देश की वो पहली महिला जज जिन्होंने 90 के दशक में फेमिनिज्म का झंडा बुलंद किया

हम बात कर रहे हैं जस्टिस अन्ना चाण्डी की, जिनकी आज पुण्यतिथि है

News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 11:48 AM IST
देश की वो पहली महिला जज जिन्होंने 90 के दशक में फेमिनिज्म का झंडा बुलंद किया
हम बात कर रहे हैं जस्टिस अन्ना चाण्डी की, जिनकी आज पुण्यतिथि है
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Updated: July 20, 2019, 11:48 AM IST
अपने राज्य केरल में वह ऐसी पहली महिला थीं जिन्होंने लॉ की डिग्री ली, बैरिस्टर के तौर पर कोर्ट प्रैक्टिस शुरू की और आगे चलकर आजाद भारत की पहली महिला जज चुनी गईं. हम बात कर रहे हैं जस्टिस अन्ना चाण्डी की, जिनकी आज पुण्यतिथि है.

करीब 114 वर्ष पूर्व अन्ना चाण्डी का जन्म केरल के त्रिवेंद्रम की एक सीरियन क्रिश्चन परिवार में हुआ था. चाण्डी को मितृसत्तात्मक समाज में पलने-बढ़ने का फायदा मिला. उन्होंने 1926 में केरल के गवर्मेंट लॉ कॉलेज से लॉ में पोस्ट ग्रैजुएशन किया और तीन साल बाद बतौर बैरिस्टर कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगीं. चण्डी क्रिमिनल लॉयर थीं. अपनी प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल केस लड़ें. साल 1937 में त्रावणकोर के दीवान सर सीपी रामास्वामी अय्यर ने चाण्डी को मुंसिफ के तौर पर अपॉइंट किया जिसके बाद वह भारत की पहली महिला जज बन गईं.

चण्डी ने उस दौर में भी फेमिनिज्म का झंडा बुलंड किया हुआ था. उन्हें महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए भी जाना जाता है. चण्डी ने वकालत के इतर अपनी एक मैगजीन भी शुरू की थी, जिसका नाम 'श्रीमती' था. इस मैगजीन के माध्यम से चण्डी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाया. जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'आत्मकथा' भी लिखी. और, साल 1996 में 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया.

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First published: July 20, 2019, 11:48 AM IST
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