#HumanStory:..तो क्या महिलाएं सच में खराब ड्राइविंग करती हैं?

मैडम अकेले गाड़ी लेकर क्यों निकल पड़ी. अपने साथ किसी मर्द को ले लेतीं, कम से कम मुसीबत में आपको बचा तो लेता.

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 10:43 AM IST
#HumanStory:..तो क्या महिलाएं सच में खराब ड्राइविंग करती हैं?
स्‍नेहा कामत
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 10:43 AM IST
एक औरत अच्छी ड्राइवर नहीं हो सकती.अगर जान प्यारी हो तो एक औरत के हाथ में कार की चाभी कभी मत देना. मैडम अकेले गाड़ी लेकर क्यों निकल पड़ी. अपने साथ किसी मर्द को ले लेतीं, कम से कम मुसीबत में आपको बचा तो लेता है. अगर कहीं जाम में फंस गए हैं या फिर किसी और गाड़ी निकल नहीं पा रही हैं तो कहीं दूर गाड़ी में बैठा शख्स भी बिना देखे ही मान लेता है कि पक्का ड्राइविंग सीट पर औरत होगी. इसी वजह से वह और गाड़ियों को साइड नहीं दे पा रही हैं. लड़कियां बिना इंडिकेटर के कई बार खटाक से लेन बदल देती हैं, जब भी ड्राइव करते हुए अचानक ब्रेक लगाते हैं  तो अक्‍सर आगे गाड़ी चलाने वाली महिला की गलती होती है. औरतें गाड़ी लेकर निकलें तो पढ़े-लिखे लोग भी मजाक उड़ाते हैं. उन पर कमेंट करते हैं. लोग तरह- तरह की बातें करते हैं.

अब ऐसे में अगर एक महिला दूसरी महिला को कार चलाना सिखाएगी तो फिर तो वही बात हो गई, कहते हैं न एक तो करेला और उस पर भी नीम चढ़ा. लोग इसी तरह की बातें करते थे, जब मैंने ‘शी कैन ड्राइव’ की शुरूआत की तो लोग कुछ इसी तरह से अपनी प्रतिक्रिया देते थे. अच्छा मैडम अब आप गाड़ी चलाना सिखाती हैं.आप सिर्फ औरतों को ही गाड़ी चलाना सिखाती हैं. मैडम हम आप पर कैसे भरोसा कर लें. आप खुद एक औरत हैं. पहले तो हमें गाड़ी चलाकर दिखाइए.

#HumanStory: 'बच्चा पैदा करने के लिए शादी की क्या जरूरत है?' 

स्‍नेहा कामत


पता नहीं आप कैसा ड्राइव करती होंगी. महिलाओं का हाथ तो वैसे ही ड्राइविंग में तंग रहता है.हमारी गाड़ी कहीं ठोक दी तो, कहीं हमारी बीवी या बहन को कुछ हो गया तो.इस तरह के अजीबो-गरीब सवाल हर दिन मेरे सामने होते थे. उन सबसे हमारा जवाब सिर्फ एक और एक ही होता था और वो ये था कि मैं आपको अपनी गाड़ी का कोई प्रूफ नहीं दूंगी, बस इतना कह सकती हूं कि मैं इंस्ट्रक्टर हूं. आप मेरे पास भेजिए.  मैं अपने स्टूडेंट्स को सिखाऊंगी.वो भी सिर्फ दस दिनों के भीतर. अगर ऐसा नहीं होता है तो पूरे पैसे वापस.

#HumanStory: इस शख्‍स के काम से परेशान होकर पत्नी ने छोड़ा साथ, बच्चे का चेहरा भी नहीं देखने दिया

कई लोग तो इस बात से परेशान हैं कि उनका रोजगार हमारे हाथ आ गया है. इसी बात से घबराकर वह व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि अच्छा! अब औरतें यह भी करेंगी'? पर हम इन बातो पर ध्यान नहीं देते और अपने कान बन्द रख, चुपचाप अपना काम करते रहते हैं.
Loading...

स्‍नेहा कामत


इसके बाद मेरी स्टूडेंट्स भी डरी हुई होती हैं. हमें उन्हें गाड़ी चलाना सिखाने से ज्यादा उनके भीतर में बरसों से बैठे डर को बाहर निकालना होता है. दरअसल उनके भीतर ये सोच होती है कि वे गाड़ी चला ही नहीं सकती. उनको किसी न किसी मर्द की जरूरत होती है. वे खुद ऐसे मानसिक वेदना से जूझ रही होती हैं. ऐसे में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत करना जरूरी होता है, क्‍योंकि मैं समझ सकती हूं कि उनके भीतर ये सोच कहां से आई है.

दरअसल मैं खुद भी कुछ वैसे ही हालातों से जूझी हूं.उस वक्‍त मैं सिर्फ सोलह साल की थी, तब मेरे पिता का निधन हो गया था. हम चार भाई-बहनों की जिम्‍मेदारी मां पर आ गई.अकेले मां के बस में हमारी परवरिश नहीं थी, इसलिए बड़ी बहन ने घर संभालना शुरू किया. मगर अकेले वो कितना करती. इसलिए मैंने उनका हाथ बंटाने का ठाना.

उसके बाद पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी करनी  पड़ी कभी सेल्‍स गर्ल तो कभी मार्केटिंग की जॉब की. इस तरह मैंने घर में योगदान देने के साथ-साथ पढ़ाई पूरी की. हमने घर संभाला और मां ने हमें. मां ने उस रूढ़िवादी सोच में हमें कभी फंसने नहीं दिया, जिसमे मारवाड़ी फैमिली में लड़कियों को थोड़ा-बहुत पढ़ा-लिखाकर शादी कर दी जाती है. मां ने हमारा साथ दिया. मां ने हमें समझा. उनकी ही समझ का नतीजा है कि आज मैं यहां तक पहुंची. हां ये तो है कि जब महिलाओं को ड्राइविंग सिखाने के लिए जब मैंने पोर्टल शुरू करने के बारे में सोचा तो पति थोड़ा पति थोड़ा असमंजस में थे. डरे हुए थे मगर बाद में उन्‍होंने भी समझा.आज वो मेरे साथ हैं.  इसके अलावा एक बात और मैं दावे से कह सकती हूं कि औरतें बहुत अच्‍छी ड्राइवर हैं. वे पुरुषों की अपेक्षा बहुत सधी हुई ड्राइविंग करती हैं.

(ये कहानी मुंबई से ताल्‍लुक रखने वाली स्‍नेहा कामत की है.स्‍नेहा सोशोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट हैं लेकिन उन्होंने अपने पढ़ाई को छोड़ अपने पैशन को नई उड़ान दी और उड़ान ऐसी जो उनकी पहचान बन गई. दरअसल स्नेहा ने समाज की उस सोच को बदलने का काम किया है, जिसमें ये कहा जाता है कि हर काम औरत के बस की बात नहीं. स्नेहा 'शी कैन ड्राइव' नाम से एक ड्राइविंग स्कूल चलाती हैं, जहां सिर्फ महिलाएं ड्राइविंग सीखती हैं. वो खुद ही ड्राइविंग सिखाती हैं.अभी तक वे 800 से ज्‍यादा महिलाओं को कार चलाना सिखा चुकी हैं. इस काम के लिए उन्‍हें राष्‍ट्रपति के हाथों से अवॉर्ड भी दिया जा चुका है.)
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626