विशेष: आखिर क्यों मुर्दाघरों के बाहर मंडराती है ये लड़की?

विशेष: आखिर क्यों मुर्दाघरों के बाहर मंडराती है ये लड़की?
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हैदराबाद की रहने वाली पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल श्रुति रेड्डी के लिए वो दिन बेहद अहम था जिस दिन उनके दादाजी की मौत हुई थी.

  • Last Updated: January 30, 2017, 12:23 PM IST
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हैदराबाद की रहने वाली पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल श्रुति रेड्डी के लिए वो दिन बेहद अहम था जिस दिन उनके दादाजी की मौत हुई थी.  उस दिन ने श्रुति की जिंदगी को बदल दिया. श्रुति ने न्यूज18 इंडिया से बात करते हुए बताया,  दादाजी की मृत्यु हो गई थी. उस दिन सब कुछ अस्त-व्यत था. अंत्‍येष्टि का सामान जुटाने के लिए लोग परेशान थे. इधर-उधर फोन घुमा रहे थे. बस तभी मैंने एक फैसला किया.

वो फैसला इतना अचरज भरा था कि जब लोगों को पता चला मैं ऐसा करने जा रही हूं तो कुछ लोगों ने मुझे ऐसा काम न करने की सलाह दे डाली. और मेरी मां ने तो मुझसे दो महीने तक बात ही नहीं की. वो फैसला था नौकरी छोड़कर अंत्‍येष्टि फ्यूनरल सर्विसेज नाम से स्‍टार्टअप चलाने का. मेरे मां-बाप ने मुझे बहुत समझाया तुम लड़की हो इन मुर्दों के बीच क्या करोगी. मेरे स्टार्टप के बारे में सुनकर किसी को भी अच्छा नहीं लगा.

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काम वाकई थोड़ा मुश्किल था. श्रुति ने बताया 'जब हमने इसे शुरू करने की योजना बनाई तभी हमारे सामने कई तरह की चुनौतियां आने लगी थीं. जब हम सूचनाएं जुटाने के लिए श्मशान के आसपास घूमते थे तो लोग हमें शक की निगाह से देखते थे. वे समझ नहीं पाते थे कि आखिर हम करना क्‍या चाह रहे हैं.' श्रुति बताती हैं कि उनके माता-पिता भी उन्‍हें ये समझाते थे कि आखिर वे क्‍यों सॉफ्टवेयर का काम छोड़कर ये सब करने जा रही हैं. लेकिन श्रुति नहीं मानी.



श्रुति के अलावा इस काम में चार लोग और हैं. इसके तहत वे अंतयेष्टि कार्य से जुड़े सभी सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं. श्रुति ने बताया जैसे लोग वेडिंग प्लानिंग करते हैं, बर्थडे प्लानिंग करते हैं वैसे ही हम फ्यूनरल प्लानिंग करते हैं. अंत्‍येष्टि फ्यू‍नरल सर्विसेज में हम सभी धर्म-समुदायों के लोगों के लिए सारा सामान उपलब्ध करवाते हैं.

अगर किसी घर में कोई मौत हो जाती है तो एक कॉल आने के बाद हम वहां पहुंच जाते हैं और उन्हें अंत्‍येष्टि का सारा सामान उपलब्ध करवाते हैं. हमारे स्टार्ट अप में सबसे दिलचस्प बात यह भी है कि हम लोगों को हेल्पर्स भी मुहैया करवाते हैं जो उस परिवार की मदद करते हैं.

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श्रुति इलेट्रिकल इंजीनियर के तौर पर नौकरी करती थीं. वे कहती हैं कि जीवन में कुछ अलग करना चाहती थीं, इसलिए नौकरी छोड़कर उन्‍होंने ये करने का फैसला किया.

 
First published: January 30, 2017, 11:19 AM IST
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