#HumanStory: मां की दूसरी शादी के लिए बेटी को दे दिया था जहर,आज वही बेटी बचा रही जिंदगियां

उस शख्‍स ने कहा जिस तरह हमारे मामले में पड़ रही हो मैडम बच कर रहो. आपके साथ कुछ भी हो सकता है. आपका रेप भी हो सकता है.

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 2:53 PM IST
#HumanStory: मां की दूसरी शादी के लिए बेटी को दे दिया था जहर,आज वही बेटी बचा रही जिंदगियां
डॉ कृति भारती
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 2:53 PM IST
मेरे जन्‍म से पहले पिता ने मां का साथ छोड़ दिया था. पिता के अलगाव के बाद मेरी मां पूरी तरह टूट चुकी थीं. एक अकेली औरत, पति की छोड़ी हुई महिला का जीवन कितना मुश्‍किल होता है. इसे केवल वही समझ सकता है, जिसके सामने वह परिस्‍थतियां हों. इसे शब्‍दों में बयां नहीं किया जा सकता. इसके बाद मां ने रिश्‍तेदारों से सहारे की उम्‍मीद लगाई. वो भी नाकाम रही.रिश्‍तेदारों ने मुंह मोड़ लिया था. इन हालातों में भी मां ने मुझे जन्‍म दिया. वो जैसे- तैसे मेरी परवरिश करने लगीं. मेरे जन्‍म से कोई खुश नहीं था. दरअसल रिश्‍तेदार चाहते थे कि मेरा जन्‍म नहीं होता तो वो मेरी मां की दूसरी शादी करा देते लेकिन मेरी वजह से ऐसा नहीं हो पाया. इस वजह से मुझ पर अलग-अलग तरीके से मुझे परेशान करते थे.  कभी वो मुझे गालियां देते थे. मेरी शक्‍ल तक नहीं देखना चाहते थे. इसलिए दस साल की उम्र में एक रिश्‍तेदार ने मुझे जान से मारने की कोशिश की. उन्‍होंने मुझे केक में जहर मिलाकर दे दिया. समय पर इलाज मिलने की वजह से मैं बच तो गई लेकिन जहर का संक्रमण मेरे पूरे शरीर में फैल चुका था. अब मैं बिस्‍तर पर आ चुकी थी. पूरे शरीर में जान ही नहीं बची थी. मैं न चल सकती थी. न करवट ले सकती थी. यह भी पढ़ें:  #HumanStory: बारूद से भरी ट्रेन लेकर पाकिस्‍तान में घुस गया था ये जांबाज, लड़ाकू विमान भी नहीं बिगाड़ पाए थे कुछ

मां ने ऐलोपैथी,आयुर्वेद सबका सहारा ले लिया था. बावजूद इसके मेरा शरीर हिल-डुल भी नहीं पाता था.काफी महीनों तक तो मैं केवल बिस्‍तर पर ही रही. इसी बीच मैं एक भीलवाड़ा के एक गुरु के संपर्क में आ गई.यहां रेकी थैरेपी से मुझे थोड़ी राहत मिली. इस तरह धीरे-धीरे मेरे शरीर के एक-एक अंग ने काम करना शुरू कर दिया. अब मैं ठीक होने लगी थी. ठीक होने में मुझे दो साल लगे थे. इसके बाद मैंने संंन्‍यास ले लिया. मैं आश्रम में रहकर अन्‍य मरीजों की देखभाल करने लगी थी.

