#Human Story: ये धोखा मिलने के बाद नहीं रहा था मौत का भी डर, अब डिलीवरी गर्ल बनकर संवार रही हैं भविष्‍य

मैं आज भी डर जाती हूं, जब फोन पर किसी नए नंबर से कॉल आती है. दरवाजे पर जरा सी आहट होते ही सिहर उठते हैं. कहीं फिर से वो शख्‍स तो नहीं आ जाएगा और जबरन अपने साथ ले जाएगा.

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: January 17, 2019, 9:37 AM IST
#Human Story: ये धोखा मिलने के बाद नहीं रहा था मौत का भी डर, अब डिलीवरी गर्ल बनकर संवार रही हैं भविष्‍य
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: January 17, 2019, 9:37 AM IST
आज मैं अपनी जिंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकी हूं. बच्‍चों के साथ एक खुशहाल जिंदगी जी रही हूं. मगर गुजरे वक्‍त की कड़वी यादें आज भी मेरा पीछा नहीं छोड़ती हैं. आज भी दिन भर की थकान के बाद जब बिस्‍तर परलेटती हूं तो एक-एक करके मेरे सामने पिछली जिंदगी के एक पल-पल मेरी आंखों के सामने तैरने लगते हैं. रात में उठकर बैठ जाती हूं. घंटों गुमसुम रहती हूं. आज भी डर जाती हूं, जब फोन पर किसी नए नंबर से कॉल आती है.

दरवाजे पर जरा सी आहट होती है तो मैं और मेरे बच्‍चे सिहर जाते हैं. हम तीनों सहम जाते हैं कि कहीं फिर हम तीनों को उसी नरक में वापस तो नहीं जाना पड़ेगा. वो लोग फिर तो अपने साथ नहीं जाएंगे. जबरन मेरे घर वाले उनके साथ हमें भेज तो नहीं देंगे. सब कुछ वही तो नहीं झेलना पड़ेगा. ये सारे सवाल मेरे दिलो-दिमाग में चलते रहते हैं.

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आज भी मुझे याद है कि जब मेरे लाख मनाने के बाद भी घर वालों ने जबरन मेरी शादी करवा दी थी. मैंने उन्‍हें बहुत मना किया था. अभी मेरी शादी मत करवाओ. मैं अभी आगे पढ़ना चाहती हूं. आठवीं तक की ही तो पढ़ाई की थी. मैं करियर में कुछ करना चाहती हूं, लेकिन किसी ने मेरी एक न सुनी. सबके सामने हाथ जोड़-जोड़ फरियाद कर रही थी. मां, पापा, भाई, बहन, चाचा- चाची लेकिन किसी ने नहीं सुनी. मगर कोई समझने को तैयार नहीं था. ये सोचकर ही घिन आती है कि आज भी लोगों की यही सोच है कि लड़की पढ़- लिख करके क्‍या करेगी? घर में झाड़ू- पोछा ही तो करना है. खाना ही तो बनाना है.

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कहते हैं न कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता. मेरे साथ भी वही हुआ. तमाम दलीलों के बाद मेरी शादी करा दी गई. मैंने भी अपनी किस्‍मत को दोषी मानकर हालातों से समझौता कर लिया था.  मैं अपने ससुराल पहुंच चुकी थी. यहां पहुंचकर मुझे नहीं पता था कि शादी के अगले दिन ही मुझे ऐसा कोई तोहफा मिलेगा. ससुराल पहुंचने के दूसरे दिन ही हमारी सुहागरात की तैयारी की गई थी. मुझे पति के कमरे में भेज दिया गया था. अनमने मन से वहां पहुंची तो देखा कि उस बिस्‍तर पर पहले से एक महिला मौजूद थी.
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मुझे समझ नहीं आया था कि वो वहां पर क्‍या कर रही है? इस बारे में जब मैंने अपने पति से सवाल पूछा तो उन्‍होंने कहा कि वो यहां से कहीं नहीं जाएगी. उसकी तबियत ठीक नहीं है. उसके बाद बेशर्मी की सारी पर्ते मेरी आंखों के सामने खोलकर रख दी गईं. मैंने जब विरोध किया तो पति ने कहा कि अगर अपनी जुबां खोली तो घर के पास में ही रेलवे ट्रैक पर वहीं उठाकर फेंक दूंगा.

