐप पर डालकर लड़कियों से तो ये कह सकते हैं कि अपना दोस्‍त चुन लो, लेकिन एक लड़की का प्रोफाइल डालकर लड़कों से ये नहीं कह सकते कि अपनी पसंद की दोस्‍त चुन लो. हमारे समाज ने पश्चिम की निगेटिव चीजों को चाहे जितना अपना लिया हो, लेकिन अपनी मर्दवादी सोच को अभी भी छोड़ नहीं पाए हैं. रेंट ए गर्लफ्रेंड करते ही उसके तमाम नकारात्‍मक अर्थ निकाले जा सकते हैं और सबसे बड़ी बात कि उन लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा. हम एक ऐसा समाज हैं, जहां आज भी लड़कों को लड़कियों के साथ बात तक करने की तमीज नहीं है, उनके साथ स्‍वस्‍थ रिश्‍ता बनाना तो बहुत दूर की बात है. कंसेंट का मतलब अभी भी उन्‍हें ठीक से समझ नहीं आता. लड़कियों को किसी ऐसे स्‍पेस में डालते ही हम उन्‍हें ज्‍यादा वलनरेबल कर देंगे. हम यह खतरा नहीं उठा सकते थे, इसलिए हमने प्रोफाइल सिर्फ लड़कों की बनाई और चुनने का अधिकार लड़कियों के हाथ में रखा.



यह सेक्‍स के बारे में नहीं है
यकीन मानिए, महानगरों में रह रही युवा पीढ़ी के लिए आज सेक्‍स कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है. आज प्रीमैरिटल, पोस्‍ट मैरिटल सेक्‍स से लेकर लिव इन, कैजुएल सेक्‍स और हूक-अप तक सब बड़े पैमाने पर उपलब्‍ध है. शरीर के सुख से कोई वंचित नहीं है, बल्कि इससे ऊब चुके हैं. सच तो ये है कि आप जिसके साथ बिस्‍तर साझा कर रहे हैं, उसके साथ भी मन नहीं साझा कर पा रहे हैं. वहां पर भी खुद को खुलकर जता पाने, बता पाने की जगह नहीं है. मैं कोई हूकअप ऐप नहीं बनाना चाहता था, लोगों के पास हूकअप के ढेरों विकल्‍प पहले से मौजूद हैं. हमें बस एक ऐसी जगह चाहिए थी, जहां लोग शरीर से ऊपर उठकर मन बांट सकें. इस ऐप पर आप लड़कों को अपने घर, ऑफिस या किसी भी प्राइवेट जगह पर नहीं बुला सकते. आप सिर्फ पब्लिक स्‍पेस में ही मिल सकते हैं.

यहां पैसे देकर लड़के मिलते हैं
यह एक चार्जेबल ऐप है. आपको प्रतिघंटे के हिसाब से लड़का दोस्‍त से मिलने के लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे. लड़कों की तीन तरह की प्रोफाइल्‍स हैं- सेलिब्रिटी, मॉडल और सामान्‍य लड़के. समान्‍य लड़कों का रेट 300 रु. से लेकर 1000 रु. तक है. किसी मॉडल से मिलने के लिए आपको 1000 से 2000 रु. तक खर्च करने होंगे और सेलिब्रिटी के लिए 3000 रु. से ज्‍यादा. हमारे पास अब तक 90,000 से ज्‍यादा लड़कों की प्रोफाइल आ चुकी हैं और अब तो हमने रजिस्‍ट्रेशन भी बंद कर दी है. इन लड़कों में शादीशुदा लड़कों से लेकर बैचलर तक सब शामिल हैं. लोग पूछते हैं कि रेट कार्ड के साथ आया लड़का क्‍या सचमुच दोस्‍त हो सकेगा, क्‍या वो खुद को प्रोडक्‍ट जैसे नहीं महसूस करेगा. जो लड़की पैसे खर्च कर रही है, पावर इक्‍वेशन में उसकी स्थिति कैसी होगी और उसकी कैसी, जो पैसे लेकर ये सब कर रहा है. मुझे नहीं लगता कि ये इतनी वाजिब चिंताएं हैं. हम डॉक्‍टर के पास जाते हैं, साइकिएट्रिस्‍ट के पास जाते हैं, घर पर प्‍लंबर बुलाते हैं तो इन सारी सर्विसेज के लिए पैसे देते हैं. ये भी तो एक तरह की सर्विस है. जिसे जरूरत है कि वो किसी से बात करे, उसे बात करने के लिए एक दोस्‍त मिल रहा है. लड़कियां इसके लिए पैसे खर्च करने को तैयार हैं और वो कर रही हैं.



रेंट एक ब्‍वॉयफ्रेंड डेट की एक कहानी
एक बार इस ऐप पर एक लड़की ने एक लड़के को मिलने के लिए बुलाया. उसे एक अजीब किस्‍म का डिप्रेशन था- सोशल मीडिया डिप्रेशन. उसे लगता था कि वो मोटी और भद्दी है. इस वजह से कोई उससे दोस्‍ती नहीं करना चाहता, फेसबुक पर उसे फ्रेंड रिक्‍वेस्‍ट नहीं आतीं, उसकी फ्रेंड रिक्‍वेस्‍ट लोग स्‍वीकार नहीं करते, उसके फोटो पर लाइक नहीं आते, उसका कोई दोस्‍त नहीं. कल्‍पना करिए एक 20 साल की लड़की, जिसने दुनिया, जिदंगी कुछ नहीं देखी, वो डिप्रेशन का शिकार हो गई है. फेसबुक लाइक, कमेंट और फ्रेंड से जीवन का अर्थ तय हो रहा है और जिसके पास वो नहीं है, उसके मन में आत्‍महत्‍या का ख्‍याल आ रहा है. और उससे भी ज्‍यादा खतरनाक बात ये है कि उसके परिवार और कॉलेज में कोई एक ऐसा शख्‍स नहीं, जिससे वो ये बात कर सके. मां-बाप, टीचर, कोई ये देख नहीं पा रहा है कि लड़की अवसाद में है. हमारे ऐप पर उसे एक दोस्‍त मिला, जिसने उससे बात की और उसके डिप्रेशन से निकलने में भी मदद की.

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