ट्रिपल तलाक में हुई जेल तो कौन करेगा पत्नी का भरण-पोषण?

ओवैसी ही नहीं कई लोग सोशल मीडिया पर यह कहते हुए तीन तलाक का विरोध कर रहे हैं कि कल को अगर कोई महिला तीन तालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती है और उसका पति उस जुर्म में तीन साल के लिए जेल चला जाता है तो उस स्थिति में उसकी पत्नी, बच्चों और घरवालों की देखरेख कौन करेगा?

Prerana Kumari | News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 10:40 AM IST
ट्रिपल तलाक में हुई जेल तो कौन करेगा पत्नी का भरण-पोषण?
क्या कहता है तीन तलाक का प्रावधान? जानें इस लेख से
Prerana Kumari | News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 10:40 AM IST
          'तलाक़ दे तो रहे हो इताब-ओ-क़हर के साथ,

            मिरा शबाब भी लौटा दो मेरी महर के साथ'

ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में पास होने के बाद ही सोशल मीडिया पर तमाम लोग अपनी प्रतिक्रिया लेकर आमादा हो गए हैं. प्रतिक्रिया देने वाले लोगों में कुमार विश्वास भी शामिल हुए. अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से विश्वास ने कुछ इसी अंदाज़ में बिल का समर्थन किया.



साजिद सजनी भोपाली की लिखी इस शायरी का लब्बोलुआब कुछ इस तरह है कि तलाक देने वाले तुम गुस्से और सजा के तौर पर मुझे तलाक तो दे रहे हो, पर इसके बदले में मेरी जवानी और महर भी लौटा दो.

ट्रिपल तलाक बिल पर अब दोनों सदनों की मुहर लग गई है. अब अगले कुछ दिनों में राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा. इसके बाद तलाक-ए-बिद्दत के तहत एक समय में अपनी पत्नी को तीन बार तलाक कहना कानूनी अपराध की श्रेणी में आ जाएगा. इसके तहत आरोपी को तीन साल तक कैद और जुर्माना का भुगतान करना पड़ सकता है.

केंद्र सरकार इसे एक बड़ी जीत के रूप में देख रही है. सरकार का मानना है कि इससे मुस्लिम महिलाएं सशक्त होंगी और कभी भी ज़रूरत पड़ने पर इस कानून का इस्तेमाल कर पाएंगी. लेकिन खुद को मुसलमानों की आवाज बताने वाले ओवैसी की राय इससे काफी जुदा है.

संसद में भी बहस करते वक्त उन्होंने ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाने के फैसले को इस्लाम और महिला विरोधी बताया था. यानी मुस्लिम महिलाओं के हितों में लिया जा रहा फैसला ओवैसी के मुताबिक उनके खिलाफ हो रही नाइंसाफी को बढ़ावा देगा.

ओवैसी ही नहीं कई लोग सोशल मीडिया पर यह कहते हुए तीन तलाक का विरोध कर रहे हैं कि कल को अगर कोई महिला तीन तालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती है और उसका पति उस जुर्म में तीन साल के लिए जेल चला जाता है तो उस स्थिति में उसकी पत्नी, बच्चों और घरवालों की देखरेख कौन करेगा?

यही तर्क ओवैसी ने भी संसद में दिया था. ओवैसी का कहना था कि तीन साल बाद जब पति वापस जेल से बाहर आएगा तो वह उस पत्नी के साथ क्यों रहना चाहेगा जिसने उसे जेल की हवा खिलवाई. वह क्यों उसकी देखरेख करेगा? ऐसे में मुस्लिम महिलाओं के साथ इंसाफ नहीं नाइंसाफी के मामले ही बढ़ेंगे. वो अकेली और बेसहारा हो जाएंगी.

क्या कहता है तीन तलाक का प्रावधान?

- तीन तलाक के प्रावधानों में यह बात साफ लिखी गई है कि तीन तलाक देने पर पत्नी और बच्चे के भरण पोषण का खर्च मजिस्ट्रेट तय करेंगे, जो पति को देना होगा.

यह खर्च पति जेल में रहकर भी दे सकता है क्योंकि जेल में भी काम कर के आप पैसे कमा सकते हैं.

दहेज जैसे मामलों में भी पति के जेल चले जाने के बाद ससुरालवाले और खुद पति की जिम्मेदारी पत्नी और बच्चों की देखरेख की होती है.

- तीन तलाक पर बने कानून में छोटे बच्चों की निगरानी व रखवाली मां के पास रहेगी.

- नए कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है. हालांकि पत्नी के पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ.

ओवैसी ने कहा कि आज से तीन दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट में दर्ज केसेज के लिए हमने मुल्क में 500 कोर्ट बनाएं, 450 सरकारी वकील बना दिएं. उसके बावजूद भी अब तक केवल 9 % मामलों में इंसाफ मिल पाया है.

ऐसे में ये बात किसे नहीं पता कि हमारे देश में जस्टिस मिलने में एक लंबा वक्त लगता है, इसका मतलब ये कतई नहीं है कि देश में कोई नया कानून बने ही न. जब अन्य  देशों ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया होगा तो क्या उनके ज़हन में यह बात नहीं आई होगी? क्या वो देश भी मुस्लिम महिलाओं का बुरा चाहते हैं?
First published: July 31, 2019, 1:49 PM IST
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