इमरान ख़ान को हिन्दी वाले ‘डोरेमॉन’ से दिक़्कत थी!

बच्चों का पसंदीदा डोरेमॉन जो वैसे तो एक रोबोट है लेकिन अपने दोस्त नोबिता को जो वो सीख देता है, वो बड़ों के काम की भी होती है. लेकिन इसी डोरेमॉन से पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म नवाज़ शरीफ को दिक्कत हुआ करती थी.

Kalpana Sharma | News18Hindi
Updated: September 14, 2018, 7:39 PM IST
इमरान ख़ान को हिन्दी वाले ‘डोरेमॉन’ से दिक़्कत थी!
इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने डोरेमॉन पर प्रतिबंध की मांग की थी
Kalpana Sharma | News18Hindi
Updated: September 14, 2018, 7:39 PM IST
‘अमेरिका-कनाडा में मेरे कई रिश्तेदार रहते हैं. वो अपने बच्चों को हिन्दी वाला डोरमॉन दिखाते हैं ताकि वे यह भाषा सीख सकें. मेरे कई दोस्त तो यह भी कहते हैं कि डोरेमॉन की वजह से हमारे बच्चे अच्छी हिन्दी बोलने लग गए.’ – ऐसा कहना है सोनल कौशल का जो लोकप्रिय टीवी कार्टून डोरेमॉन की हिन्दी डबिंग करती हैं. मूलत: यह शो जापानी भाषा में है, लेकिन भारत में इसकी हिन्दी के अलावा अन्य भाषाओं में भी डबिंग की जाती है. सोनल बताती हैं, ‘मुझे बच्चों के मम्मी पापा बताते हैं कि डोरेमॉन देखकर हमारा बच्चा अब गलती करने पर हमें ‘सॉरी’ नहीं, ‘माफ’ कर दो कहता है. वह यूनिवर्स या स्पेस को अंतरिक्ष कहता है.’

बच्चो के शो की डबिंग करने के दौरान जानबूझकर हिन्दी के शब्दों को तवज्जो दी जाती है. सोनल के मुताबिक, ‘ऐसा इसलिए ताकि बच्चे हिन्दी के साथ सहज हो सकें. एक बार मैंने अपना एक इंटरव्यू फेसबुक पर पोस्ट किया था. एक दोस्त ने उसे देखकर कहा कि यह इंटरव्यू हिन्दी में है इसलिए मैं पढ़ तो नहीं पा रही लेकिन बधाई हो, मैं तुम्हारे लिए बहुत ख़ुश हूं. मैं उसका कमेंट पढ़कर हैरान थी. अभी तो हमें हिन्दी पढ़ने में ही मुश्किल होती है, धीरे धीरे बोलने में भी मुश्किल न हो जाए.’

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सोनल कौशल, डोरेमॉन के लिए हिन्दी डबिंग करती हैं


वैसे सोनल सिर्फ डोरेमॉन की ही नहीं, छोटा भीम, माइटी राजू और पावरपफ गर्ल्स जैसे मशहूर एनिमेशन शो में भी अपनी आवाज़ से बच्चों का दिल जीत चुकी हैं. बता दें कि इन सभी कार्यक्रमों में हिन्दी का इस्तेमाल दिल खोलकर किया जाता है. ताकि बच्चों की रोजमर्रा की भाषा में बदलाव आए, यही वजह है कि अतीत में पाकिस्तान और बांग्लादेश में डोरेमॉन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की गई है.

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डोरेमोन मूल रूप से जापान का किरदार है


2013 में बांग्लादेश में हिन्दी डबिंग वाले डोरेमॉन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. वजह – बांग्लादेश में सरकार को यह चिंता सताने लगी थी कि इससे बच्चों के बीच बांग्ला को बढ़ावा नहीं मिल पाएगा और उनका झुकाव हिन्दी की तरफ ज़्यादा हो जाएगा. फिर 2016 में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ ने भी इस शो पर बैन लगाने की मांग की थी. ख़ान और उनकी पार्टी का कहना था कि - पहला तो इस शो से बच्चों पर ग़लत असर पड़ रहा है और दूसरा यह शो हिन्दी में है. इन दोनों वजहों से इस पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए. हालांकि पार्टी की इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया. फिलहाल पाकिस्तान में बच्चे, हिन्दी डबिंग वाले डोरेमॉन का मज़ा उठा रहे हैं. वैसे पाकिस्तान का वज़ीर-ए-आज़म बनने के बाद हमें यकीन है कि उनके पास डोरेमॉन के अलावा और बड़े मुद्दे होंगे सुलझाने के लिए.

इधर सोनल मानती हैं कि वो और उनके साथी, बच्चों की हिन्दी से दोस्ती तो करवा रहे हैं. लेकिन यह पूरा काम सिर्फ उनके भरोसे नहीं किया जा सकता. ज़रूरी है कि हिन्दी को स्कूल और घरों में भी बढ़ावा मिले. इसके लिए ज़रूरी है कि हिन्दी पढ़ाने वाले शिक्षक अच्छे मिले. सोनल अपनी अच्छी हिन्दी के लिए अपनी स्कूल की हिन्दी शिक्षक रश्मी को शुक्रिया कहती हैं जिन्होंने सोनल को हिन्दी के साथ सहज किया. शायद इसलिए जब से सोनल दिल्ली से मुंबई गई हैं, उनके नए शहर वाले दोस्त हिन्दी में उनकी मदद लेते रहते हैं और बदले में कहते हैं - शुक्रिया डोरेमॉन!
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