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'चार बलात्कारियों में से एक हमारी जाति का है, वही बेटी से ब्याह कर ले'

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आंचल की ओट की हुई आंखों में सूनेपन और सवालों से पहले जो दिखाई देता है, वो है खून की कमी का लक्षण. आयरन-कैल्शियम, दूध-अंडे का जिक्र भी इस गांव में आखिरी बार जाने कब हुआ हो. अगले दो महीनों में 14 साल की बच्ची 'मां' बन चुकी होगी. वो न्याय की गुहार लगाती है. न्याय यानी बलात्कारी से शादी. मां-बाप से लेकर पूरा गांव इसी न्याय की बाट जोह रहा है. 

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    गांव में मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत हाल ही में सड़क बनी है. दुपहिया से गुजरते हुए 2000 की आबादी वाले गांव का हाल साफ नजर आता है. ज्यादातर घरों की छत फूस की है. पीड़िता का घर भी इन्हीं में से है. बलात्कार से सात महीने की गर्भवती महज 14 साल की है. बातचीत के दौरान वो चुपचाप वहीं बैठी रहती है. आखिर में लगभग फुसफुसाते हुए कह उठती है- 'बच्चा लेकर अब मैं कहां जाऊंगी'.

    दुपट्टे से मुंह ढंके हुए ही वो हिलककर रो रही है. पिता अपना जवाब अधूरा छोड़कर जमीन को ताक रहा है. मां साथ है. सुन नहीं पाती लेकिन मुंह ढांपी बच्ची की तकलीफ समझ जाती है. वो भी साथ में रो रही है.

    मुजफ्फरपुर के करजा थाना क्षेत्र में आने वाला गोड़ियारा गांव आमतौर पर शांत रहता है. आजकल यहां गहमागहमी का माहौल है. 14 साल की बच्ची से लगातार कई महीनों तक गैंगरेप हुआ. मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी गई. बात सामने आई जब पीड़िता बीमार रहने लगी. तब तक गर्भ 4 माह से ज्यादा का हो चुका था यानी मेडिकल टर्मिनेशन से भी बच्ची की जान को खतरा था. अब सात महीने से ऊपर हुए.



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    गरीब माता-पिता दोषियों को सजा तो दिलवाना चाहते हैं लेकिन उससे भी ज्यादा उन्हें ये आश्वासन चाहिए कि बलात्कारियों में से ही एक उनकी बेटी से शादी कर ले.

    'हमरा बच्ची बुद्धि से 5 साल की बच्ची जितनी है. उसकी मां और मैं खेत में काम करने जाते तो झोपड़ी में अकेली रहती, तभी ये घटा. आएदिन उल्टी करने पर पूछपाछ किए, तब चारों आदमी का नाम बताया', पिता बताते हैं.

    बच्ची की उम्र इतनी कम है, फिर शादी कैसे? सवाल खत्म होने से पहले कहते हैं, 'ठीक है. अभी शादी न करे तो भी कोरट (कोर्ट) को लिखित में दे दे कि उम्र होने पर मेरी बेटी से ही शादी करेगा. जिसने सबसे पहले दुष्कर्म किया वो सजातीय (एक जाति का) है. बाकी लोग परजात हैं. अब गोद में बच्चा धरे लड़की से कोई दूसरा तो शादी करेगा नहीं तो वही कर ले.

    जिसने बलात्कार किया, जान से मारने की धमकी दी, वो क्या बेटी को खुश रख पाएगा? देर तक चुप्पी के बाद पिता धीरे से कहते हैं, अब हम कर ही क्या सकते हैं, किसी तरह जीवन तो चलाना ही होगा.

    गांव के लोग भी पिता के दर्द और उम्मीद में सहभागी हैं. 4 महीने बाद मामला सामने आने पर गांव के ही स्तर पर कई बैठकें हुईं. बड़े-बुजुर्ग, चुने हुए प्रतिनिधि सभी बैठे. पीड़िता का परिवार और अभियुक्तों के परिवार भी. तभी ये बात आई कि जिसने सबसे पहले बलात्कार किया, उसे ही पीड़िता से शादी कर लेनी चाहिए.

    इसपर पहले आरोपी का परिवार भड़क उठा. बच्चा चारों में से किसी का भी हो सकता है तो 'जंजाल' कोई एक क्यों झेले!

    प्रखंड उपप्रमुख विनय साह, 55, कहते हैं, 'बच्ची उतनी तेज नहीं है, माइंड थोड़ा सा डल है. वो लोग बहलाकर गलत काम किए. अब बेचारी खुद का बच्चा लेकर कहां जाएगी. इसीलिए हम लोग शादी की बात छेड़े. कानूनी तौर पर अभी शादी संभव नहीं लेकिन रजामंदी करके रख देना चाहते हैं. इस बारे में परिवार से बात भी की लेकिन वो लोग मना कर दिए.'



    विनय साह के अलावा गांव के दूसरे लोगों में भी बलात्कार पर नाराजगी कम है और शादी से इन्कार पर ज्यादा.

