#HumanStory: कैसा होता है जब कोई 'मर्द' नसबंदी करवा ले! कहानी नसबंदी करवाने वाले एक पुरुष की

ऑपरेशन से पहली रात मैं घबराया हुआ था लेकिन फिर अपनी सोती हुई पत्नी को देखा. जब ये बच्चों को जन्म दे सकती है तो क्या मैं नसबंदी नहीं करवा सकता. 

Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: July 30, 2018, 10:37 AM IST
#HumanStory: कैसा होता है जब कोई 'मर्द' नसबंदी करवा ले! कहानी नसबंदी करवाने वाले एक पुरुष की
महेंद्र सिंह पत्नी ललिता के साथ
Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: July 30, 2018, 10:37 AM IST
(महेंद्र सिंह राजस्थान के बारा जिले से हैं. वे मर्दानगी 'खत्म' करने वाले इस ऑपरेशन के बाद और भी ज्यादा 'मर्द' हो गए.)

मैं और मेरी पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते हैं. झगड़ा खत्म होते-होते भूल जाते हैं कि आखिर झगड़ा शुरू किस बात पर हुआ था. हमें ऐसे झगड़ते और फिर प्यार में पड़ते 12 साल हो चुके.

बीवी के जिक्र पर 32 बरस के महेंद्र सिंह की आवाज नए-नए प्यार में पड़े किसी किशोर जैसी हो आती है. महेंद्र जिस प्रदेश और जिस जगह से आते हैं, वहां पत्नी की जरूरत और अहमियत इसलिए ही है ताकि पुरुष को सामाजिक मान्यता मिल सके. महेंद्र और उनकी पत्नी ललिता का किस्सा हालांकि इससे अलहदा है. बच्चों के बाद ललिता जब नसबंदी के लिए जाने लगीं तो महेंद्र ने उन्हें रोक लिया. तुम नहीं, मैं जाऊंगा.

महेंद्र याद करते हैं, तीसरी तक पढ़ा हूं. यही मान लीजिए कि मुझे दस्तखत के अलावा कुछ नहीं आता, न पढ़ना- न लिखना. नसबंदी कराने की सोची तो किसी से बात नहीं कर सकता था, सिवाय अपनी औरत के. वो बारहवीं तक पढ़ी-लिखी है. इसी गर्मी में कॉलेज का भी कोई पर्चा दिया. खूब पढ़ती है. उसने कहा- तुम वीडियो देखो. मैं नसबंदी पर वीडियो देखने लगा.

दिनभर पेट्रोल पंप पर नौकरी करता हूं. वीडियो और वो भी नसबंदी पर देखना आसान नहीं था. छिपते-छिपाते वीडियो देखता. मामूली सी प्रक्रिया थी. लेकिन बात केवल ऑपरेशन के वक्त की नहीं थी. इसके बाद मैं अपनी पत्नी को बच्चे नहीं दे सकता था. गांव के चाचा-ताऊ इसका सीधा ताल्लुक मर्दानगी से मानते हैं. खूब सोचा. शादी के इतने साल बीते. हमारे 4 बच्चे हैं और हमें एक-दूसरे के अलावा किसी और को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं. अब मैं तैयार था.



तुम नसबंदी कराना चाहते हो? सवाल पूछते हुए डॉक्टर की आंखों और आवाज में हैरत थी.
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मेरी हां पर दूसरा सवाल था- तुम्हारी पत्नी क्यों न करवा लें!

फिर...

किसी दबाव में आकर तो ये फैसला नहीं किया!

शायद वो मेरे इरादे परख रहे थे. मैंने पूरी बात बताई. अब हमें और बच्चे नहीं चाहिए. पत्नी तो बच्चे पैदा करने की तकलीफ उठा चुकी है. मेरे चाहे से भी उसकी वो तकलीफ मैं नहीं ले सकता, इसीलिए अबकी मैं ऑपरेशन कराऊंगा. तसल्ली के बाद डॉक्टर ने मुझे पूरी प्रक्रिया समझाई और मुझे थोड़े दिनों बाद का वक्त दिया.

घर लौटा, ललिता को सारी बात बताई और डेट का इंतजार करने लगे. बीच-बीच में मन घबराता लेकिन फिर ललिता की तकलीफें याद आतीं. जब उसने 4 बच्चे पैदा करने में इतनी तकलीफ सही तो क्या मैं ये नहीं कर सकूंगा! मेरे भीतर लोगों का डर था. पता चलने पर लोग 17 तरह की बातें बनाते. हमने तय किया कि ऑपरेशन के बाद ही ये बात सामने लाई जाएगी. मैं काम पर जाता, लौटता, घर के कामों में मदद करता और बच्चों से गप लड़ाता. दिन नजदीक आ रहा था.

नसबंदी का मर्दानगी से कोई वास्ता नहीं
'लेडीज़' का ऑपरेशन ज्यादा खर्चीला होता है. उसपर उन्हें 'पलंग रेस्ट' चाहिए. बच्चे पैदा करके उनका शरीर पहले से ही कमजोर रहता है. मर्द को इसकी कोई जरूरत नहीं. हमारा ऑपरेशन भी कम वक्त लेता है और किसी आराम की भी जरूरत नहीं होती. वीडियो में जैसा देखा था, सबकुछ वैसा ही हुआ. घर लौटकर थोड़ी देर आराम किया और अगले दिन से नॉर्मल रुटीन में जुट गया.



पहले से ज्यादा ताकतवर महसूस करता हूं
डॉक्टर ने 5 दिन की दवाएं थमाते हुए कहा था, थोड़े दिन वजन मत उठाना. बस. दवाएं खत्म होने के साथ सब पहले की तरह हो गया. पत्नी के साथ संबंध बनाते हुए डर नहीं रहा कि इससे बच्चा ठहर सकता है. हम पहले से ज्यादा निश्चिंत थे. रिश्ता और भी गहरा हो गया. और किस तरह के बदलाव हुए! 'शरीर भर गया', महेंद्र बताते हैं. नस रुकवाने के ऑपरेशन के सालभर के भीतर ही मैं पहले से ज्यादा मजबूत हो गया. ऐसा वो भी कहती है.

महेंद्र का फैसला अपने तक ही सीमित नहीं रहा. गांव के 26 और मर्द उनके साथ जाकर नसबंदी करवा चुके हैं. कैसे हुई शुरुआत. महेंद्र याद करते हैं, मैंने थोड़ा वक्त बीतने पर अपने नसबंदी की बात बतानी शुरू की. सब जोड़े परेशान तो रहते हैं लेकिन इसपर बात नहीं कर पाते. फिर या तो दूर-दूर रहो या फिर औरत को दवा-गोली खानी पड़ती है. पेट्रोल पंप पर ही काम करने वाले एक दोस्त ने दिलचस्पी दिखाई. मैं उसे लेकर अस्पताल गया. ऐसे करते हुए लोग जानते और जुड़ते गए. कई लोग बीवियों से नसबंदी की बात करते हैं तो घर पर रोना-धोना मच जाता है लेकिन फिर सब सही हो जाता है.

पहले लोग खूब बातें बनाते. गांव के चौराहे, गली-नुक्कड़ पर मेरी नसबंदी चर्चा का विषय रही. धीरे-धीरे बाकी मर्द मेरी तरफ खिंचने लगे. जब ये 'भाई' इतना बांका मर्द है तो हम भी ऑपरेशन करवा लेते हैं.

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