#HumanStory:'बच्चा पैदा करने के लिए शादी की क्या जरूरत है?'

खुलकर हंस और रो भी नहीं सकती.अगर ज्‍यादा खुश हो जाओ तो लगता है कि देखो आजादी चाहती थीं, मनमर्जी करना चाहती थीं, इसलिए तो शादी नहीं की. अगर उदास हो जाओ तो लोगों को लगता है हाय बेचारी की शादी नहीं हुई है इसलिए डिप्रैशन में चली गई

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: April 16, 2019, 2:30 PM IST
#HumanStory:'बच्चा पैदा करने के लिए शादी की क्या जरूरत है?'
अनीता मिश्रा
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: April 16, 2019, 2:30 PM IST
मैं 45 साल की  हूं और मैंने अभी तक शादी नहीं की. ये फैसला मैंने इसलिए बिल्‍कुल नहीं लिया, क्‍योंकि मेरा दिल टूट गया था. कोई मुझे कोई छोड़कर चला गया था, जिससे मैं शादी करना चाहती थी या उस शख्‍स से घर वालों ने मेरी शादी नहीं कराई, जिसको मैं चाहती थी. इस वजह से मैं डिप्रैशन में नहीं गई. अब उसकी याद में दिन-रात आंसू बहाती हूं. इसी वजह से मैं किसी और के साथ आगे नहीं बढ़ पा रही. मेरे शादी न करने के पीछे की वजह ये भी नहीं है.

इसके अलावा न ही मुझे किसी ऐसे मर्द से प्‍यार था, जो पहले से शादीशुदा था और हां न ही मेरे भीतर कोई कमी थी. दिव्‍यांग भी नहीं थी.  न ये वजहें भी नहीं थी. इसके बावजूद मैंने शादी नहीं की, क्‍योंकि मुझे कोई अपने मनमुताबिक कोई शख्‍स नहीं मिला. कोई ऐसा नहीं मिला, जो मुझसे वैसा ही प्‍यार करे, जैसी मैं हूं. मैं सिर्फ घर बसाने के लिए सिर्फ शादी नहीं करना चाहती थी.  ये सभी बातें जब मैंने अपने घर में समझाई तो घर वाले तो समझ गए लेकिन जो नहीं समझे थे वो थे रिश्‍तेदार, सोसाइटी, दोस्‍त.इन लोगों को समझाना आसान नहीं था.

अनीता मिश्रा


मुझे याद है, इलाहाबाद में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब दिल्‍ली पहुंची थी तभी ये  बातें सिर उठाने लगी थीं कि अब तो दिल्‍ली में जर्नलिज्‍म की पढ़ाई पूरी करने के बाद तो अनीता की शादी कर देंगे. कहीं लड़का-वड़का देखा या नहीं तो मम्‍मी-पापा हमेशा कह देते थे कि नहीं अभी तो बिल्‍कुल  नहीं, क्‍योंकि अभी तो वो जॉब करेगी. इसके बाद ही कुछ इस बारे में सोचेंगे. ये सब बातें मेरे कानों में भी पड़ती थी लेकिन मैं तो अपनी दुनिया में खुश थी. आगे बढ़ रही थी.

#HumanStory: उस शख्स की कहानी, जिसके हर रात बनते हैं नए दुश्मन 

अच्‍छे मीडिया हाउस में काम कर रही थी. मेरे लेख प्रकाशित हो रहे थे. जॉब बदल रही थी. खुश थी. इधर घर में बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी फिर मुझसे भी इस बारे में सवाल किया गया तो मैंने मम्‍मी- पापा और भाई-बहनों के  सामने अपनी राय रख दी. उनहोंने पहले ही मेरी बात को मान लिया. मगर दोबारा उन्‍हें इस बात का यकीन हो गया था कि शायद ये बात करना मेरे लिए बेमानी है.

पैरेंट्स ने  न सिर्फ बात का सम्‍मान किया और न ही सम्‍मान बल्‍कि अब रिश्‍तेदारों के अटपटे सवालों के जवाब भी वही देने लगे थे. इसी दौरान मैंने कानपुर लौटने का फैसला कर लिया. दरअसल मैं चाहती थी कि अपने शहर में कुछ करूं.  बस इसलिए अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.
Loading...

