सुयोग्‍य वरों को कहना चाहिए, वो इंचीटेप लेकर लड़कियों का कुर्ता नहीं नापते फिरते

प्रतीकात्‍मक चित्र
प्रतीकात्‍मक चित्र

जितनी बार लड़कियों के कपड़ों के लिए नया कानून बनता है, और जितनी बार वो कानून ये कहता है कि इसका रिश्‍ता अच्‍छे वर से है, वो उतनी बार ये कह रहा होता है कि लड़के बेसिकली गधे होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2019, 1:12 PM IST
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लड़की कोई भी हो, अपने हिसाब की हो या दुनिया के हिसाब की, आजाद या गुलाम, शादी तो हर किसी को चाहिए होती है. विचार कोई भी हो, जिंदगी की राह कोई भी, शादी से किसी को ऐतराज नहीं. हर किसी को चाहिए, एक अच्‍छा, काबिल, भरोसेमंद, इज्‍जत और मुहब्‍बत देने वाला लड़का, जिसके साथ जिंदगी बिताई जा सके.

सबको चाहिए शादी और एक अच्‍छी शादी. तो एक अच्‍छी शादी पाने के लिए हर कोई अच्‍छी शादी के काबिल बनना चाहता है. एक अच्‍छी शादी के काबिल बनने के लिए आपको क्‍या करना चाहिए? आपको मतलब कि आप लड़कों को नहीं, आप लड़कियों को.

लड़कियों को अच्‍छी शादी के काबिल बनने के लिए घुटनों और उससे नीचे तक की लंबाई के कुर्ते पहनने चाहिए. ये कहना है हैदराबाद के बहुत प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर वुमेन का.



वैसे तो हिंदुस्‍तान में लड़कियों के कपड़ों पर लेंस ताने रहने और उसके लिए समय-समय पर नियम-कानूनों के नए-नए सर्कुलर जारी करने की परंपरा बहुत पुरानी है. क्‍या परिवार, क्‍या समाज, लड़कियों की फिक्र करने को आते हैं तो सबसे पहले उनके कपड़ों की फिक्र करते हैं. कभी कोई खाप उनके जींस पहनने पर प्रतिबंध लगाता है तो कोई स्‍कर्ट को खींचकर टखनों तक लंबा कर देना चाहता है. कहीं बिना आस्‍तीन के कपड़ों पर प्रतिबंध तो कहीं बिना दुपट्टा प्रवेश वर्जित. घरवाले तो हजार नियम डालते ही हैं, स्‍कूल-कॉलेज भी आए दिन एक नया कानून नोटिस बोर्ड पर टांग देते हैं, जिसमें बताया गया होता है कि कल से लड़कियों को कैसे कपड़े नहीं पहनने हैं.
इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हाल ही में हैदराबाद के कॉलेज ने लड़कियों के छोटे, बिना आस्‍तीन वाले कुर्ते पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया. मजे की बात ये है कि ये एक वुमेंस कॉलेज है. यानी लड़कियों की चाहे आस्‍तीन दिखे या घुटना, देखने वाली सब लड़कियां ही हैं. लेकिन फिर भी प्रतिबंध लगाया गया. लेकिन इससे भी ज्‍यादा मजेदार बात तो ये थी कि इसकी जो वजह बताई गई. कॉलेज हेड ने लड़कियों को ये कहकर समझाया है कि लंबे कुर्ते पहनेंगी तो शादी के लिए बेहतर रिश्‍ते आएंगे. मतलब कि जितना लंबा कुर्ता, अच्‍छा लड़का मिलने की उतनी ज्‍यादा संभावना.

सारा पेंच यहीं पर है. कुर्ता कैसा और क्‍यों हो, इस पर और भी कई तर्क हो सकते थे. लेकिन दिमाग के परखच्‍चे तो ये जानकर उड़ गए हैं कि छोटे कुर्ते से अच्‍छे वर की संभावना कम हो जाती है. लंबे कुर्ते से बढ़ जाती है.

सवाल ये नहीं है कि उस कॉलेज की टीचरें अपने दिमाग में क्‍या सोचती हैं, सवाल ये है कि वो लड़कों के दिमाग के बारे में क्‍या सोचती हैं और इस सोचने पर लड़के क्‍या सोचते हैं. क्‍या वो ये कहना चाह रही हैं कि लड़कों की बुद्धि घुटने बराबर होती है तभी वो लड़कियों के और किसी गुण को जानने, देखने, परखने के बजाय सारा फोकस उनके कुर्ते की लंबाई पर रखे हुए हैं.

- वो कहतीं, अच्‍छा वर चाहिए तो अच्‍छे से, मेहनत से पढ़ाई करो.
- वो कहतीं, अच्‍छा वर चाहिए तो अपने कॅरियर पर ध्‍यान दो.
- वो कहतीं, अच्‍छा वर चाहिए तो अच्‍छी इंसान बनो.
- वो कहतीं, अच्‍छा वर चाहिए तो बुद्धि, विवेक, ज्ञान हासिल करो.

वो कहतीं, अच्‍छा वर चाहिए तो ये सब जरूरी काम करो क्‍योंकि अच्‍छे लड़कों का फोकस इन अच्‍छी बातों पर होता है. लेकिन नहीं, वो तो ऐसा कुछ भी नहीं कह रही हैं. वो बेसिकली कह ये रही हैं कि अच्‍छे लड़कों को इनमें से कोई अच्‍छी चीज नहीं चाहिए होती. अच्‍छे लड़कों का सारा ध्‍यान सिर्फ कुर्ते की लंबाई पर होता है. लड़की चाहे बुद्धि से पैदल रहे, क्‍लास में फेल हो, पढ़ाई में जीरो और कॅरियर अंडा हो तो भी लंबा कुर्ता पहनकर अच्‍छा वर हासिल कर सकती है. इसका मतलब कि अच्‍छे वर की बुद्धि में भी गोबर भरा हुआ है. वो सही चीज छोड़कर हर गलत चीज पर फोकस किए हुए है. सही सवाल छोड़ हर गलत सवाल पूछ
रहा है.

इसलिए जितनी बार लड़कियों के कपड़ों के लिए नया कानून बनता है, और जितनी बार वो कानून ये कहता है कि इसका रिश्‍ता अच्‍छे वर से है, वो उतनी बार ये कह रहा होता है कि लड़के बेसिकली गधे होते हैं.

और अगर लड़कों को लगता है कि वो गधे नहीं हैं तो लड़कियों से पहले खुद उन्‍हें आगे बढ़कर ऐसे सारे नियमों का विरोध करना चाहिए. उन्‍हें कहना चाहिए कि हम लड़कों की मुहब्‍बत का तुम्‍हारे कुर्ते की लंबाई से कोई रिश्‍ता नहीं. तुमको जितना लंबा, जितना छोटा पहनना है, पहनो.

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