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ये सुनने के बाद बस बुत बनी सबकुछ अपनी आंखों से देखती रही. न तो किसी से कुछ कह सकती थी. न बोल सकती थी. बस पूरी रात आंसूओं में ही गुजरे. इसके बाद अगली सुबह जब मैंने ये बात अपनी सास को बताई तो उन्‍होंने मुझसे कहा कि यहां हर बहू ऐसे ही रहती है. कोई नई बात नहीं है. ये सुनकर मेरे पैरों तले जमीं खिसक गई. अब मेरे पास कोई रास्‍ता नहीं बचा था, क्‍योंकि अगर मैं घर पर ये सबकुछ बताती तो वो लोग कहते कि ये शादी नहीं करना चाहती थी. इसीलिए लड़के को बदनाम करके शादी से भागना चाहती है. इसलिए खामोश ही रही. मगर इसी खामोशी पति की हरकतें हर दिन बढ़ती जा रही थीं. दिन- रात शराब के नशे में डूबे रहना. अलग-अलग महिलाओं के साथ संबंध बनाना.



अब काम भी मुझ पर छोड़ दिया था. दिन भर मैं घर का काम करती थी. उसके बाद शाम को उनके हिस्‍से का काम यानी कि कपड़े धोना, प्रेस करना और अगले दिन दुकान लगाना. ये सब काम भी  मैं ही करती थी. उसके बाद भी नशे में मारपीट करना. ये सब कुछ मैं सह रही थी. इसी बीच मैं दो बच्‍चों की मां बन चुकी थी. इसी बीच कई बार मैंने घर वालों को बता भी दिया था. एक बार तो मैं घर छोड़कर भी चली गई थी. वहां रही. मगर ससुराल वाले मेरे घर आकर जबरन मुझे वापस भेजने की जिद करने लगे.

कई बार उनके कहने के बाद घर वाले मान गए और उन्‍होंने मुझे भेज दिया था. मगर उसके बावजूद वही सबकुछ जारी रहा. मैंने फिर पड़ोस की महिला के साथ बाथरूम में रंगे हाथ पकड़ा. उसके बाद जब मैंने फिर सवाल-जवाब किया तो मेरे ऊपर तेजाब डालने की भी कोशिश की. इसके बाद मेरे सब्र का बांध टूट चुका था. मैं दोबारा वापस अपने घर दिल्‍ली आ गई. अबकी बार मेरे घर वालों ने भी मेरा साथ दिया.

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उन्‍होंने साफ कहा कि अब कोई जरूरत नहीं वापस जाने की. इसके बाद से मैंने खुद को पढ़ने-लिखने के काम में लगा लिया था. मैंने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी. इसके साथ-साथ पार्लर में काम करना शुरू किया. यहां से मुझे कुछ पैसे मिलने लगे थे लेकिन घर पर अब भी मैं बोझ थी. मेरे साथ-साथ मेरे दो बच्‍चे भी थे. इसलिए मैं कोठियों में जाकर झाड़ू- पोछा करने लगी,जिससे ज्‍यादा पैसे कमा सकूं. फिर बच्‍चों को सरकारी स्‍कूल में पढ़ने भेजने लगी. इसके बाद धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर आने लगी थी.

इसी दौरान मैं एक दिन प्रयागराज स्‍टेडियम में जॉब फेयर में चली गई. यहां मेरी नजर 'ईवन कार्गो' के  स्‍टाल पर पड़ी जो ऑनलाइन सामानों की डिलीवरी के लिए गर्ल्‍स को हॉयर करते थे. बस यहां मैंने इंटरव्‍यू दिया. मेरा सेलेक्‍शन हो गया. आज मैं डिलीवरी गर्ल बनकर दिल्‍ली के घर-घर में सामान पहुंचाती हूं. साथ ही खुश हूं कि मैं अपना और अपने बच्‍चों का पेट भर पाती हूं.

(ये कहानी जोधपुर से ताल्‍लुक रखने वाली शकुंतला की है. वे जब आठवीं क्‍लास में थीं तब उनकी शादी कर दी गई थीं. उनके लाख विरोध करने के बावजूद हुई इस मैरिज ने उन्‍हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. एक बार पति ने उन पर तेजाब फेंकने की कोशिश की. इसके बाद उन्‍होंने अपने ससुराल छोड़ दिया. सबकुछ छोड़कर दिल्‍ली आ गई. यहां आकर न केवल उन्‍होंने पढ़ाई पूरी की बल्‍कि अब वे ‘ईवन कार्गो’ ऑनलाइन सामान डिलीवरी की वेबसाइट के साथ जुड़कर डिलीवरी गर्ल का काम कर रही हैं. साथ ही दोनों बच्‍चों को अकेले ही पाल रही हैं)  

(इस सीरीज़ की बाकी कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए human stories पर क्लिक करें.)

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