आज के समय में भी गर्भनिरोध पर खुलकर बात जरूरी...

वयस्क होने से पहले शादी में बंध जानेवाले जोड़ों के लिए अवांछित गर्भ बहुत ही मुश्किल पैदा करता है.

अधिकांश युवा और थोड़ा ज्यादा उम्र के नव-वयस्क/कॉलेज जानेवाले सेक्सुअलिटी के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने के बिना ही सेक्सुअल गतिविधि शुरू कर देते हैं.

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    भारत में किशोरों/किशोरियों की संख्या 25.30 करोड़ है (डब्ल्यूएचओ के अनुसार 10 से 19 वर्ष की उम्र के बच्चे किशोरों की श्रेणी में आते हैं). यह संख्या दुनिया के किसी भी देश में इनकी संख्या से अधिक है और यह जर्मनी, जापान और स्पेन की कुल जनसंख्या के बराबर है. इनमें से भारी संख्या में ये नवयुवक/नवयुवतियां सेक्सुअली सक्रिय (sexually active) हैं. अन्य देशों की तरह भारत में भी सेक्सुअल सक्रियता की उम्र नीचे चली गई है.

    इनमें से अधिकांश युवा और थोड़ा ज्यादा उम्र के नव-वयस्क/कॉलेज जानेवाले सेक्सुअलिटी के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने के बिना ही सेक्सुअल गतिविधि शुरू कर देते हैं. परिवारों और मित्र मंडलियों में जहां सेक्स के बारे में चर्चा होने की संभावना होती है, वहां भी जिस एक बात की कतई चर्चा नहीं होती है वह है गर्भ से बचने या सुरक्षित यौन संबंध के बारे में.

    क्या विवाहित हैं तो सुरक्षित हैं?
    वैसे भारत में बच्चों (लड़कियां जिनकी उम्र 18 से कम है और लड़के जिनकी उम्र 21 से कम है) की शादी आज भी आम बात है और देश में आज भी बाल विवाह का प्रतिशत 27 है. इन लोगों की यौन सक्रियता इसके तुरंत बाद बढ़ जाती है और इस बात की संभावना कम ही होती है कि ये लोग गर्भ निरोधकों का प्रयोग करेंगें क्योंकि इनमें एक तो जानकारी नहीं होती और दूसरा विकल्प मौजूद होते हैं.  फिर, हमारी पितृसत्तात्मक समाज में लड़कियों के कौमार्य (virginity) पर बहुत ही जोर दिया जाता है और इसलिए लड़कियों की कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है. फिर इन जोड़ों पर जल्दी बच्चे पैदा करने का दबाव भी होता है.

    'हमारी जब शादी हुई तो मैं 22 साल का था और वह लगभग 18 साल की थी. चार साल में हमारे 3 बच्चे पैदा हुए. गर्भनिरोध के बारे में मेरे मन में कई भ्रांतियां (misconceptions) थीं जैसे कि जो सच्चा पुरुष होता है वह कभी कॉन्डोम का प्रयोग नहीं करता. तीसरे बच्चे के बाद मेरी पत्नी को गर्भनिरोध के बारे में कुछ सलाह मिली और सिर्फ आर्थिक वजहों से हमने इसका सीमित प्रयोग किया. अगर हमारे परिवार में किसी को पता चल जाए कि हमने इस तरह की किसी चीज का प्रयोग किया है तो हमारे लिए बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी.' - जुनैद, 28, दुकानदार, इंदौर वयस्क होने से पहले शादी में बंध जानेवाले जोड़ों के लिए अवांछित गर्भ बहुत ही मुश्किल पैदा करता है.

    यह उन जोड़ों को भी मुश्किल में डाल देता है जो डेटिंग और प्यार के विभिन्न चरणों से गुजर रहे होते हैं. चाहे आप विवाहित हों या अविवाहित, असुरक्षित यौन संबंधों का युवक/युवतियों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिणाम भुगतना पड़ता है. इसकी वजह से अवांछित प्रेग्नेंसी हो सकती है, असुरक्षित एबॉर्शन कराना पड़ सकता है और एचआईवी/एड्स जैसे यौन संक्रमण भी हो सकते हैं.

    कुछ करने से पहले सोचें
    भारतीय समाज में युवाओं पर कई तरह की पाबंदियां हैं जिनकी वजह से ये लोग गर्भ निरोधकों का प्रयोग नहीं करते और असुरक्षित यौन संबंध में फंस जाते हैं. अधिकांश युवा अप्रत्याशित और अनियोजित (unexpected and unplanned) यौन संबंध बनाते हैं और इन्हें गर्भ निरोध के बारे में कोई जानकारी नहीं होती. अधिकांश युवाओं को गर्भ निरोधक बेचने वाले दुकानदारों/स्वास्थ्य कर्मियों से डर लगता है. फिर, इनमें से कईयों के पास इसे खरीदने के लिए पैसे नहीं होते और किसी और दवा के नाम से ही ये डर जाते हैं.

