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महिलाओं को स्ट्रेस फ्री रहने के लिए कितना जरूरी है 'Me Time', जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

महिलाओं को स्ट्रेस फ्री रहने के लिए कितना जरूरी है 'Me Time', जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

जो महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं, उनके मन में नेगिटिव सोच बढ़ जाती है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock)

जो महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं, उनके मन में नेगिटिव सोच बढ़ जाती है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock)

Importance Of 'Me Time' For Women: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं (Women) का खुद के लिए टाइम (Me Time) निकालना बहुत मुश्किल होता है. क्योंकि घर-परिवार, करियर और तमाम तरह की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें खुद के लिए फुर्सत नहीं मिल पाती है. साइंस का ऐसा मानना है कि जो महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं, उनके मन में नेगिटिव सोच बढ़ जाती है. जिसकी वजह से उनमें गुस्सा और चिड़चिड़ापन काफी बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है मी टाइम ऐसे में मेंटल हेल्थ, एनर्जी और स्ट्रेस फ्री रहने के लिए 'मी टाइम' यानी खुद के साथ समय बिताना बेहद फायदेमंद है.

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    Importance Of ‘Me Time’ For Women : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ खुशी के पल जुटाने की इच्छा हर किसी की होती है, फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष. पुरुषों के लिए तो फिर भी कई बार अपने लिए टाइम निकालना आसान हो जाता है, वो अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर चले जा सकते हैं. ऑफिस के काम से भी कई बार टूर (Tour) पर जाने का संयोग हो जाता है. घर पर भी उन्हें काम पर से आने के बाद अकेले में नो डिस्टर्बेंस जोन मिल जाता है. लेकिन महिलाओं के मामले में इस तरह खुद के लिए टाइम निकालना बहुत मुश्किल होता है. क्योंकि घर-परिवार, करियर और तमाम तरह की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें खुद के लिए फुर्सत नहीं मिल पाती है. हो सकता है कि कुछ उनकी लाइफ में इस ‘मी टाइम (Me Time)’ यानी खुद के लिए टाइम निकलने की अहमियत को न समझे हों. लेकिन साइंस का ऐसा मानना है कि जो महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं, उनके मन में नेगिटिव सोच बढ़ जाती है. ऐसे में मेंटल हेल्थ, एनर्जी और स्ट्रेस फ्री रहने के लिए ‘मी टाइम’ यानी खुद के साथ समय बिताना बेहद फायदेमंद हैं.

    वेरिजोन मीडिया (Verizon Media) की एक रिसर्च के मुताबिक, युवा भारतीय महिलाएं हर दिन अपने स्मार्टफोन पर करीब 145 मिनट बिताती हैं. और ये टाइम उनके खुद के लिए होता है. दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट में साइकोलॉजिस्ट (Psychologist ) डॉ योगिता कादियान (Dr Yogita Kadian) ने बताया है कि उनके पास ऐसी कई महिलाएं आती हैं, जो अपने रोजमर्रा के काम और झगड़ों को लेकर इतनी परेशान हो जाती हैं कि तनाव की शिकार हो जाती हैं. जिसकी वजह से उनमें गुस्सा और चिड़चिड़ापन काफी बढ़ जाता है.

    क्यों जरूरी है मी टाइम
    साइकोलॉजिस्ट (Psychologist ) के मुताबिक, इसलिए महिलाओं को मी टाइम (Me Time For Women) की अहमियत को समझना चाहिए. जैसे वो घर के सबसे छोटे सदस्य से लेकर घर के बड़े तक का ख्याल रखती हैं, वैसे ही उन्हें खुद का भी ख्याल रखना चाहिए.

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    बच्चों को भी दें मी टाइम
    डॉ योगिता ने आगे कहा कि महिलाओं को चाहिए जैसे उन्हें खुद के लिए मी टाइम निकालना चाहिए, वैसे ही उन्हें बच्चों को भी थोड़ी देर अकेला छोड़ना चाहिए, उन्हें भी उनका मी टाइम देना चाहिए. जिससे वो अच्छे से दूसरों से कनेक्ट हो पाएंगे.

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    अगर बच्चा पूरा समय सिर्फ आपके साथ ही बिताएगा तो वो इमोश्नली आप पर निर्भर हो जाएगा, जो कि सही नहीं है. इसलिए खुद के लिए मी टाइम निकालें और कुछ वक्त के लिए बच्चों को खुद से दूर रखें. ये मी टाइम आपको खुद को चार्ज करने का बेहतर अवसर देगा.

    Tags: Lifestyle, Women, Women Health

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