डॉ कृति भारती
यहां रहकर अपना सरनेम भी बदल लिया था,  क्‍योंकि मैं अब ऐसे शख्‍स की पहचान नहीं चाहती थी, जो मुझे और मेरी मां को छोड़कर चला गया. इसलिए अपना सरनेम बदल लिया था. मैंने अपने नाम के आगे ‘भारती’ लगा लिया था. भारती का मतलब ‘भारत की बेटी’ कर लिया था. मैं अब जाति-धर्म से ऊपर उठ चुकी थी. मगर कुछ वक्‍त बाद मां मुझे लेने आ गईं. वो शायद चाहती थीं कि मैं सन्‍यास छोड़ दूं. पहले पढ़ाई पूरी करूं. इसलिए मैं मां आश्रम से मुझे ले आई थीं. आश्रम से आने के बाद दोबारा मेरी पढ़ाई शुरू हो गई थी. मैंने दसवीं कक्षा में प्रवेश लिया. इसके बाद दिन-रात पढ़ाई करके हाईस्‍कूल में बेहतर अंकों के साथ पास किया. इस तरह फिर आगे पढ़ाई का सिलसिला चलता रहा. मैंने मनोविज्ञान में ग्रेजुएशन किया और फिर बाल संरक्षण और सुरक्षा में पीएचडी की. इसके बाद मैं एक एनजीओ से जुड़ गई.
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यहां एक रेप पीड़िता का केस सामने आया. मैंने उस बच्‍ची की काउंसिलिंग की. उस बच्‍ची की हालत इतनी खराब थी कि एक पल को उसकी हालत देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे. उस काउंसिलिंग के बाद मैंने ठाना कि मैं बच्‍चियों और महिलाओं के लिए खिलाफ होने वाले अन्‍याय और शोषण के खिलाफ काम करूंगीं. बस यहीं यहीं से बाल विवाह रोकने की ठानी और यहीं से साल 2012 में सारथी ट्रस्‍ट की नींव पड़ी. धीरे-धीरे मेरे साथ और लोग जुड़ते चले गए. इसके तहत बच्‍चियों का पुर्नवास और बाल विवाह रोकने की शुरूआत कर दी.
डॉ कृृृृति भारती
डॉ कृति भारती
मैं बाल विवाह रोकने लगी, जहां बाल विवाह की भनक लगती थी, वहीं अपनी टीम के साथ पहुंच जाती थी. दोनों परिवारों को बाल विवाह के दुष्‍परिणाम बताती थी. अगर वो मान जाते तो ठीक नहीं तो मैं कानून का सहारा लेकर बाल विवाह रुकवाती थी. इस दौरान मुझे याद नहीं है कि ऐसा कोई केस होगा जिसमें मुझे धमकियां नहीं मिली हों, लेकिन हमें बच्चों को उस नरक से बाहर निकालना है इसलिए ये बातें कोई मायने नहीं रखती थी. मगर एक बार तो हद ही हो गई थी, जब एक केस में मुझे रेप तक की धमकी मिली थी. मुझे याद है कि उस शख्‍स ने कहा जिस तरह हमारे मामले में पड़ रही हो मैडम बच के रहो. आपके लिए अच्‍छा नहीं होगा. कुछ भी हो सकता है. रेप भी हो सकता है. औरतों को इस तरह बाहर नहीं निकलना चाहिए. मगर मैं फिर भी रूकी नहीं. मैं अपना काम करती रही. यह भी पढ़ें: #Human Story: सड़क हादसे में बेटी को खो चुकी मां अब करती हैं ट्रैफिक कंट्रोल, ब्रेस्‍ट कैंसर को भी दे चुकी हैं मात इसका ही नतीजा है कि अभी तक 39 बाल विवाह निरस्‍त करा चुकी हूं. 1200 बाल विवाह रुकवा चुकी हूं. 6000 बच्‍चों को पुर्नवास किया है. 5000 अन्‍य लोगों का पुर्नवास में मदद की है. इस तरह से हम केवल नाबालिग बच्‍चियों की शादी नहीं रुकवाते बल्‍कि उन्‍हें आत्‍मनिर्भर भी बनाती हूं. बाल विवाह को निरस्त कराने के लिए समय समय पर ‘सारथी ट्रस्ट’ कैम्प भी लगाता है. ये कैम्प विभिन्न स्कूल और कॉलेज के अलावा सार्वजनिक जगहों या आंगनवाड़ी पर लगाये जाते हैं. बस मेरा मकसद है कि बाल विवाह केवल किताबों में दिखे और इतिहास बन जाए. असल जिंदगी में ये खत्‍म हो जाए. ( ये कहानी जोधपुर की रहने वाली डॉ कृति भारती की है. कृति जब सिर्फ दस वर्ष की थीं तो उनके एक रिश्‍तेदार ने उन्‍हें जान से मारने की कोशिश की. वह बच तो गईं लेकिन लंबे समय तक  बिस्‍तर पर ही रहीं. इसके बाद हालात बद से बदतर हो गए. पिता से अलगाव  के बाद अकेली मां को कृति  की परवरिश और इलाज कराना आसान नहीं था लेकिन  उनकी मां ने  हिम्‍मत  दिखाई और कृति  ने भी खुद को टूटने  नहीं  दिया. खुद बचपन में संघर्ष झेलकर बड़ी हुई कृति को बचपन खो देने का अहसास कुछ इस तरह हुआ कि  आज वे बच्चों और महिलाओं के पुनर्वास में जुट  गईं हैं. उन्‍होंने  सारथी ट्रस्‍ट की संस्‍था बनाई. इसके तहत वे बाल विवाह रोकती हैं.  अब तक  वे  39 बाल विवाह कानूनी रूप से निरस्‍त करा चुकी हूं . 1200 बाल विवाह तुड़वा चुकी हैं. 6000 बच्‍चों को पुर्नवास कर चुकी  हूं. ) 
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