    अमूमन सेक्सुअली सक्रिय युवाओं को, भले ही वे वयस्क क्यों न हों, उन्हें उनके परिवार वालों और अभिभावकों की मदद नहीं मिलती. इसलिए वे सेक्स के बारे में अपनी साभी बातों को छिपा लेते हैं. भारत की आधी से अधिक जनसंख्या प्रजनन के लिहाज से सक्रिय उम्र (15-49 की उम्र) के दौरान अवांछित गर्भ से बचने या दो बच्चों के बीच पर्याप्त समय देने के लिए गर्भ निरोध के आधुनिक तरीकों का प्रयोग नहीं करती है. सो, लगभग 4.5 करोड़ महिलाएं किसी भी आधुनिक गर्भ निरोधकों का प्रयोग नहीं करती हैं.

    “मैंने केमिस्ट से गर्भ निरोधक खरीदी है पर मैं इस बात का ख्याल रखती हूं कि मैं इसे खरीदने के लिए दूकान पर तब जाऊं जब वहां कम से कम ग्राहक हों. यह एक बहुत ही परेशानी में डालने वाला अनुभव है. मैं लज्जित नहीं हूं पर मुझे इस बात की चिंता होती है कि कोई जान पहचान का व्यक्ति मुझे यह खरीदते हुए देख न ले. अमूमन मैं नाम नहीं बताती, कागज़ पर लिखकर उसे केमिस्ट को दे देती हूं. वह हमको कागज़ में लपेटकर यह दे देता है. इससे कोई असर नहीं पड़ता कि आप विवाहित हैं या अविवाहित, कॉन्डोम खरीदते हैं या इमरजेंसी पिल, वे आपकी और ऐसे देखते हैं जैसे सेक्स कोई शर्मनाक बात हो और किसी महिला के लिए तो यह पाप ही है.” -शालिनी, 22, आरजे, मोहाली

    कोई भाषणबाजी नहीं, कोई प्रैक्टिस नहीं
    सेक्सुअल और प्रजनन (reproductive) स्वास्थ्य की शिक्षा की इस तरह व्यवस्था होनी चाहिए कि यह ऐसे युवाओं की जरूरतों का समाधान कर सके जिन्होंने अपनी सेक्सुअल सक्रियता अभी अभी शुरू की है और उनको भी मदद पहुंचा सके जो पहले से ही सेक्सुअली सक्रिय हैं. कई बार परिवार के बुजुर्ग, ज्यादा उम्र के कजिन्स और अपने भाई-बहन, मां-बाप कई तरह की नकारात्मक बातें फैलाते हैं जैसे कॉन्डोम के प्रयोग से नपुंसकता बढ़ती है, स्टरलाइजेशन से शारीरिक कमजोरी आती है, मोटापा बढ़ता है और सेक्सुअली सक्रिय होने की बात को शर्मनाक बताने से युवा गर्भ निरोधकों की मदद लेने से बचते हैं.

    कई बार कुछ उम्रदराज लोग ‘वापसी के तरीके’ (जिसमें स्खलन से पूर्व ही योनि से लिंग को निकाल लेने की बात) सुझाते हैं या फिर परहेज करने को कहते हैं पर ये सब कारगर नहीं होते. अधिकांश सामाजिक कार्यकर्ता और सर्वे यह बताते हैं कि विकल्पों के बढ़ने और इनकी उपलब्धता के कारण सेक्सुअली सक्रिय महिलाओं और पुरुषों, विशेषकर युवक/युवतियों को काफी स्वतन्त्रता मिली है. पर कई आज भी इस मुद्दे पर किसी तरह की चर्चा के बारे में अलग राय रखते हैं.

    निस्संदेह, अविवाहित गैर-प्रतिबद्ध दोनों ही तरह के लोगों में अब ज्यादा संवाद होता है पर स्कूल और धार्मिक संस्थान एवं युवा संगठन यौन शिक्षा जैसे विषय पर कन्नी काट जाते हैं. मानव प्रजनन के तथ्यों के अलावा यौन संबंधों के बारे में विवरण, हमारे और हमारे पार्टनरों के स्वास्थ्य से जुड़े अलग-अलग तरह के जोखिमों, विभिन्न तरीकों से जुड़ी अच्छाइयों और उनकी बुराइयों के बारे में बातें जरूर होनी चाहिए.

    (लेखिका पूजा प्रियंवदा सेक्सुअल वेलनेस पर लिखती हैं और रेड्वोम्ब से जुड़ी हुई हैं)

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