Habib Tanvir's Birth Anniversary: 'पार ये दरिया करूंगा और कितनी बार अभी', पेश है हबीब तनवीर का कलाम

Habib Tanvir's Birth Anniversary: 'पार ये दरिया करूंगा और कितनी बार अभी', पेश है हबीब तनवीर का कलाम
रंगमंच की दुनिया के प्रख्यात नाटककार हबीब तनवीर शायर के तौर पर भी जाने जाते हैं.

रंगमंच (Theatre) की दुनिया के प्रख्यात नाटककार हबीब तनवीर (Habib Tanvir) का आज जन्‍म दिन (1 सितंबर, 1923) है. जहां उनकी पहचान नाटककार, निर्देशक और पटकथा-लेखक के तौर पर है, वहीं वह एक शायर (Urdu Shayari) के तौर पर भी जाने जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 10:21 AM IST
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हबीब तनवीर (Habib Tanvir) की आज जयंती है. उनका जन्‍म 1 सितंबर, 1923 को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायपुर में हुआ था. वह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. जहां वह रंगमंच (Theatre) की दुनिया के प्रख्यात नाटककार, निर्देशक, पटकथा-लेखक रहे, वहीं वह शायर (Shayar) के तौर पर भी जाने जाते हैं. उनका असल नाम हबीब अहमद खान (Habib Ahmed Khan) था, मगर उनकी पहचान बनी हबीब तनवीर के नाम से. 'आगरा बाज़ार' और 'चरण दास चोर' उनके मशहूर नाटक हैं. अपने नाटक 'आगरा बाजार' में उन्‍होंने शायर नज़ीर अकबराबादी (Nazeer Akbarabadi) की शायरी, उनके व्यक्तित्व और उनके युग को रंगमंच पर पेश किया. हालांकि उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी. बाद में इंग्लैंड में ड्रामा का तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके अलावा गांधी, ब्लैक एंड व्हाइट और मंगल पांडे सहित कई फिल्मों में उन्‍होंने अभिनय भी किया. बहुमुखी प्रतिभा के धनी हबीब तनवीर पद्मश्री और पद्म भूषण सहित कई अहम सम्मानों से भी नवाजे गए. आज हम आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं हबीब तनवीर की शख्सियत का अलग पहलू यानी उनका कलाम, तो आप भी उनकी इस शायरी का लुत्‍फ़ उठाइए...



अभी तक मेरा हाल
बे-महल है गुफ़्तुगू हैं बे-असर अशआर अभी



ज़िंदगी बे-लुत्फ़ है ना-पुख़्ता हैं अफ़्कार अभी
पूछते रहते हैं ग़ैरों से अभी तक मेरा हाल

आप तक पहुंचे नहीं शायद मेरे अशआर अभी

ज़िंदगी गुज़री अभी इस आग के गिर्दाब में

दिल से क्यूं जाने लगी हिर्स-ए-लब-ओ-रुख़्सार अभी

हां ये सच है सर-ब-सर खोए गए हैं अक़्ल-ओ-होश

दिल में धड़कन है अभी दिल तो है ख़ुद-मुख़्तार अभी

क्यूं न कर लूं और अभी सैर-ए-बहार-लाला-ज़ार

मैं नहीं महसूस करता हूं नहीफ़-ओ-ज़ार अभी

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न जाने कितनी बार
मैं नहीं जा पाऊंगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी

देखनी है आब-जू-ए-ज़ीस्त की रफ़्तार अभी

कर चुका हूं पार ये दरिया न जाने कितनी बार

पार ये दरिया करूंगा और कितनी बार अभी

घूम फिर कर दश्त-ओ-सहरा फिर वहीं ले आए पांव

दिल नहीं है शायद इस नज़्ज़ारे से बे-ज़ार अभी

काविश-ए-पैहम अभी ये सिलसिला रुकने न पाए

जान अभी आंखों में है और पांव में रफ़्तार अभी

ऐ मेरे अरमान-ए-दिल बस इक ज़रा कुछ और सब्र

रात अभी कटने को है मिलने को भी है यार अभी

जज़्बा-ए-दिल देखना भटका न देना राह से

मुंतज़िर होगा मिरा भी ख़ुद मिरा दिल-दार अभी

होंगी तो इस रह-गुज़र में भी कमीं-गाहें हज़ार

फिर भी ये बार-ए-सफ़र क्यूं हो मुझे दुश्वार अभी

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आप ने गुज़ार ही दी
ख़लिश-ओ-सोज़ दिल-फ़िगार ही दी

दिल में शमशीर आब-दार ही दी

बेवफ़ा से मुआमले के लिए

इक तबीअत वफ़ा-शिआर ही दी

कैफ़ियत दिल की ब्यान करने को

एक आवाज़ दिल-फ़िगार ही दी

ख़ार को तो ज़बान-ए-गुल बख़्शी

गुल को लेकिन ज़बान-ए-ख़ार ही दी

दिल शब-ए-ज़िंदा-दार हम को दिया

हुस्न को चश्म-ए-पुर-ख़ुमार ही दी

ख़ुद रक़ीबों के वास्ते मैं ने

ज़ुल्फ़ माशूक़ की संवार ही दी

क्या नशेब-ओ-फ़राज़ थी 'तनवीर'

ज़िंदगी आप ने गुज़ार ही दी
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