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मदर टेरेसा की याद में मनाया जाता है इंटरनेशनल चैरिटी डे, सेवा कार्यों के लिए मिला था नोबल

मदर टेरेसा की पुण्यतिथि को इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाया जाता है.

मदर टेरेसा की पुण्यतिथि को इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाया जाता है.

मदर टेरेसा (Mother Teresa) दुनिया के लिए शांति की दूत थीं. जीवन के अंतिम समय तक वह गरीबों, बीमार लोगों की सेवा में लगी ...अधिक पढ़ें

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    आज मदर टेरेसा (Mother Teresa) की पुण्यतिथि (Death Anniversary 2020) है. 5 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी. भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में उन्‍होंने दीन-दुखियों, बीमार, अनाथ, गरीब और असहाय लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. उनके इन्‍हीं सेवा कार्यों के मद्देनजर 2012 में संयुक्त राष्ट्र ने उनकी पुण्यतिथि को इंटरनेशनल चैरिटी डे (International Charity Day) के रूप मनाने का फैसला किया. तब से ही उनकी पुण्यतिथि इंटरनेशनल चैरिटी डे के रूप में मनाई जाती है. उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को यूगोस्लाविया में हुआ था. मगर वह भारत समेत दुनिया के कई देशों में रह कर लोगों की सेवा में अपना अमूल्‍य योगदान देती रहीं.

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    उनका वास्‍तविक नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था. 18 वर्ष की उम्र में उन्‍होंने दीक्षा ली और वह सिस्टर टेरेसा के नाम से जानी जाने लगीं. मदर टेरेसा दुनिया के लिए शांति की दूत थीं. वह जीवन के अंतिम समय तक लोगों की सेवा में लगी रहीं. उन्हें उनके सेवा के कार्यों के लिए साल 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. भारत पर विशेष रूप से स्नेह रखने वाली मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने 1948 में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ली थी. 1980 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. भारत में वह अध्यापन से जुड़ी रहीं. इसके बाद गरीब लोगों की दुर्दशा देख कर वह सेवा कार्य करने में लग गईं.

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    सेवा कार्य के लिए उन्होंने 7 अक्तूबर,1950 को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की और इसके जरिये वह गरीबों, अनाथ लोगों की सेवा में जीवन भर जुटीं रहीं. साथ ही उन्‍होंने समाज में बहिष्कृत समझे जाने वाले कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीजों की भी सेवा की. उन्‍होंने गरीबों की सेवा के साथ शिक्षा से वंचित बच्‍चों के लिए 'निर्मल हृदय' और 'निर्मला शिशु भवन' जैसे आश्रम स्थापित किए.

    Tags: Lifestyle, Mother

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