45 साल से महिलाओं के स्वास्थ्य को समर्पित डॉक्टर रेखा डावर ने दिया हेल्थ का फॉर्मूला

महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर काम कर रहीं डॉ. रेखा डावर.

महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर काम कर रहीं डॉ. रेखा डावर.

इस उम्र में भी जोश से भरी हुईं डॉक्टर रेखा कई दशकों से महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनके अनुसार महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर ऐसे ध्यान देना चाहिए जैसे वे अपने पति या बच्चे के स्वास्थ्य पर देती हैं.

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अमेरिका में अपना शानदार करियर और ग्रीन कार्ड पीछे छोड़कर दशकों से भारतीय महिलाओं के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी हुईं डॉक्टर रेखा डावर कहती हैं कि अब वक्त आ गया है कि औरतें अपने स्वास्थ्य की भी सुध लें. मुंबई स्थित सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर में ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनिकॉलजी की कंसल्टेंट, ग्रैंड मेडिकल कॉलेज और सर जेजे हॉस्पिटल में एमरीटेस प्रोफेसर डॉक्टर रेखा डावर उन चुनिंदा शख्सियतों में से एक हैं जो दिल की सुनती है और मानव सेवा के लिए अपना जीवन लगा देती है. हमने डॉक्टर रेखा डावर से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी प्राप्त की. डॉक्टर रेखा मां से बच्चे को एचआईवी संक्रमण न हो, इस दिशा में भी काफी उल्लेखनीय काम कर चुकी हैं.

68 साल की उम्र में भी जोश से भरी हुईं डॉक्टर रेखा चार दशकों से महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वह कहती हैं, 'अपने स्वास्थ्य पर औरतों को ऐसे ध्यान देना चाहिए जैसे वे अपने पति या बच्चे के स्वास्थ्य पर देती हैं.' वह कहती हैं कि कई बार काफी पढ़ी-लिखी लड़कियां भी दिक्कतें झेलती रहती हैं और यह इसलिए क्योंकि वे खुद के स्वास्थ्य को लेकर अधिक सोचती नहीं. यह शायद हमारे जीन्स में है कि हम तकलीफ सहती रहती हैं.

महिला दिवस के मौके पर उन्होंने आजकल की महिलाओं को ये सूत्र दिए और कहा कि इन्हें लागू करना शुरू कर दें-



- पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को तोहफे में हेल्थ चेकअप का गिफ्ट दें. साड़ी, गहने, गाड़ी के मुकाबले अपने जीवन साथी को दिया गया यह तोहफा उसकी जिन्दगी के कई साल बढ़ा सकता है.
-महिलाओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अपने खाने में चीनी, मैदा, नमक कम से कम रखें. इन्हें खाना है लेकिन कम खाना है.

-जंक फूड की बजाय पारंपरिक फूड को वरीयता दें. पीसीओडी जैसे रोग जंक फूड के अधिक खानपान के चलते बढ़ रहे हैं.

-परिवार अपने बच्चों को ऐसी आदत डालें कि वे घर के खाने को प्राथमिकता दें और बाहर का खाना कभी कभार ही खाएं. पूरी तरह से कोल्ड ड्रिंक, पिज्जा, बर्गर बंद करना संभव नहीं लेकिन इसका सेवन कम से कम करें.

-मां को यह समझना होगा कि ब्रेस्ट फीडिंग न सिर्फ उसके बच्चे के लिए बल्कि खुद उसके लिए भी बेस्ट है. ओवरी और ब्रेस्ट कैंसर की प्रीवेंशन में भी यह कारगर है.

- महिलाओं को चाहिए कि वह अपने लिए कंस्ट्रक्टिव समय निकालें. यानी कि अपना ध्यान रखें इसके लिए खुद पहल करनी होगी. टीवी कम देख लें, फोन पर कम बात कर लें लेकिन अपने लिए समय निकालें और जरूरी कामों को तवज्जो दें.

