Human Story: दो बच्‍चों की मां व्‍हीलचेयर पर नहीं, इंटरनेशनल मेडल विनर है

ससुराल छोड़कर आई हुई बेटी को समाज कैसी नजरों से देखता हैं. ये समझना ज्‍यादा मुश्‍किल नहीं है. आज भले ही लोगों के ख्‍याल मेरे प्रति बदल गए हों लेकिन कल तक लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

Nandini Dubey
Updated: March 7, 2019, 1:16 PM IST
Human Story: दो बच्‍चों की मां व्‍हीलचेयर पर नहीं, इंटरनेशनल मेडल विनर है
श्‍वेता शर्मा ( तस्‍वीर फेसबुक से साभार)
Nandini Dubey
Updated: March 7, 2019, 1:16 PM IST
मम्‍मा सब बच्‍चे स्‍कूल जाते हैं.मैं क्‍यों नहीं जाता? मेरी पढ़ाई छूट रही है. बच्‍चों के ये सवाल सीधे आपके कलेजे में चुभते हैं. फिर आपको समझ नहीं आता कि उस वक्‍त आप क्‍या करें? कैसे खुद को संभाले और कैसे बच्‍चों को. उस वक्‍त महसूस होता है कि वाकई आप दुनिया के सबसे लाचार इंसान हैं. मैं भी कुछ ऐसा ही महसूस कर रही थी.सब दरवाजे बंद नजर आ रहे थे. चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था. कहीं से कोई उम्‍मीद नहीं थी. आज स्‍थितियां भले ही बदल गई हों.

मगर उस वक्‍त मेरी एक हंसती-खिलखिलाती शादीशुदा जिंदगी मेरी खत्‍म हो चुकी थी. कभी सोचा नहीं था कि शादी में ये दिन भी देखना पड़ेगा, लेकिन कहते हैं न कि अगले पल आपके साथ क्‍या होने वाला है ये आपको पता कहां होता है? मेरे साथ भी यही हुआ था. हमारा छह-सात सालों का रिश्‍ता खत्‍म हो गया था. मैं ससुराल छोड़कर अपने माता-पिता के घर आ गई थी.

Human Story: उस दिन अगर मैंने जींस न पहनी होती तो शायद अब तक मर चुकी होती



ससुराल छोड़कर आई हुई बेटी को समाज कैसी नजरों से देखता हैं. ये समझना ज्‍यादा मुश्‍किल नहीं है. आज भले ही लोगों के ख्‍याल मेरे प्रति बदल गए हों लेकिन कल जब लोगों ने जाना कि मैं अपना पति को छोड़कर आ गई हूं तो लोगों ने मुझ पर कई तरह के तंज कसे. उन्‍होंने कहा कि एक तो दिव्‍यांग है. बताओ, बचपन में पोलियो की वजह से दोनों पैर खराब हो गए थे. जैसे-तैसे शादी हुई तो वो भी न टिक सकी. अब कैसे कटेगी आगे की जिंदगी? दो बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा? अकेले जिंदगी काटना कितना मुश्‍किल है. आस-पड़ोस और रिश्‍तेदारों की इस तरह बातों को सुनकर मैं अंदर ही अंदर घुट रही थी. मेरा दिमाग शून्‍य में जा चुका था.



मगर इस वक्‍त जो अच्‍छी चीज थी वो था मेरा परिवार.वो हमेशा मेरे साथ थे.उन्‍होंने कभी मुझे महसूस नहीं कराया कि मैंने जो भी फैसला लिया है. उसमे वो मेरे साथ नहीं हैं. मम्‍मी-पापा,भाई- भाभी और दोस्‍त. हर किसी ने जो कोई भी मुझे करीब से जानता और समझता था उन्‍होंने मेरा साथ दिया.मेरी आंखों से निकलने वाले हर आंसूओं पर मुझे वो समझाते थे कि कैसे मुझे पीछे की जिंदगी को छोड़कर आगे की तरफ देखने के लिए प्रेरित किया. मुझे आगे बढ़ना चाहिए लेकिन मुझे कुछ नहीं समझ आता था.

Human Story: कल तक जो मुझे नचनिया कहते थे, आज उनके बच्चे मेरे साथ सेल्फी को तरसते हैं..
Loading...

मैं बस कमरें में दिन-दिन भर रोती रहती थी. इसी बीच बड़ा बेटा मुझसे सवाल करता था कि सब बच्‍चे पढ़ने जाते हैं? मैं क्‍यों नहीं जाता. ये सवाल सुनकर मैं एक पल के लिए चौंक गई. चुप रही. उसके बाद से मैंने सोच लिया था कि मेरे साथ जो हुआ सो हुआ लेकिन अपने बच्‍चों की जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूंगीं. मैंने अपने स्‍कूल के दोस्‍तों से मिलना-जुलना शुरू किया. थोड़ा घर के बाहर निकली. दोस्‍तों ने मुझे बताया कि हमारे बैच के कुछ बच्‍चे खेल में अच्‍छा प्रदर्शन कर रहे हैं. नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक खेल चुके हैं. अगर मैं चाहूं तो कोशिश कर सकती हूं.



दोस्‍तों की ये बातें सुनने को एक पल को तो थोड़ा अटपटा लगा क्‍योंकि मैंने स्‍कूल के बाद सालों हो गए थे कोई गेम नहीं खेला था. ऐसे में इस तरह खेल में कैसे प्रोफेशन बना सकती हूं. मगर उन लोगों ने समझाया और फिर मैं मान गई थी.

अब मैंने खेलने के बारे में ठान तो लिया था लेकिन स्टेडियम तक लेकर कौन जाए? इस कारण मैंने यूट्यूब पर ही खेल के बारे में जाना. इसी दौरान मेरी मुलाकात पैरालंपियन दीपा मलिक से हुई. उन्‍होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. साथ ही उन्‍होंने कई उपकरण भी उपलब्‍ध कराए. उनकी मदद से मैं पास के मैदान पर प्रैक्टिस करने लगी.



इसके बाद पहली बार साल 2016 में नेशनल गेम्‍स में हिस्‍सा और पॉवर लिफ्टिंग में सिल्‍वर मेडल जीता. इसके बाद 2017 में शॉटपुट में गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद नेशनल पैरा गेम्स और एशियन ट्रायल में एक-एक गोल्ड और एक-एक ब्रॉन्ज मेडल जीत लिए. नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर उनके नाम अब तक कुल 14 मेडल दर्ज है.

(ये कहानी दिल्‍ली से ताल्‍लुक रखने वाली 32 साल की पैरा एथलीट श्‍वेता शर्मा की है. बचपन में पोलियोग्रस्‍त श्‍वेता ने  साल  2016 में खेलना शुरू किया था और दो सालों के भीतर श्‍वेता ने न केवल खेल की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया बल्‍कि देश और दुनिया सहित 14 मेडल जीत लिए. हाल ही में  उन्‍होंने चीन में आयोजित ओपन  पैरा एथलेटिक्‍स चैंपयिनशप में भाला फेंक प्रतियोगिता में कांस्‍य पदक जीता है. जल्‍द ही वे एक और इंटरनेशनल इवेंट में हिस्‍सा लेने जा रही हैं.) 

(इस सीरीज़ की बाकी कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए human stories पर क्लिक करें.)

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स    
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...