लॉकडाउन में छूट रहे सेफ, इसके लिए कोरोना टेस्ट जरूरी: WHO

विधायक अमीन कागजी ने कहा कि इससे पहले इनकी एक रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है. (प्रतीकात्मक फोटो)
विधायक अमीन कागजी ने कहा कि इससे पहले इनकी एक रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है. (प्रतीकात्मक फोटो)

विशेषज्ञों का मानना है कि लॉकडाउन में छूट के दौरान भी भारत में संक्रमण बढ़ रहा है. ऐसे में जांच बढ़ाने की जरूरत है.

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  • Last Updated: April 27, 2020, 11:11 AM IST
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कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से जूझ रहे दुनियाभर के देश धीरे-धीरे लॉकडाउन (Lockdown) में राहत देने के कदम उठा रहे हैं. लेकिन, विशेषज्ञ इसको लेकर काफी चिंतित भी हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोरोना का टीका बनने तक लॉकडाउन में छूट को सुरक्षित बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा जांच करनी होगी ताकि संक्रमितों का पता लगाकर उन्हें पृथक किया जा सके.

भारत में रोज डेढ़ लाख टेस्ट हों: हिंदुस्तान ई पेपर ने एजेंसी का हवाला देते हुए छापा है कि स्पेशलिस्ट का ऐसा मानना है कि लॉकडाउन में छूट के दौरान भी भारत में संक्रमण बढ़ रहा है. ऐसे में जांच बढ़ाने की जरूरत है. आईसीएमआर के मुताबिक 26 अप्रैैल तक देश में मात्र 6,25309 टेस्ट हुए हैं. अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय में संक्रामक रोगों के प्रमुख डॉ. फहीम यूनुस का कहना है कि भारत को एक महीने तक रोज डेढ़ लाख टेस्ट की जरूरत है.

अमेरिका लक्ष्य से दूर : जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के मुताबिक, अमेरिका में अब तक कुल 40 लाख 69 हजार टेस्ट हुए हैं. लेकिन यह आंकड़ा रॉकफेलेर फाउंडेशन की उन सिफारिशों से कहीं कम है, जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन में छूट देने से पहले अमेरिका को अगले दो महीने तक हर हफ्ते कम से कम 30 लाख जांच करने की जरूरत है. अमेरिका में कोरोना संक्रमित माामलों के पॉजिटिव आने की दर अभी 18.8 फीसदी है.



डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक, इतनी ज्यादा दर यह दर्शाती है कि जांच बहुत सीमति है. संस्था का कहना है कि कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की दर 9 फीसदी के आसपास होती है , तो माना जाता है कि वहां जांच सही तरीके से हुई है.
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