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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2019: आखिर क्या है इस दिन की खासियत, जानें इसका इतिहास

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Updated: October 11, 2019, 6:28 AM IST
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2019: आखिर क्या है इस दिन की खासियत, जानें इसका इतिहास
पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया और उस समय इसका थीम- बाल विवाह को समाप्त करना था.

पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child) 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया और उस समय इसका थीम बाल विवाह (Child Marriage) को समाप्त करना था.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 6:28 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child) हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मूल उद्देश्य बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. पहले के समय में बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी रूढ़िवादी प्रथाएं काफी प्रचलित हुआ करती थीं. इसी कारण लड़कियों को शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार और चिकित्सा जैसी चीजों से वंचित रखा जाता था. हालांकि अब इस आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं.

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साल 2012 से हुई थी शुरुआत
भारत सरकार भी इस दिशा में बढ़ चढ़कर काम कर रही है. कई योजनाएं भी लागू की जा रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत साल 2012 से हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और उन्हें उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना है. इसके अलावा उनके सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करना और अपनी जरूरतों को पूरा कर पाना भी इसका उद्देश्य है. साथ ही लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असामानताओं को खत्म करने के बारे में जागरूकता फैलाने में भी इसकी मदद ली जा रही है.

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2019 का थीम
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2019 का थीम- GirlForce: Unscripted and Unstoppable है. आपको बता दें कि महिलाओं ने लैंगिक और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों से लेकर समान वेतन तक के मुद्दों पर वैश्विक आंदोलनों का नेतृत्व किया है. आज ज्यादातर लड़कियां स्कूल जाने लगी हैं. अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं. अपने करियर पर ध्यान दे रही हैं. अब उन पर कम उम्र में शादी करने के लिए जोर नहीं दिया जा रहा है. इसके लिए कई आंदोलन किए जा रहे हैं जिनमें बाल विवाह, शिक्षा असमानता, लिंग आधारित हिंसा, जलवायु परिवर्तन, आत्म-सम्मान और लड़कियों के अधिकारों से संबंधित मुद्दों से निपटने और पीरियड्स के दौरान पूजा स्थलों या सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश करने जैसी गंभीर बातें शामिल हैं. लड़कियां यह साबित कर रही हैं कि अब उन्हें कोई नहीं रोक सकता.

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस मनाने की पहल एक गैर-सरकारी संगठन 'प्लान इंटरनेशनल' प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी. इस संगठन ने- क्योंकि में एक लड़की हूँ, नाम से एक अभियान भी शुरू किया था. इसके बाद इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया गया था. फिर कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा. अंतत: संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 को इस प्रस्ताव को पारित किया और इसके लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना गया.

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बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं एक उल्लेखनीय योजना
इस प्रकार पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया और उस समय इसका थीम- बाल विवाह को समाप्त करना था. आपको बता दें कि भारत सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए कई प्रकार की योजनाओं को लागू किया है जिसके तहत बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ एक उल्लेखनीय योजना है. इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार भी इसे लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कर रही है. भारत में भी 24 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है.

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First published: October 11, 2019, 4:40 AM IST
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