Independence Day 2020: 'ये देश है वीर जवानों का', देश प्रेम पर कविताएं

Independence Day 2020: 'ये देश है वीर जवानों का', देश प्रेम पर कविताएं
देशप्रेम से भरी कविताएं...

कलम के सिपाही (Pen Soldiers) देश में अलग-अलग मोर्चों पर आजादी (Independence) की लड़ाई में अपना योगदान दे रहे थे. उनकी कविताएं (Poems) लोगों में देशप्रेम का ऐसा असर छोड़ती थीं कि इन्‍हें सुनने वाला हर नागरिक आजादी की जंग में अपनी जान न्‍योछावर करने को तैयार हो जाता था.

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  • Last Updated: August 15, 2020, 9:41 AM IST
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15 अगस्‍त, 1947 यह वह दिन है जिसे देखने के लिए लाखों लोगों ने संघर्ष किया था. भारत की आज़ादी (Independence of India) का सपना साकार करने के लिए जहां लाखों लोगों ने अपनी नीदें, सुकून गंवा दिया था, वहीं सैकड़ों स्वतंत्रता सैनानियों (Freedom Fighters) ने अपनी जान का वलिदान इस सपने की खातिर दिया. देश के जांबाजों ने निडर और निर्भय होकर विदेशी हुकूमत का सामना किया और आखिर लंबे इंतेजार के बाद आजादी की वह खूबसूरत सुबह हुई. जहां देश में कई क्रांतिकारी तलवार और बंदूकों से देश को आजादी दिलाने की जंग में शामिल थे, वहीं कलम के सिपाही (Pen Soldiers) देश में अलग-अलग मोर्चों पर आजादी (Independence) की इस लड़ाई में अपनी काव्‍य कृतियों से अपना योगदान दे रहे थे. उनकी कविताएं (Poems) लोगों में देशप्रेम का ऐसा असर छोड़ती थीं कि इन्‍हें सुनने वाला देश का हर नागरिक आजादी की जंग में अपनी जान न्‍योछावर करने को तैयार हो जाता था. आज हम आपके लिए देशप्रेम से भरी कुछ ऐसी ही कविताओं को 'साहित्‍यदर्पण' के साभार से लेकर उपस्थि‍त हुए हैं, जो आपकी रग-रग में जोश भर देंगी और देशप्रेम के जज्‍बे को और गहरा कर देंगी...



शमशेर बहादुर सिंह
देश-देश की स्वतंत्रता देवी


आज अमित प्रेम से उतारती
निकटपूर्व, पूर्व, पूर्व-दक्षिण में
जन-गण-मन इस अपूर्व शुभ क्षण में
गाते हों घर में हों या रण में
भारत की लोकतंत्र भारती.

गर्व आज करता है एशिया
अरब, चीन, मिस्र, हिंद-एशिया
उत्तर की लोक संघ शक्तियां
युग-युग की आशाएं वारतीं.

साम्राज्य पूंजी का क्षत होवे
ऊंच-नीच का विधान नत होवे
साधिकार जनता उन्नत होवे
जो समाजवाद जय पुकारती.

जन का विश्वास ही हिमालय है
भारत का जन-मन ही गंगा है
हिन्द महासागर लोकाशय है
यही शक्ति सत्य को उभारती.

यह किसान कमकर की भूमि है
पावन बलिदानों की भूमि है
भव के अरमानों की भूमि है
मानव इतिहास को संवारती.

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हरिवंशराय बच्चन
हम ऐसे आज़ाद, हमारा
झंडा है बादल!

चांदी, सोने, हीरे, मोती
से सजतीं गुड़ियां,
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियां,

इनसे सज-धज बैठा करते
जो, हैं कठपुतले।
हमने तोड़ अभी फैंकी हैं
बेड़ी-हथकड़ियां,

परम्परा पुरखों की हमने
जाग्रत की फिर से,
उठा शीश पर हमने रक्खा
हिम किरीट उज्जवल!
हम ऐसे आज़ाद, हमारा
झंडा है बादल!

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साहिर लुधियानवी
ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना

यहां चौड़ी छाती वीरों की, यहां भोली शक्लें हीरों की
यहां गाते हैं रांझे मस्ती में, मचती में धूमें बस्ती में

पेड़ों में बहारें झूलों की, राहों में कतारें फूलों की
यहां हंसता है सावन बालों में, खिलती हैं कलियां गालों में

कहीं दंगल शोख जवानों के, कहीं करतब तीर कमानों के
यहां नित नित मेले सजते हैं, नित ढोल और ताशे बजते हैं

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम, दुश्मन के लिये तलवार हैं हम
मैदां में अगर हम डट जाएं, मुश्किल है कि पीछे हट जाएं
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