Independence Day 2020: 'सुनाओ यारो वतन के नग़्मे', पेश हैं नज़ीर बनारसी की नज्‍़में

'नज़ीर' की नज़्मों में वतन से मुहब्‍बत का जज्‍़बा नज़र आता है.

नज़ीर बनारसी (Nazeer Banarasi) ने अपने कलाम (Shayari) में जहां आम जिंदगी को अहमियत दी, वहीं उनकी शायरी में वतन से मुहब्‍बत का जज्‍़बा भी नज़र आता है. यही वजह है कि प्यारा हिन्दोस्तान, पंद्रह अगस्त जैसी नज्‍़में (Nazm) मंज़रे-आम पर आईं. उन्‍होंने अपनी शायरी ने जरिये देशप्रेम की लौ को जलाए रखा...

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    नज़ीर बनारसी (Nazeer Banarasi) नज़्म और ग़ज़ल (Ghazal) के मशहूर शायरों में शुमार किए जाते हैं. उनकी पैदाइश 25 नवंबर 1909 को बनारस (Varanasi) में हुई थी. शुरुआत में नज़ीर बनारसी हकीमी के अपने पैतृक पेशे से भी जुड़े रहे. मगर उनका दिल शायरी (Shayari) की तरफ़ खिंचने लगा. उनकी नज्‍़मों (Nazm) की ख़ासियत यह है कि उन्‍होंने जहां अपने कलाम में अपने आस-पास बिखरी जिंदगी के रंग भरे, वहीं उनकी नज़्मों में वतन से मुहब्‍बत का जज्‍़बा नज़र आता है. उनके काव्‍य संग्रह राष्ट्र की अमानत राष्ट्र के हवाले, जवाहर से लाल तक, ग़ुलामी से आज़ादी तक और किताबे-ग़ज़ल के नाम से प्रकाशित हुए. आज हम 'नज़ीर' बनारसी के इसी बेशक़ीमती कलाम से चंद नज्‍़में आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजि़र हुए हैं. ऐसी नज्‍़में जिसमें बात वतन परस्‍ती, वतन की मुहब्‍बत की है और जज्‍़बा इंक़लाब का है, तो आप भी इनका लुत्‍़फ़ उठाइए...



    प्यारा हिन्दोस्तान
    जिसका है सब को ज्ञान यही है

    सारे जहां की जान यही है

    जिससे है अपनी आन यही है

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    हंसता पर्बत हंसमुख झरना

    पांव पसारे गंगा जमुना

    गोदी खोले धरती माता

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    एक तो ऊंचा सब से हिमाला

    उस पर मेरे देश का झंडा

    धरती पर आकाश का धोका

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    पर्बत कितना जम के अड़े हैं

    कैसे कैसे भीम खड़े हैं

    झरने गिर गिर पांव पड़े हैं

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    पर्बत ऊंची चोटी वाले

    बांके तिरछे नोक निकाले

    अर्जुन जैसे बान संभाले

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    आरती उस की चांद उतारे

    ऊषा उस की मांग संवारे

    सूरज उस पर सब कुछ वारे

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    झूमती गाएं नाचते पंछी

    सारी दुनिया रक़्स-ओ-मस्ती

    कृष्ण की बंसी हाए रे बंसी

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    जाल बिछाए जाल संभाले

    कमसिन सड़कें मांग निकाले

    बाल बिखेरे नद्दी नाले

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    रात की नारी डूब गई है

    सुबह की देवी जाग चुकी है

    पनघट पर इक भीड़ लगी है

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    सुंदर नारी नार संभाले

    घूंघट काढ़े और हटाए

    चलते फिरते प्रेम शिवाले

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    धरती की पोशाक नई है

    खेती जैसे सब्ज़ परी है

    मेहनत अपने बल पे खड़ी है

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    पड़ती बूंदें बजती पायल

    धरती जल-थल पंछी घाएल

    बोले पपीहा कूके कोयल

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    देश का एक इक नयन कटोरा

    सारे जहां पर डाले डोरा

    अपना जनता अपना एलोरा

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    ताज-महल बे-मिस्ल हसीना

    इस में मिला कितनों का पसीना

    जब कहीं चमका है ये नगीना

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    अहद-ए-वफ़ा की लाज तो देखो

