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Polycystic Ovary Syndrome: अनियमित पीरियड्स की ये बीमारी बन सकती है बड़ी परेशानी

पीरियड्स के दौरान ज्यादातर महिलाओं को टमी पेन की समस्या होती है.

पीरियड्स के दौरान ज्यादातर महिलाओं को टमी पेन की समस्या होती है.

पीरियड्स से जुड़ी बीमारी PCOS को PCOD समझने की भूल न करें, क्योंकि ये उससे अधिक खतरनाक है. हालांकि इसके ट्रीटमेंट में नैचुरल रेमिडीज (Natural Remedies) भी काम देती हैं.

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    पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) महिलाओं में होने वाली आम बीमारी है. हालांकि महिलाएं इससे पॉलिसिस्टिक ओवरियन डिजीज (Polycystic Ovarian Disease) की तुलना में कम ग्रस्त होती हैं, लेकिन यह उससे अधिक परेशानी देने वाली बीमारी में गिनी जाती है. इसके ट्रीटमेंट  में एलोपैथिक मेडिसिन (Allopathic Medicine) के साथ कुछ नैचुरल चीजें भी सहायक हैं.यहां हम इन दोनों बीमारियों के अंतर और पीसीओएस के उपचार के बारें में जानेंगे.

    पीसीओएस और पीसीओडी  में अंतर :  

    पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और पॉलिसिस्टिक ओवरियन डिजीज  (PCOD) को लेकर महिलाएं अक्सर उलझन में रहती हैं और इन दो अलग बीमारियों को एक ही समझने की भूल कर बैठती हैं.  हालांकि ओवरीज (ovaries) और हार्मोनल (hormonal) गड़बड़ी जैसे लक्षणों की समानताओं के बावजूद ये दोनों बीमारियां अलग हैं. जहां पीसीओएस एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) की एक खराबी है और मेटाबॉलिक डिसआर्डर (Metabolic disorder) से पैदा हुई एक गंभीर स्थिति है. इससे होने वाली हार्मोनल अनियमितताओं सें महिलाओं के लिए गर्भाधान (conception) एक चुनौती हो सकता है. गर्भ धारण करने के लिए, एक संतुलित हार्मोनल चक्र होना चाहिए, जो इंटरकोर्स के बाद अंडाणु को शुक्राणु से मिलने के लिए एक माहौल बनाता है. वहीं पीसीओडी हार्मोन्स के असंतुलन  से होने वाली बीमारी है. इससे सही डाइट और एक्सरसाइज  निपटा जा सकता है. यह महिलाओं की प्रेग्नेंसी में बाधा और बांझपन (infertility) की वजह नहीं बनता. इससे पीड़ित 80 फीसदी मामलों में, महिलाओं में संभवतः थोड़ी मदद के साथ प्रेग्नेंसी हो सकती है. हालांकि जहां दुनिया भर में लगभग एक तिहाई महिलाएं पीसीओडी से पीड़ित हैं वहीं पीसीओएस के रोगियों की संख्या कम है.

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    पीसीओएस और पीसीओडी के प्रभावः  

    महिलाओं में दो ओवरीज होती हैं जो हर महीने एक बाद एक अंडे को छोड़ती हैं. ओवरीज से बहुत कम  मात्रा में पुरुष हार्मोन एण्ड्रोजन (Androgens)  भी निकलता है. पीसीओडी में आमतौर ओवरीज का आकार बढ़ जाता है और वो अधिक मात्रा में एण्ड्रोजन छोडने लगती हैं,जो एक महिला की प्रजनन क्षमता और उसके शरीर के लिए परेशानी पैदा करता है. इसमें ओवरीज  के बहुत अधिक अपरिपक्व या आंशिक रूप से परिपक्व अंडे छोड़ने की वजह से अंत में वो अल्सर(Cysts) में बदल जाते हैं. इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं पेट का बढ़ना, अनियमित पीरियड्स, पुरुष की तरह बालों का झड़ना और बांझपन. उधर दूसरी तरफ पीसीओएस में भी ओवरीज बड़े स्तर पर सामान्य से अधिक एण्ड्रोजन बनाती हैं, जो अंडे के विकास और रिलीज में बाधा डालता है. कुछ अंडे सिस्ट बन जाते हैं और जो अंडे पानी से भरे हुए छोटी थैली जैसे होते हैं वो ओव्यूलेशन (ovulation) के दौरान रिलीज़ होने के बजाय ओवरी में सिस्ट बन जाते हैं और कई बार तो बढ़ भी जाते हैं.

    पीसीओएस का नैचुरल इलाजः  

    मेथी के बीज (Fenugreek Seeds) पीसीओएस (PCOS) को कंट्रोल करने में मेथी बहुत फायदेमंद हैं.स्त्री रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि मेथी शरीर में ग्लूकोज को सहन करनी की क्षमता को बढ़ाती है. इससे वजन कम करने में मदद मिलती है.  मेथी के बीजों को रात भर भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट या लंच और डिनर से पांच मिनट पहले इन्हें खाएं. इसके साथ ही पीले पड़े हुए मेथी के पत्तों का भी सेवन कर सकते हैं. 

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    दालचीनी यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में कारगर है. इससे पीसीओएस (PCOS) को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. इसमें कैलोरी की मात्रा नाममात्र की होती है. ओबेसिटी (Obesity) और पीसीओएस में गहरा संबंध है. वजन अधिक होने से इस बीमारी के होने का खतरा रहता है. दालचीनी में बेहद कम कैलोरी होने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है.

    अलसी के बीज पीसीओएस के साइड इफेक्ट्स को कम करते हैं. इनमे में फाइबर, लिगानान (lignans), ओमेगा-6 और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है. इसके बीजों को पानी में कुछ देर तक भिगाने के बाद या फिर इसका पाउडर बनाकर ले सकते हैं. सादे पानी के साथ भी इसे लिया सकता है.

    शहद  के सेवन से पीसीओएस को ​कंट्रोल किया जा सकता है. नींबू और गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें. इसके अलावा शहद वजन कम करने में भी मदद करता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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