अनीता मिश्रा


कानपुर वापस आ गई. यहां आने के बाद मैं इंटीरियर डिजाइनिंग शुरू की. इसके साथ-साथ मैंने लिखना-पढ़ना जारी रखा. यहां आकर भी मैं देश की प्रतिष्‍ठित अखबारों और मैगजीनों के लिए लिखती रहती थी. मगर यहां आने के बाद मेरा शादी नहीं करना एक बड़ा मुद्दा बन गया. हर कोई नसीहत देने लगा. अकेली औरत की जिंदगी बड़ी कठिन होती है. बहुत मुश्‍किल होता है पूरी उम्र बिना किसी साथी के काटना. बुढ़ापे में कौन साथ देगा? सवालों की ये आंधी यहीं नहीं थमी.  कहते हैं न कि अभी तो हमें और सुनना था.  तो बस अगर मैं कहीं किसी रिश्‍तेदार के घर जाती और कह देती कि अच्‍छा अब मैं चल रही हूं तो लोग कहते थे कि अच्‍छा तुम्‍हें क्‍यों जाना है? तुम्‍हारा घर पर कौन इंतजार कर रहा है. तुम्‍हारे कौन से बच्‍चे रो रहे हैं? तुम रुको यहीं. इस तरह के तमाम सवाल मेरे सामने थे.

मैं उन रिश्‍तेदारों को ये नहीं समझा सकती थी कि शादी ही सबकुछ नहीं है. इसके अलावा भी मेरी जिंदगी है.  मुझे कोई अपनी बुक पढ़नी है.  कोई कहानी लिखनी है.  किसी फेवरेट आर्टिस्‍ट का संगीत सुनना है या फिर वो कुछ भी करना है जो मैं करना चाहती हूं, कभी नहीं कह पाई. अगर मैंने कहा तो शायद किसी ने सुनकर भी अनसुना कर दिया.

इन मुश्‍किलों से जूझ ही रही थी कि तभी मैंने अपना एक घर लिया है. कई बार तो यहां रहना मुश्‍किल हो जाता है. माली, दूधवाला या फिर आस-पड़ोस के लोग इतनी बातें समझाकर जाते हैं कि कई बार तो ऐसा अहसास होने लगता है कि शायद मैं ही गलत हूं. समझ नहीं आता कि करना क्‍या है? वहीं मेरी वजह से मेरी भाईयों की शादी में भी तकलीफें आईं. उन्‍हें भी तमाम तरह की बातों का सामना करना पड़ा लेकिन शुक्र इस बात का था कि मेरे घर वालों ने मेरा पूरा साथ दिया.

#HumanStory: मेरे दोस्त जब लड़कियों के पीछे भागते थे, मैं लड़कों के ख्‍वाब देखता था  

कई बार मुसीबत तब होती है, जब आपको दुनिया वालों के सामने अपने फीलिंग्‍स तक छिपानी पड़ती है.  अगर ज्‍यादा खुश हो जाओ तो भी लोगों को लगता है कि देखो कितना  खुश हैंं शादी न करके. आजादी चाहती थीं. अपनी मनमर्जी करना चाहती थी. इसलिए तो शादी नहीं करना चाहती थी. अगर कहीं दुखी हो जाए तो हाय बेचारी है. शादी नहीं हुई  न इसलिए उदास रहती है. शादी नहीं करने के पीछे अपने इमोशन को भी छिपाना पड़ता है. एक संतुलन बनाकर रखना पड़ता है.

ऐसा बिल्‍कुल नहीं है कि मैं शादी के खिलाफ हूं. बस अब तक शादी इसलिए नहीं की क्‍योंकि मैं सिर्फ घर बसाने के लिए शादी नहीं करना चाहती थी. मैं चाहती हूं कि जिससे मुझे प्‍यार हो. कोई ऐसा मेरा जिंदगी में आए , जो मुझे समझे तो मैं जरूर शादी करना चाहूंगी. हां एक औरत तब भी पूरी है जब वो कोई संतान को जन्‍म नहीं देती, क्‍योंकि ये उसकी मर्जी और सिर्फ उसकी मर्जी है. हां बच्‍चा पैदा करने के लिए शादी की कोई जरूरत नहीं है. अगर आप दिल से किसी बच्‍चे को अपनाना चाहते हैं तो आप किसी बेसहारा बच्‍चे को भी सहारा दे सकते हैं.

( ये कहानी कानपुर से ताल्‍लुक रखने वाली अनीता मिश्रा की है. अनीता पेशे से एक इंटीरियर डिजाइनर हैं. इसके अलाव वे फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट भी हैं. उनके लेख देश के प्रतिष्‍ठित अखबारों और मैगजीन में छपते रहते हैं. कुछ साल पहले शादी नहीं करने के फैसले की वजह से उन्‍होंने जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. अपने उन्‍हीं अनुभवों को उन्‍होंने हमारे साथ साझा किया. ) 

 
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626