    शाह के दिल पर राज तो देखो

    प्रेम के सर पर ताज तो देखो

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    भारत की तक़दीर को देखो

    जन्नत की तस्वीर को देखो

    आओ ज़रा कश्मीर को देखो

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    एक इसी कश्मीर का दर्शन

    कितनों के दुख दर्द का दर्पन

    आस नहाए बरसे जीवन

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    एक तरफ़ बंगाल का जादू

    सर से कमर तक गेसू ही गेसू

    फैली हुई टैगोर की ख़ुशबू

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    काली बलाएं सर पर पाले

    शाम अवध की डेरा डाले

    ऐसे में कौन अपने को संभाले

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    हुस्न की तस्कीन इश्क़ की ढारस

    वाह रे अपनी सुब्ह-ए-बनारस

    घाट के पत्थर जैसे पारस

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    मंदिर मस्जिद और शिवाले

    मानौता का भार संभाले

    कितने युगों को देखे-भाले

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

    फूलों के मुखड़े चूम रहे हैं

    काले भंवरे घूम रहे हैं

    अम्न के बादल झूम रहे हैं

    मेरा निवास स्थान यही है

    प्यारा हिन्दोस्तान यही है

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    पंद्रह अगस्त
    घटा है घनघोर रात काली फ़ज़ा में बिजली चमक रही है

    मिलन का सीना उभार पर है बिरह की छाती धड़क रही है

    हवा जो मस्ती में चूर हो कर क़दम क़दम पर बहक रही है

    कमर है हर शाख़-ए-गुल की नाज़ुक ठहर ठहर कर लचक रही है

    हवा पे चलता है हुक्म इन का घटाएं भरती हैं इन का पानी

    इन्हीं से सुर्ख़ी बहार की है इन्हीं से बरसात की कहानी

    इन्हीं से चश्मे इन्हीं से झरने इन्हीं से झरनों की नग़्मा-ख़्वानी

    इन्हीं से पर्बत इन्हीं से दरिया इन्हीं से दरियाओं की रवानी

    फ़रेब दे कर चली न जाएँ बड़ी धुएं-धार हैं घटाएं

    जब आ गई हैं तो जम के बरसे बग़ैर बरसे न लौट जाएं

    मिले नया सब को एक जीवन चमन खिलें खेत लहलहाएं

    हवा मोहब्बत का राग अलापे किसान धरती के गीत गाएं

    यहां पे है सब का एक दर्जा कोई भी छोटा बड़ा नहीं है

    जहां पे हो इम्तियाज़ इस का वो मय-कदा मय-कदा नहीं है

    निकल ज़रा घर से ग़म के मारे उरूस-ए-फ़ितरत के कर नज़ारे

    सज़ा समझ कर न काट प्यारे ये ज़िंदगी है सज़ा नहीं है

    किया है जिस जिस ने दूर अंधेरा उसे उसे रौशनी में लाओ

    जहां जहां दफ़्न है उजाला वहां वहां पर दिए जलाओ

    क़सम है आज़ादी-ए-वतन की अदावत आपस की भूल जाओ

    किया हो जिस ने गिला तुम्हारा उसे भी बढ़ कर गले लगाओ

    क़दम जो आगे बढ़ाए सब की ज़बां से दोहराओ वो कहानी

    'नज़ीर' पंद्रह अगस्त से लो नए इरादे नई जवानी

    हवा से कह दो कि साज़ छेड़े अमर शहीदों के बांकपन का

    सुनाओ यारो वतन के नग़्मे ये दिन है आज़ादी-ए-वतन का

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