-अपना सालाना चेकअप जरूरी करवाएं. पेप स्मियर टेस्ट और सोनोग्राफी जैसी जरूरी चीजें अपने डॉक्टर की सलाह और परामर्श लेकर करवा लिया करें.

-यदि समय से कोई बीमारी डायग्नोज हो जाती है तो क्योर आसान होता है. ऐसे में रेग्युलर चेकअप के चलते स्टेज वन और स्टेज टू के कैंसर को कंट्रोल कर सकते हैं.

-अपना खुद का ब्रेस्ट चेकअप नियमित रूप से करें. यदि परिवार में कभी किसी को कैंसर की हिस्ट्री रही है तो बहुत जरूरी है कि डॉक्टर से नियमित चेकअप करवाते रहें.

-40 के बाद पेप स्मियर टेस्ट तो जरूर करवा लें. इसे करवाने की प्रक्रिया में दर्द नहीं होता है, इसलिए डरें नहीं. न ही ज्यादा टाइम लगता है. कई बार औरतें इंटरनल चेकअप को लेकर शर्माती रहती हैं लेकिन आप ईसीजी शुगर करवा लेते हैं लेकिन स्त्री रोगों से जुड़े चेकअप करवाने से परहेज करते हैं, इस शर्म और झिझक को बदलना होगा.

- सही डाइट और व्यायाम करके शुगर को भी कंट्रोल करने की कोशिश करें. हम घर का काम करते हैं लेकिन वह एक्सरसाइज नहीं करते जो जरूरी है. घर का काम करना और व्यायाम करना एक बराबर नहीं है.

- एक हफ्ते में कुल 150 मिनट व्यायाम करना चाहिए यानी 30-30 मिनट हफ्ते में पांच दिन ढंग से एक्सरसाइज करनी चाहिए. ट्रेडमिल से लेकर योगा, रनिंग जो भी संभव हो करें.

-एक महीने में एक बार से अधिक पीरियड, क्लॉटिंग का होना और ज्यादा दिन तक पीरियड्स का रहना, कैंसर के सिम्पटम भी हो सकते हैं. रेग्युलर हेल्थ चेकअप बहुत जरूरी है. ताकि समय रहते रोकथाम हो सके.

- अक्सर देखा गया है कि ओबेसिटी, पीसीओडी, फायब्रायड्स जैसी समस्याओं से महिलाएं गुजरती रह जाती हैं और वे इस बारे में सही सलाह भी नहीं ले पाती हैं. अक्सर सहेलियों या रिश्तेदार महिलाओं से चर्चा करके वे मूक बनकर इन तकलीफों को झेलती हैं.

-आज सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कई तरह के इलाज और टेस्ट संबंधी सुविधाएं हैं लेकिन सही ढंग से अवेयरनेस नहीं है इसलिए महिलाओं के कई जरूरी टेस्ट और इसके बाद इलाज नहीं हो पाता. अब इस सोच को बदलने की जरूरत है और अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.

- यदि डायग्नोज में फायब्रायड्स आएं और इनका साइज छोटा है और अगर इनके चलते कोई दिक्कत नहीं हो रही है तो इन्हें लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. लेकिन वहीं अगर इनका साइज बड़ा है या पीरियड्स ज्यादा हो रहे है तो इन्हें रिमूव करने की सलाह दी जाती है.

-देखा गया है कि महिलाएं सोचती हैं, बार-बार और हैवी पीरियड्स मीनोपाज के आने की आहट हैं लेकिन ऐसा सही नहीं है. शुरुआती स्तर पर झेली जा रही दिक्कतें किसी और बड़ी बीमारी जैसे कि कैंसर का संकेत भी हो सकती हैं, इसलिए लक्षणों को इग्नोर न करें.

- कोई भी रोग यदि डायग्नोस हो जाए तो इसे आराम से ठीक कर सकते हैं. इसलिए पॉजिटिव रहें.

