ये दूल्हा 'दाल' का है, जायका ऐसा कि दावत याद आ जाएगी

दाल के दूल्हे यानी दाल-ढोकली का ऑरिजिन गुजरात को माना जाता है. यह शुद्ध रूप से एक भारतीय भोजन है.

दाल के दूल्हे यानी दाल-ढोकली का ऑरिजिन गुजरात को माना जाता है. यह शुद्ध रूप से एक भारतीय भोजन है.

इलाके के हिसाब से दाल का दूल्हा अपने अपने अंदाज से बनता है लेकिन आम तौर पर इसे सादा ही बनाया जाता है. साधारण सी दाल की ग्रेवी और उसमें पड़ी हुई आटे की 'तितलियां', यही इस डिश का जादू है.

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(विवेक कुमार पांडेय)

आज बात करते हैं एक पुराने लेकिन जायकेदार खाने की. हालांकि इसके नाम बहुत अलग-अलग हैं. कहीं इसे दाल का दूल्हा (Dal ka Dulha) कहा जाता है, कहीं पर इसे लोग दाल की दुल्हन ही मान लेते हैं. दाल-पिठौरी के नाम से भी इसे जाना जाता है. गुजरात में इसे दाल-ढोकली बोलते हैं. कहीं-कहीं तो इसे दाल की तितली भी कहा जाता है. तो एक बात तो तय है कि यह 'दूल्हा' पूरे देश में मशहूर है.

ये दूल्हा बहुत 'सादा' है
वैसे तो इलाके के हिसाब से दाल का दूल्हा अपने अपने अंदाज से बनता है लेकिन आम तौर पर इसे सादा ही बनाया जाता है. साधारण सी दाल की ग्रेवी और उसमें पड़ी हुई आटे की 'तितलियां', यही इस डिश का जादू है. दाल में कुछ सब्जियां और मसाले भी लोग अपने स्वाद के हिसाब से डालते हैं. यह एक रेग्यूलर डिश नहीं है लेकिन, अक्सर ही भारतीय घरों में पकती रहती है.
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गुजरात में सबसे पहले बनी थी ये डिश
तो दाल के दूल्हे यानी दाल-ढोकली (Dal Dhokli) का ऑरिजिन गुजरात को माना जाता है. यह शुद्ध रूप से एक भारतीय भोजन है. हालांकि, कई लोगों का यह भी कहना है कि यह राजस्थान में सबसे पहले बनी थी. बहरहाल जो भी हो इसे सभी राज्यों ने अपने-अपने वर्जन के साथ अपना लिया है. यूपी-बिहार में भी घरों में इसे खूब खाया जाता है. आप सबमें से भी बहुत से लोगों ने इसका स्वाद चखा ही होगा.

पौष्टिक तत्वों से भरी होती है
इसे खाना पेट के लिए तो हल्का होता ही है लेकिन इसके अलावा भी इसमें बहुत सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं. यह प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम के साथ फाइबर से भरी हुई होती है. बच्चों के लिए तो यह एक बेहतरीन विकल्प होता है. बच्चों की वजह से ही शायद इसके कई नाम पड़े हुए हैं जो उन्हें खूब आकर्षित करते हैं.

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बनाने का अपना-अपना तरीका
इसे बनाने का अपना-अपना तरीका है. बिहार या पूर्वांचल के इलाके में इसे अरहर, मसूर और मूंग की दाल में बनाते हैं. दाल उबालने के साथ आटे को गूंथ कर उसे रोटी जैसा बनाते हैं. इसके बाद कटोरी से छोटे-छोटे गोल आकार में इसे काट लिया जाता है. इसके बाद तीन तरफ से पकड़कर इसे बीच में मिला लेते हैं. फिर ये तितलियों की तरह दिखने लगती है जिसे दाल में डाल देते हैं. कुछ लोग दाल में इसके साथ ही सब्जियां आदि भी डाल कर उबाल लेते हैं जिससे उसकी पौष्टिकता और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का विकल्प है. तो आप कब बना रहे हैं ये तितलियां ....
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