#Human story: उस रात उन 4 लड़कों ने मां की जान ले ली, मगर मुझे नाज है...

उस रात वो लड़की दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही. आस-पास गुजरने वाले लोगों से मदद की फरियाद करती रही. मगर किसी ने उसकी नहीं सुनी और फिर...

Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: March 7, 2019, 12:58 PM IST
#Human story: उस रात उन 4 लड़कों ने मां की जान ले ली, मगर मुझे नाज है...
उस रात वो लड़की दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही. आस-पास गुजरने वाले लोगों से मदद की फरियाद करती रही. मगर किसी ने उसकी नहीं सुनी और फिर...
Nandini Dubey | News18Hindi
Updated: March 7, 2019, 12:58 PM IST
आखिर उस रात को मैं कैसे भूला सकती हूं? घड़ी में लगभग साढ़े नौ बजे थे. मां दोनों छोटी बहनों को उनकी दोस्‍त के घर से लाने के लिए निकली थीं. वे अपनी कार से रोहिणी सेक्‍टर 15 से निकल पड़ी थीं तभी मां ने रास्‍ते में देखा कि कार में सवार चार लड़के एक लड़की का पीछा कर रहे थे. उस पर कमेंट्स कर रहे थे. वो लड़की खुद को बचाने के लिए इधर- उधर भटक रही थी. कभी अपनी स्‍कूटी इधर भागती तो कभी उधर. मगर वे चारों लड़के बार-बार उसकी स्‍कूटी के आगे अपनी कार लगा देते. उसे उठा लेने की धमकी देते. उस लड़की की आंखों से सिर्फ आंसू बह रहे थे.

लड़की थर-थर कांप रही थी. अनहोनी की आशंका से उसका दिल बैठा जा रहा था.उस लड़की को यकीन नहीं था कि वो अगली सुबह देख पाएगी या नहीं. वो सड़क पर गुजर रहे लोगों को मदद मांगने की कोशिश की. वो चीख रही थी कि ये लड़के उसका पीछा कर रहे हैं. मगर उस वक्‍त कोई सामने नहीं आया. बस सब लोग ये मंजर देखते और वहां से गुजरते रहे. किसी ने उसकी नहीं सुनी. मां ये सब देख रही थीं. आखिरकार उन्‍होंने अपनी कार उन लड़कों के आगे लगा दी. साथ ही लड़की को धीरे से आगे बढ़ा दिया था. लड़की तो रास्‍ता पाकर वहां से निकल गई. मगर मेरी मां उन लड़कों के निशाने पर आ गईं.

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वे लड़के मां से बदतमीजी से बात करने लगे. मां ने उन्‍हें पहले धमकाया कि वो लोग लड़की के साथ जो कुछ भी करना चाह रहे थे. उसकी शिकायत वो पुलिस में करेंगी. ये सब सुनकर वे लड़के आगबबूला हो गए. उन्‍होंने न कुछ सोचा-समझा सीधा बंदूक निकालकर मेरी मां के सामने तान दी. अगले ही पल में उन्‍होंने मां के सीने में गोली मार दी. उन दरिंदों ने मां को शूट कर दिया था.

मेरी मां सड़क पर तड़प रही थीं. आनन-फानन में लोगों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी और उन्‍हें अस्‍पताल में एडमिट कराया गया. जहां कुछ घंटों की जंग के बाद मां ने दम तोड़ दिया. मैंने अपनी मां को खो दिया था. मैं चीख रही थीं. अस्‍पताल में पागलों की तरह बिलख रही थी. उसी वक्‍त मुझे मां की मौत की वजह और पूरे वाकये के बारे में पुलिस वालों से पता चला. ये सुनकर मेरा बहुत खून खौला था मेरा. उसी वक्‍त मैंने तय कर लिया था कि अब मैं ऐसा किसी और लड़की के साथ ऐसा नहीं होने दूंगी. कुछ ऐसा करूंगी, जिससे कोई भी महिला जब रात में बाहर निकले, घूमे-फिरे तो खुद को सुरक्षित महसूस करें.

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इसके बाद मैंने धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई पूरी की. फिर मैंने इस दिशा में तेजी से सोचना शुरू कर दिया. इसकी शुरुआत मैंने गुरुद्वारा से की, जहां सब लोग गुरुद्वारे में भोजन बनाना,सफाई करने का टॉस्‍क करते थे. मैं बाहर से आने वाली महिलाओं को उनके डेस्‍टिनेशन तक पहुंचाती थी. उन्‍हें रास्‍ता दिखाती थी. अगर किसी महिला को सिम कार्ड की जरूरत होती तो उसे वो उपलब्‍ध कराती. अगर कोई होटल रूम देखता तो उसे वो उपलब्‍ध करवाती. इस तरह धीरे-धीरे ये सिलसिला बढ़ता चला गया.



उसके साथ-साथ मैं लगातार रिसर्च करती रही. आखिर महिलाओं को अकेले सुरक्षित घूमने के लिए और क्‍या कर सकते हैं? इसी दौरान मैंने ट्रैवल कंपनी खोलने के बारे में सोचा कि जो लड़कियों और महिलाओं को अकेले सुरक्षित घूमने के लिए सारी सुविधाएं उपलब्‍ध करवा सके. बस यहीं से 'वो वोयाज’ की शुरुआत हुई.

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साल 2016 में मैंने इस कंपनी के सहारे खासतौर पर महिलाओं को ट्रैवल से जुड़ी हर सुविधाएं उपल्‍बध कराना शुरू कर दिया.  हम महिलाओं को अकेले घूमने के लिए  महिला ड्राइवर, गाइड से लेकर उनके ट्रैवल से जुड़े हर काम में उनकी मदद करते हैं. आज खुशी होती है, जब कोई महिला अकेले और सुरक्षित अपना सफर पूरा कर हमारा शुक्रिया अदा करती है.अच्‍छा लगता है, जब कोई महिला कहती है कि हमारी वजह से उसका अकेले घूमने का सपना सच हुआ.

बस दुख होता है कि मेरी मां को मारने वाले वो चार दरिंदे जेल से बाहर हो गए हैं.  मेरा खून खौलता है इस बात  पर. मगर मैं भी चुप नहीं बैठने वाली. मां के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगी. मैं अपनी मां को तो वापस नहीं ला सकती.  मगर  हां मुझे लगता है कि जिस अच्‍छे काम के लिए मेरी मां ने अपनी जान गंवा दी. मुझे नाज है कि उन्‍होंने इस नेक काम की वजह से मेरी जान गई. मुझे लगता है कि मां भी जहां कहीं होंंगी तो मेरा ये काम देखकर खुशी महसूस कर रही होंगी.

( ये कहानी दिल्‍ली के रोहिणी सेक्‍टर 11 से ताल्‍लुक रखने वाली रश्‍मि चड्ढा की है. वे  वो वोयाज’ नामक  अपनी ट्रैवल कंपनी चलाती हैं. इस कंपनी में गाड़ी, ड्राइवर,गाइड उपलब्‍ध करवाती हैं और ये सभी सर्विसेज महिलाएं दे रही हैं. अभी तक उनकी कंपनी  250 से ज्‍यादा ट्रिप प्‍लान करवा चुकी हैं ) 
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