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    नाम न लिखे जाने की शर्त पर गांव के एक युवक ने बताया कि गांव में लीगल सॉल्यूशन की बजाए अक्सर सोशल सॉल्यूशन की तरफ ध्यान देते हैं. बलात्कारी से शादी गलत तो है लेकिन ये कोई पहला मामला नहीं. गौरतलब है कि देश में कई ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं जहां शादी के आश्वासन पर पीड़ित पक्ष अपना आरोप वापस ले लेता है और लड़की की बलात्कारी से शादी हो जाती है.

    गांव की बैठक में राजीनामा न होने पर पिता ने पुलिस में केस दर्ज करवाया. तब से उन्हें लगातार दोषियों के परिवारों की तरफ से धमकियां मिल रही हैं. वे बताते हैं, चारों ही हमरा पड़ोसी हैं. एक तो हमारी ही जाति का है. पहले ठीक से बात होती थी लेकिन पुलिस में जाने के बाद से वो लोग डरा रहे हैं. अपने ही गांव में सहमकर रहना पड़ रहा है. लड़की की मां सुन नहीं पाती है और लड़की इस हाल में है. मीडिया वालों के लिखने के बाद दो लड़कों की गिरफ्तारी हुई लेकिन दो अभी भी गायब हैं. पुलिस छापेमारी कर रही है. देखें, वक्त क्या रंग लाएगा!

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    पिता फूस का घर बनाने का काम करते हैं. काम सालभर नहीं मिलता है इसलिए मां-बाप दोनों ही दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं. खुद का घर भी फूस ही का है. घर माने एक कमरा. वही रसोई, सोने का कमरा और बैठकखाना है. घटना के बाद से घर में लोगों की आमद बढ़ गई है. उन्हें वहीं बैठाया जाता है और बच्ची के सामने ही उसका भविष्य तय करने की कोशिश की जाती है.

    पेट से होने पर औरत को ज्यादा देखभाल चाहिए होती है वरना बच्चा कमजोर पैदा होता है. ऐसी बातों के जिक्र पर पिता सिर हिलाते रहते हैं. फिर धीरे-धीरे कहते हैं, 'अब अलग से क्या देखभाल! हम जो खाते हैं, वही वो खाती है. ध्यान रखते हैं कि दो जून का खाना उसे जरूर मिले'.



    लड़की पहले पास ही के प्राइमरी स्कूल जाया करती थी. घटना के सामने आने के बाद से स्कूल जाना बंद कर दिया. आसपास के लोग संवेदना से भरकर देखते हैं लेकिन कई आंखों में सवाल भी रहता है. बच्ची इतनी छोटी भी तो नहीं कि चार लोगों से जुड़ जाए. क्या पता खुद भी चाहती रही हो. सवालों के बावजूद अधिकतर लोग गरीबी के कारण संवेदना ही जताते हैं.

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    बच्ची और उसके परिवार की बदहाली का बयान करते हुए गांव का ही एक युवक कहता है, वो लोग इतनी जर्जर हालत में हैं, बच्ची का दिमाग इतना कम है. कम से कम ऐसे घर में तो ये काम नहीं ही किया जाना चाहिए था...

    गर्भवती बच्ची को जांच के लिए अस्पताल ले जाना चाहिए. वो दूध पीती है. उसे आयरन-कैल्शियम की गोलियां देते हैं? इन ढेरों बहुत सहज सवालों की यहां गुंजाइश नहीं. अस्पताल की बात पर बताता जाता है कि गांव से 4 किलोमीटर की दूरी पर पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) है. वहां की नर्स ही बच्चा कराती है. जरूरत आने पर वहीं ले जाएंगे.

    चार में से 2 दोषी अभी जेल में हैं, 2 फरार हैं. पीड़िता के परिवार को धमकियां मिल रही हैं कि वे केस वापस ले लें और शादी का दबाव भी न बनाएं. एसएसपी हरप्रीत कौर के सामने मामला आया तो उन्होंने पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया. करजा थाना ने इसपर अमल भी किया. लेकिन इससे पीड़िता की तकलीफ कहीं कम नहीं होती.

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    बच्ची उल्टियां करने के बाद फर्श पर ही सुस्ताती रहती है. आने-जाने वालों की बातें सुनती रहती है. कभी घर में माहौल गरमा जाता है तो कभी मातम पसरा जाता है. पिता मुलाकातियों के सवालों के जवाब देते हैं, भरोसा खोजते हैं. लेकिन बच्ची की आंखों में सूनेपन ने मानो घर कर लिया हो. बातचीत के बीच एकाएक कह उठती है- 'पहले कहा था कि हम रखेंगे. अब कह रहा है, अपना 'व्यवस्था' सोच लो. और केस उठा लो, नहीं तो जान से मार देंगे. अब बच्चा लेकर कहां जाएंगे!'

    (इनपुट: सुधीर कुमार)

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