यहां सैनेटरी पैड्स के बदले सेक्स करने को मजबूर हैं लड़कियां

यहां सैनेटरी पैड्स के बदले सेक्स करने को मजबूर हैं लड़कियां
प्रतीकात्मक तस्वीर

हाल ही में यूनिसेफ ने इस जगह एक रिसर्च की. रिसर्च के दौरान जो बातें सामने आईं वह वाकई चौकाने वाली हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated : September 17, 2018, 11:40 am IST
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    केन्या की एक जगह है किबेरा स्लम, जो राजधानी नैरोबी का एक इलाका है. यहां रहने वाले लोग भयंकर ग़रीब है. हाल ही में यूनिसेफ ने इस जगह एक रिसर्च की. रिसर्च के दौरान जो बातें सामने आईं वह वाकई चौंकाने वाली हैं.

    रिसर्च में सामने आया कि किबेरा स्लम की लगभग 65 प्रतिशत महिलाओं को सैनेटरी नेपकीन की कीमत सेक्स देकर चुकानी पड़ती है. यही नहीं 10 प्रतिशत किशोर लड़कियां भी सैनेटरी नैपकीन के बदले दूसरों के साथ सोने को मजबूर हैं.

    केन्या के कई इलाके ऐसे हैं जहां आने-जाने की कोई सुविधा नहीं है. पीरियड्स के बारे में कोई बात नहीं करता है. जितनी जानकारी और मदद दी जानी चाहिए वह भी अपनी मां से किशोरियों को नहीं मिलती है.



    इस वजह से कई बार जब किशोरियां पहली बार पीरियड्स से गुज़रती हैं तो वे समझ नहीं पाती हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है. ऐसे में अक्सर 'बोडा-बोडा (मोटरसाइकिल टैक्सी) वाले फायदा उठाते हैं. किशोरियों को सैनेटरी नेपकीन देने के बहाने उनसे संबंध बनाते हैं. क्योंकि ना तो उनके पास सैनेटरी नेपकीन के पैसे होते हैं और ना ही पारिवारिक सपोर्ट.

    रिसर्च के दौरान एक और बात सामने आई कि केन्या की 7 प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं जो मासिक धर्म के दौरान सैनेटरी नेपकीन की जगह न्यूज़पेपर, पुराने कपड़े और मुर्गी के पंख जैसी चीज़ें इस्तेमाल करती हैं.  हालात इतने बुरे हैं कि कई इलाकों के लोगों को पता ही नहीं है कि साबुन जैसी भी कोई चीज़ होती है. वहीं साफ पानी की उम्मीद तो की ही नहीं जा सकती है.

    अफ्रीका की हर 10 में से 1 लड़की महीने में एक दिन स्कूल सिर्फ इसलिए नहीं जा पाती है, क्योंकि ना तो उसके पास सैनेटरी नैपकीन जैसे प्रॉडक्ट्स होते हैं और ना ही स्कूलों के टॉयलेट साफ-सुथरे होते हैं. हालांकि केन्या की सरकार यूनिसेफ के साथ मिलकर काम कर रही है जिसकी वजह से अब लगभग 335 स्कूलों में साफ-सुथरे टॉयलेट हैं जिसका फायदा लगभग 90,000 लड़कियों को मिल रहा है.

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