VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- जो इस मुसीबत से बच गए थे, उन्हें उसूलों ने मार डाला

आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए इक़बाल अशहर के क़लाम.

News18Hindi
Updated: January 12, 2018, 5:31 PM IST
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देखें वीडियो और पढ़ें, इक़बाल अशहर  के क़लाम

किसी को कांटो से चोट पहुंची, किसी को फूलों ने मार डाला,
जो इस मुसीबत से बच गए थे, उन्हें उसूलों ने मार डाला

ये बात अलग है तुम न बदलो मगर ज़माना बदल रहा है
गुलाब पत्थर पे खिल रहे हैं, चराग़ आंधी में जल रहा है

कोई ज़ख्म फिर से हरा हुआ, कोई ख़्वाब फिर से चमक उठा
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मैं समझ रहा था वो बेवफ़ा मेरे हाफ़ज़े से जुदा हुआ

यहां ख़ुशबुओं की रफ़ाक़तें न तुझे मिलीं, न मुझे मिलीं
वो चमन जिसपे ग़ुरूर था न तेरा हुआ, न मेरा हुआ

इसे कहिए वजह-ए-सुरूर क्या, विरासतों पे ग़ुरूर क्या
जो डगर मिली वो लुटी हुई, जो दिया मिला वो बुझा हुआ

ये है मौजूदा दौर की सहाफ़त (जर्नलिज़्म)

वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़हन में
न मैं कह सका, न मैं लिख सका

ज़बां मिली तो कटी हुई
क़लम मिला तो बिका हुआ

ये जुगनुओं की क़यादत में चलने वाले लोग
थे कल चराग़ की मानिंद जलने वाले लोग

हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डाला
हम ही थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग

 
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