- पीसीओडी, फायब्रायड्स जैसी समस्याओं से ग्रस्त महिला कई बार हैवी ब्लीडिंग, अनीमिया, पीरियड्स में क्लॉट्स जैसी दिक्कतें झेलती रहती हैं. इसे झेलें नहीं, इस बाबत प्रॉपर चेकअप करके इलाज करवाना चाहिए.

-अगर महिला की उम्र 25-30 साल है और डायग्नोज में बड़े फायब्रायड्स आए हैं तो इन्हें रिमूव करना ठीक रहता है ताकि कंसीव करने में कोई दिक्कत न आए. अक्सर ज्यादा उम्र की महिला के शरीर में यदि ये हैं और इनसे कोई समस्या नहीं हो रही है तो इन्हें रिमूव न भी करवाएं तो चल सकता है.

डॉक्टर रेखा डावर के बारे में कुछ जरूरी बातें...

यहां बता दें कि डॉक्टर रेखा साल 2000 से मां से बच्चे में एचआईवी (HIV) संक्रमण के मामलों पर काम करने लगीं थीं. उनका मानना था कि बच्चे को जन्मते ही एचआईवी की सजा नहीं मिलनी चाहिए. बच्चे में मां से यह संक्रमण न फैले, इसके लिए वह नाको (NACO) के साथ सालोंसाल जुड़ी रहीं. वह बताती हैं, 'पहले एचआईवी पेशंट की डिलीवरी करवाने से थोड़ा डरते थे लेकिन अब हर सरकारी हॉस्पिटल में प्रेग्नेंट महिला का टेस्ट करते हैं और दवाएं देकर उनकी सेफ डिलीवरी भी करते हैं.' जेजे हॉस्पिटल में उनकी टीम ने 1300 से भी अधिक एचआईवी पॉजिटिव माताओं की प्रसूति की और नवजात शिशुओं को मां से होने वाले एचआईवी से बचाया. वह बताती हैं कि नाको के साथ हमारी टीम ने मिलकर महाराष्ट्र, नागालैंड, गुजरात, यूपी से लेकर पूरे देश में यह लागू करवाया. पहले टीम डरती थी कि जान का खतरा लगता था लेकिन अब मेडिकल लाइन से जुड़ा स्टाफ जानता और समझता है कि सभी जरूरी उपकरणों जैसे कि पीपीई किट आदि के साथ इस बाबत काम किया जाता है और इसलिए स्टाफ को कोई खतरा नहीं होता, पूरी तैयारी के साथ सुरक्षित डिलीवरी की जा सकती है. डॉक्टर रेखा बताती हैं कि मेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दिलवाई गईं और हमने खुद मेडिकल कॉलेजेस में जाकर विजिट किया कि सबकुछ सही तरीके से हो रहा है या नहीं.

वह कहती हैं, महिलाओं का इलाज करके और भविष्य के डॉक्टरों को प्रशीक्षित करके जो संतुष्टि मुझे मिलती है, उसकी कोई तुलना नहीं है. महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहतरी की दिशा में किए गए उनके काम को यूनाइटेड नेशन्स प्रोग्राम ऑन एचआईवी एंड एड्स ने भी सम्मान दिया. अपने शानदार काम के लिए उन्हें दुनियाभर में अनुशंसा मिली. साल 2009 में अमेरिका में उन्हें लबशेतवर इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर फैमिली प्लानिंग से भी नवाजा गया.

डॉक्टर रेखा डावर ने ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनिकॉलजी की फील्ड में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद औरंगाबाद में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जॉइन किया और जिन्दगी बचाने के अपने मिशन में दिलोजान से जुट गईं. परिवार नियोजन और स्तनपान के प्रचार प्रसार के अलावा उन्होंने महिलाओं के भीतर कॉन्ट्रासेप्शन को लेकर भी जागरुकता जगाई, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में. हॉस्पिटल के अपने नियत कामों के अलावा वह लगातार इन कामों में लगी रहीं. वह आईसीएमआर और एचआरआरसी से भी जुड़ी रहीं.
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