Human Story: इस लड़की की फेसबुक पोस्‍ट पढ़कर आप अपना रक्‍त और अंग दान कर देंगे !

‘मैं मरना नहीं चाहता. कैसे भी करके मुझे बचा लो. यही वो शब्‍द थे, जो पापा ने अपने आखिरी वक्‍त में कहे थे. आज भी ये शब्‍द मुझे दिन-रात कचोटते हैं.

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: January 8, 2019, 11:49 AM IST
Human Story: इस लड़की की फेसबुक पोस्‍ट पढ़कर आप अपना रक्‍त और अंग दान कर देंगे !
स्‍मिता तांडी ( फेसबुक से साभार )
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: January 8, 2019, 11:49 AM IST
साल 2013 में जब मैं पुलिस प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थी तभी मम्‍मी का फोन आया कि घर आ जाओ. मैंने उनसे बहुत पूछा कि आखिर हुआ क्‍या है? उन्‍होंने कुछ नहीं बताया. मैं भी बस बिना कुछ ज्‍यादा सोचे-समझे छुट्टी लेकर वापस घर आ गई. यहां आकर देखा तो पापा बहुत ज्‍यादा बीमार थे. वो हॉस्‍पटिल में एडमिट थे. मेरी सभी भाई-बहन वहीं थे.

मैं भी हॉस्‍पटिल पहुंची. मैं पापा के पास खड़ी थी तभी उन्‍होंने मुझसे कहा कि, ‘मैं मरना नहीं चाहता. मुझे बचा लो. कैसे भी करके मुझे बचा लो’. यही वो शब्‍द थे, जो पापा ने  अपने आखिरी वक्‍त में कहे थे. पापा के ये शब्‍द सुनकर मम्‍मी के शरीर में तो जैसे जान ही नहीं बची थी. वे पापा के बेड के पास खड़ी थीं. खुद को संभाल नहीं पाईं और लड़खड़ा कर एक पल के लिए गिर पड़ीं. बड़ी बहन ने मम्‍मी को संभाला.

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इधर मैं और भाई सब हॉस्‍पिटल में इधर से उधर भाग रहे थे. कभी इस डॉक्‍टर के पास तो कभी उस डॉक्‍टर के पास. हम सब डॉक्‍टरों से मिन्नतें कर रहें थे कि कैसे भी करके हमारे पापा को बचा लो. उन्‍हें कुछ हो गया तो हम लोग जी नहीं पाएंगे. हमसे हमारा सब कुछ ले लो लेकिन हमारे पापा को बचा लो. डॉक्‍टर बस हमें समझा रहे थे कि वे कुछ नहीं कर सकते. पेनक्रियाज फेल हो चुका है. इसके लिए उन्‍हें दिल्‍ली के एम्‍स में इलाज कराना होगा. यहां इलाज नहीं हो पाएगा.



डॉक्‍टर की बात सुनकर अचानक भाई वहां से निकलकर बाहर भाग गया. हम भी भाई के पीछे- पीछे आए तो देखा की डॉक्‍टर से केबिन से बाहर निकलकर भाई अचानक से गायब हो गया. हम लोगों ने सोचा कि शायद पापा और मम्‍मी के पास होगा. हम बहनों ने जब वहां जाकर देखा तो भाई वहां भी नहीं था. मैं और दोनों बहनें घबरा गईं कि आखिर भाई गया कहां? तभी अचानक हमारी नजर पड़ी वार्ड के बाहर एक कोने में पड़ी तो देखा कि वो दीवार के सहारे खड़ा होकर रो रहा था. उसके आंसुओं को देखकर मैं और दोनों बहने भी खुद को रोक नहीं पाई.

हम चारों भाई -बहन को रोता हुआ देखकर वहां पास से गुजर रहे लोगों ने हमें समझाने की कोशिश की.मगर आंख से आंसू रूक ही नहीं रहे थे. एक-एक पल बड़ी मुश्‍किल से गुजर रहा था. हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम पापा का दिल्‍ली के हॉस्‍पटिल में इलाज करा सकें. हमने इसके लिए रिश्‍तेदारों से मदद मांगी तो कभी दोस्‍तों से, लेकिन कौन किसकी कितनी मदद करता है?हमारे साथ भी वही हुआ था.
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आखिरकार हम पापा का पैसों की कमी की वजह से आपरेशन नहीं करा पाए. इसकी वजह से उनकी मौत हो गई. इसके बाद से ही मैंने तय कर लिया था कि चाहें कुछ भी हो जाए. अब किसी और के साथ ऐसा नहीं होने दूंगी. बस उसके बाद से ही मैंने गरीब लोगों के इलाज में मदद करने  की ठान ली थी.



इसके लिए मैंने फेसबुक का रास्‍ता चुना. सोशल मीडिया पर लोगों से अपील करना शुरू किया कि आस-पास किसको इलाज में मदद की जरूरत है? उनकी पूरी जानकारी एफबी पर पोस्‍ट करती. शुरूआत में तो लोग हंसते थे मुझ पर.मजाक बनाते थे. कहते थे कि दुनिया बदलने निकली हैं. इनकी पोस्‍ट पढ़कर लोग मदद करने आएंगे. कहते हैं न कि दुनिया में अच्‍छे और बुरे दोनों ही लोग हैं. कुछ लोगों ने मदद करना शुरू कर दिया. किसी ने रक्‍तदान किया तो किसी ने अंग दान.

लेकिन यहां भी मुश्‍किलें कम नहीं हुईं. दरअसल फेसबुक पर ऐसी मदद की अपील करने वालों की भरमार है, तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मेरी पोस्ट्स पर लोग इतना भरोसा कैसे करते हैं? इसलिए मैंने इससे भी बचने का एक रास्‍ता निकाला. ऐसे में जब भी मुझे पता चलता है कि भिलाई, रायपुर या आसपास के इलाके में किसी को इलाज में मदद की जरूरत है तो मैं खुद वक्त निकालकर उनके पास जाती हूं. सारी जानकारी इकट्ठा करती हूं. तथ्यों को जांचती हूं. तथ्यों को जांचने के बाद वह फेसबुक पर मदद की अपील करते हुए पोस्ट डालती हैं. अब हमने एक अपना एक ग्रुप भी बना लिया है, जो पैसों के अभाव में इलाज के लिए परेशान रहने वाले लोगों की मदद करता है.
आज अच्‍छा लगता है जब मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर लोग लिखते हैं कि मेरी पोस्‍ट पढ़कर उनके सगे संबंधियों का इलाज हो पाया. मेरी वजह से उनके अपने आज उनके साथ है. यही खुशी सबसे बड़ी थी.


(ये कहानी छत्‍तीसगढ़ से ताल्‍लुक रखने वाली लेडी कॉन्‍स्‍टेबल स्‍मिता तांडी की है. वे लेडी कॉन्‍स्‍टेबल होने के  साथ-साथ एक सोशल वर्कर भी हैं. सोशल मीडिया के सहारे वे ऐसे जरूरतमंद लोगों की मदद करती हैं, जो पैसों के अभाव में अपना इलाज कराने में असमर्थ हैं. अपने इस सराहनीय काम के लिए वे कई पुरस्‍कार भी पा चुकी हैं. साथ-साथ नारी शक्‍ति पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित हो चुकी हैं.)

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