International Women's Day 2020: ये दीदी परिवार जोड़ती हैं, हर साल हजारों परिवारों को टूटने से बचाया...

International Women's Day 2020: ये दीदी परिवार जोड़ती हैं, हर साल हजारों परिवारों को टूटने से बचाया...
शोभा सक्सेना पर परामर्श के साथ महिला थाने में चल रही फोन सेवा की जिम्मेदारी है

International Women's Day 2020: शोभा सक्सेना पर परामर्श के साथ महिला थाने में चल रही फोन सेवा की जिम्मेदारी है. इस सेवा के जरिए थाने में आने वाले फोन पर महिलाओं की मदद की जाती है.

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मध्यप्रदेश में खाकी का एक चेहरा शोभा दीदी जैसा भी है...यह चेहरा इसलिए अपनी अलग पहचान रखता है, क्योंकि इनकी वजह से हर साल 1200 से ज्यादा परिवार टूटने से बचते हैं. इनका काम ऐसा है, जिसकी वजह से यह सालों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं. कई बार उनके ट्रांसफर के आदेश हुए लेकिन उनकी जैसी शख्सियत अभी तक विभाग में नहीं मिली है. शोभा दीदी परिवार को जोड़ने का काम एक-दो सालों से नहीं, बल्कि तीन दशकों से कर रही हैं. अपने परिवार की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने भोपाल के कई टूटे परिवारों की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है.

हम बात कर रहे हैं...भोपाल के महिला थाने में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक शोभा सक्सेना की. पूरे पुलिस विभाग में उनकी अलग पहचान है. उनके द्वारा अपने लगभग 36 साल के सेवाकाल में अपने पदीय दायित्व के साथ-साथ महिला थाना भोपाल में पदस्थ रहकर सफलतापूर्वक महिला परिवार परामर्श केंद्र का संचालन में विशेष सहयोग प्रदान किया. इन्हें थाने में आने वाले लोग शोभा दीदी के नाम से जानते हैं. वर्तमानमें शोभा दीदी महिला परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी है. उन पर परामर्श केंद्र के साथ महिलाओं की मदद के लिए शुरू की गई फोन सेवा की जिम्मेदारी है.

हर साल 1200 टूटे परिवार को जोड़ा
भोपाल महिला थाने में हर साल 1200 से ज्यादा ऐसे मामले पहुंचते थे, जिनमें छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है. यह विवाद इतना बढ़ जाता है कि रिश्ते टूटे की कगार पर पहुंच जाते हैं...पति-पत्नी के बीच में कई बार उनके बच्चे पिसते रहते हैं. इन टूटते परिवार को शोभा दीदी का सहारा होता है. तीन दशक में सैकड़ों ऐसे रिश्ते जो टूटने की कगार पर पहुंच गए थे, लेकिन इन रिश्तों को शोभा दीदी ने संभालने का काम किया. दीदी की समझाइश और काउंसलर की बातचीत की वजह से उन परिवारों को हिम्मत मिली और फिर ज़िंदगी पटरी पर लौट गई. पिछले 36 वर्ष से परिवार परामर्श केन्द्र की धुरी बनीं शोभा के कई बार तबादले हुए...लेकिन शोभा को परामर्श केंन्द्र से रवानगी नहीं हुई .वजह सिर्फ ये कि उनका कोई विकल्प नहीं मिला.
दीदी के फोन पर आने से नहीं करता कोई मना


महिला परामर्श केंद्र की काउंसलर कल्पना विजय ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान महिलाएं तो पहुंच जाती है, लेकिन कई बार उनके पति, सास, ससुर, ननंद, जेठ के साथ दूसरे सदस्य नहीं आते हैं लेकिन जब शोभा अपने मोबाइल से फोन लगाती है, तो किसी की हिम्मत नहीं होती है कि वो आने के लिए मना कर दे. उन्होंने बताया कि शोभा की सख्ती और उनकी सतत निगरानी के चलते ही परामर्श केंद्र ठीक से चल रहा है. काउंसलिंग के पहले और उसके बाद में कई कागजी प्रक्रिया होती है, जिसे शोभा ही पूरा करती है. शोभा ही काउंसलिंग में आने वाले परिवार के सभी सदस्यों को बुलाने का काम करती है. लंबे समय से परामर्श करने की वजह से भोपाल में उन्हें हर कोई जानता है.

परामर्श केंद्र में मिलती है राहत
भोपाल ओल्ड सिटी के टीलाजमालपुरा से आई युवती ने बताया कि उसकी छह महीने पहले ही शादी हुई है. उसने आरोप लगाया कि शादी के कुछ महीने तक सबकुछ ठीक चला. लेकिन इसके बाद पति उसके साथ मारपीट करने लगा. उसे खर्चे के पैसे भी नहीं देता. साथ अब अपने घर पर रखने की जगह उसे बेघर कर दिया है. शोभा सक्सेना ने काउंसलिंग में पति-पत्नी दोनों को बुलाया. दोनों से एक घंटे तक बातचीत की. इस बातचीत में दोनों की समस्याओं को सुना गया. इसके बाद उनके माता-पिता को भी थाने बुलाया गया. सभी पक्षों को सुनने के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की गलती मानी. इसके बाद दोनों परिवार के बीच आपसी समझौता हुआ. कुछ बातों पर आपसी सहमति बनी और यह परिवार फिर से खुशी-खुशी साथ रहने लगा.

परमार्श से लेकर फोन सेवा की जिम्मेदारी
शोभा सक्सेना पर परामर्श के साथ महिला थाने में चल रही फोन सेवा की जिम्मेदारी है. इस सेवा के जरिए थाने में आने वाले फोन पर महिलाओं की मदद की जाती है. उनकी फोन पर काउंसलिंग की जाती है और कई बार पुलिस खुद घर जाकर उनसे मिलती है. इस फोन सेवा का संचालन भी शोभा सक्सेना के जरिए ही किया जा रहा है...शोभा सक्सेना ने बताया कि थाने में आने वाली शिकायतों को काउंसलिंग के लिए परामर्श केंद्र में भेजा जाता है. इन शिकायतों का अध्ययन करने के बाद दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया जाता है. तीन बार काउंसलिंग की जाती है. अधिकांश मामलों में काउंसलिंग के जरिए ही मामले सुलझ जाते हैं. यदि मामला बार-बार काउंसलिंग के बाद भी नहीं सुलझता है, तो एक प्रतिशत मामलों में थाने के जरिए एफआईआर भी दर्ज की जाती है.

मनोज राठौर, न्यूज 18 मप्र, भोपाल
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