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भारत में घटते कोरोना केस लेकिन बढ़ती कोविड मौतें, खतरे का संकेत तो नहीं, जानें

भारत में घटते कोरोना केस लेकिन बढ़ती कोविड मौतें, खतरे का संकेत तो नहीं, जानें

भारत में घट रहे कोरोना केस लेकिन बढ़ रहीं कोरोना मौतें, जानें वजह (फोटो- AP)

भारत में घट रहे कोरोना केस लेकिन बढ़ रहीं कोरोना मौतें, जानें वजह (फोटो- AP)

एम्‍स देवघर के निदेशक डॉ. सौरभ वार्ष्‍णेय कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में हुई मौतों और अब कोरोना की तीसरी लहर में हो रही मौतों में भी अंतर है. अब जो मौतें कोविड मौतों में दर्ज हो रही हैं वे कोविड की वजह से मौतें हैं, ये कहना सही नहीं है.

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नई दिल्‍ली. भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2 लाख 86 हजार के करीब कोरोना के नए मरीज सामने आए हैं वहीं 573 लोगों की मौत हुई है. जबकि इससे एक दिन पहले भी कोरोना के लगभग इतने ही मामले देखे गए थे जबकि मौतों की संख्‍या इससे कहीं ज्‍यादा थी. 26 जनवरी को आए आंकड़ों में कोरोना वायरस (Corona Virus) से 665 लोगों की कोरोना से मौत हुई है जो कि तीसरी लहर (Corona Third wave) में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है. ऐसे में देश में एक तरफ कोरोना के मामले लगातार घटने लेकिन कोरोना मौतों (Covid-19 Deaths) की संख्‍या बढ़ने को लेकर कई तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं. जैसा कि दूसरी लहर के दौरान भी देखा गया था कि डेल्‍टा (Delta) के कारण कोरोना मृत्‍युदर बढ़ गई थी, ऐसे में सवाल है कि क्‍या इस बार मौतों का बढ़ना किसी खतरे का संकेत तो नहीं है. कोविड मृत्‍युदर (Covid Mortality rate) के बढ़ने के पीछे क्‍या कारण हो सकता है?

इन सवालों के जवाब में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) देवघर के निदेशक डॉ. सौरभ वार्ष्‍णेय कहते हैं कि कोरोना के मामलों के घटने और कोविड मौतों (Covid Deaths) के बढ़ने के आंकड़ों को पहली दफा देखने भर से यह अनुमान लगाना आसान है कि जरूर यह खतरे का संकेत है या फिर कोरोना ज्‍यादा खतरनाक हो रहा है जिसकी वजह से मृत्‍युदर बढ़ रही है लेकिन गहराई में देखें तो सच्‍चाई यह नहीं है. कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) में हुई मौतों और अब कोरोना की तीसरी लहर में हो रही मौतों में भी अंतर है. अब जो मौतें कोविड मौतों में दर्ज हो रही हैं वे कोविड की वजह से मौतें हैं, ये कहना सही नहीं है.

डॉ. वार्ष्‍णेय कहते हैं कि कोरोना में एक होती है संक्रमण दर जिसे इन्‍फेक्टिविटी रेट कहते हैं और दूसरा होता है रिकवरी रेट (Corona Recovery rate) यानि मरीजों के ठीक होने की दर. भारत में कोरोना की तीसरी लहर में देखा जा रहा है कि संक्रमण दर के मुकाबले रिकवरी रेट काफी ऊंचा रहा है. भारत में कोरोना के प्रति 100 संक्रमितों में से 94-95 मरीज बिना गंभीर हुए या अस्‍पताल में भर्ती हुए ही ठीक हो रहे हैं लेकिन जो सबसे बड़ा चिंता का विषय है वह यह रहा है कि 60-70 फीसदी ओमिक्रोन वेरिएंट (Omicron Variant) के मरीज असिम्‍प्‍टोमैटिक हैं और उनमें कोई लक्षण ही दिखाई नहीं दे रहा है. ऐसे लोगों को पता ही नहीं है कि वे कोरोना से संक्रमित हैं. वे जब किसी वजह से अस्‍पताल या जांच कराने के लिए जाते हैं तो उन्‍हें पता चलता है कि वे कोरोना से संक्रमित हैं.

डॉ. सौरभ कहते हैं कि देखा जा रहा है कि गंभीर बीमारियों के मरीज अस्‍पतालों में आ रहे हैं, जैसे कोई हार्ट का मरीज है, किसी को कैंसर है, किसी को लीवर या किडनी की परेशानी, कोई ऑर्गन फेलियर है या अन्‍य कोई गंभीर रोग से पीड़ि‍त है. इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर में आने वाले एक्‍सीडेंट आदि के मामलों में भी देखा गया है कि अस्‍पताल में आने से पहले तक इन्‍हें अपना कोविड स्‍टेटस नहीं पता होता है लेकिन जब वे अस्‍पताल में भर्ती होते हैं तो जरूरी प्रक्रिया के रूप में कोरोना की जांच भी की जाती है. अब चूंकि ओमिक्रोन संक्रमितों में तो लक्षण ही नहीं आ रहे, लिहाजा इनमें से कुछ लोगों में कोविड मौजूद होता है और ये कोरोना पॉजिटिवों (Covid Positive) की श्रेणी में रजिस्‍टर कर लिए जाते हैं. अब मान लीजिए इनकी अपनी ही गंभीर बीमारी के चलते इनमें से किसी का निधन हो जाता है तो गाइडलाइंस के अनुसार उसे कोविड पॉजिटिव मानते हुए कोविड डेथ में शामिल कर लिया जाता है. यही वजह है कि चाहे जिस किसी भी बीमारी से मरीज की मौत हो रही है लेकिन अगर वह कोरोना पॉजिटिव निकल आता है तो कोविड से मारे गए लोगों में शामिल हो जाता है और शायद इसी वजह से कोविड डेथ का आंकड़ा इस बार बढ़ रहा है. जबकि हकीकत में ये कोविड डेथ नहीं है बल्कि गंभीर बीमारी से मौत है.

दूसरी लहर और तीसरी लहर की मौतों में ये है अंतर
डॉ. वार्ष्‍णेय कहते हैं कि लोगों का ये भी सवाल है कि दूसरी लहर में भी इसी तरह मौतें हो रही थीं फिर वह लहर इतनी खतरनाक क्‍यों थी? ये क्‍यों कहा जा रहा था कि कोरोना अपने खतरनाक रूप में था. अब तीसरी लहर की मौतों से ये कैसे अलग है? तो इसका जवाब ये है कि कोरोना की दूसरी लहर में जो कोविड डेथ हुई थीं, उनमें ज्‍यादातर में देखा गया था कि कोरोना ने फेफड़ों पर हमला (Attack on lungs) किया था, जिसकी वजह से मरीज गंभीर हुए थे. फेफड़ों में परेशानी की वजह से ही लोगों की मौत हुई थी और इसीलिए इन्‍हें कोविड डेथ माना गया था. जबकि इस बार कोरोना ने फेफड़ों ही नहीं बल्कि किसी भी ऑर्गन को गंभीर रूप से प्रभावित नहीं किया है उल्‍टा इसके तो लक्षण भी सामने नहीं आ रहे हैं. लिहाजा अब जो मौतें हो रही हैं वे कोविड डेथ नहीं बल्कि बीमारी की गंभीरता से हो रही मौतें हैं. यही दूसरी और तीसरी लहर में अंतर है.

Tags: Corona death, Corona Virus, COVID 19, Covid Death in India

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