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नाइट शिफ्ट में करते हैं काम तो जरूर पढ़ें ये खबर, कहीं जिंदगी भर न पड़े पछताना

News18Hindi
Updated: December 14, 2019, 6:01 AM IST
नाइट शिफ्ट में करते हैं काम तो जरूर पढ़ें ये खबर, कहीं जिंदगी भर न पड़े पछताना
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में दिल संबंधी बीमारी और कैंसर की संभावना काफी बढ़ जाती है.

पहले जहां लोग दिन में काम करते थे और रात को आराम, वहीं आज नाइट शिफ्ट में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं. यह शिफ्ट आरामदायक तो लगती है, लेकिन हेल्थ के लिहाज से काफी खतरनाक है.

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  • Last Updated: December 14, 2019, 6:01 AM IST
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नाइट शिफ्ट में काम भले ही कम करना पड़े लेकिन सेहत के लिहाज से यह शिफ्ट बहुत ही नुकसानदेह है. बात बड़े शहरों की हो या फिर छोटे शहरों की लाइफस्टाइल के साथ-साथ काम करने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. पहले जहां लोग दिन में काम करते थे और रात को आराम, वहीं आज नाइट शिफ्ट में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं. यह शिफ्ट आरामदायक तो लगती है, लेकिन हेल्थ के लिहाज से काफी खतरनाक है. आइए आपको बताते हैं लगातार नाइट शिफ्ट करने से आपके स्वास्थ्य को क्या क्या परेशानी हो सकती है.

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नाइट शिफ्ट में काम करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है
आईटी, मीडिया, बीपीओ, फैशन हाउस, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के साथ-साथ औषधीय इकाइयों में भी नाइट शिफ्ट में काम करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्च के अनुसार नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में दिल संबंधी बीमारी और कैंसर की संभावना काफी बढ़ जाती है. शोधकर्ताओं की मानें, तो इसका सबसे बुरा असर डाइजेशन पर पड़ता है. जिस समय पेट को आराम की जरूरत होती है, उस समय या तो हम खा रहे होते हैं या बैठकर काम कर रहे होते हैं. इससे मोटापा व डायबेटिज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

बन सकता है ब्रेन स्ट्रोक का कारण
वहीं रात की शिफ्ट में काम करने से दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता है. आगे चलकर यह ब्रेन स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है. पांच साल या उससे ज्यादा समय से अगर आप नाइट शिफ्ट में काम कर रहे हैं, तो आपका दिमाग नाइट शिफ्ट में काम न करने वालों की तुलना में 6.5 साल अधिक बूढ़ा हो जाएगा. इससे आपकी सोचने-समझने की शक्ति कमजोर हो जाएगी और याददाश्त भी कमजोर हो सकती है.

जैविक घड़ी दिल की धड़कन को करती है कंट्रोलशोध के मुताबिक हमारे मस्तिष्क में कुछ हजार ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जो हमारे शरीर की मुख्य जैविक घड़ी होती हैं. यह जैविक घड़ी निर्धारित करती है कि हमें कब सोना है, कब जागना है या भोजन पचाने के लिए लिवर को कब एंजाइम पैदा करना है. जैविक घड़ी हमारे दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है, यह सुबह धड़कन को तेज और शाम को सुस्त कर देती है. रात की शिफ्ट में काम करने से जैविक घड़ी ठीक से काम नहीं कर पाती और ऐसे में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

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इन बातों का रखें ख्याल

  • नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो दिन में सोते समय पर्याप्त अंधेरा रखें.

  • सोने के लिए शांत जगह का चयन करें.

  • रात में ड्यूटी जाने से पहले एक घंटे की छोटी नींद जरूर लें.

  • रात में काम करते समय चॉकलेट, जंकफूड की बजाय, सलाद या फल का सेवन करें.

  • रात में काम करते समय चाय, कॉफी या शीतल पेय लेने से बचें.

  • ड्यूटी पूरी होने के बाद जब भी घर पहुंचें, तो खाली पेट न सोएं. हल्का-फुल्का खाकर ही सोएं.

  • नींद नहीं आ रही है, तो दवा या अल्कोहल का प्रयोग बिल्कुल न करें.


Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: December 14, 2019, 6:01 AM IST
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