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बच्चों में नजर आ रहा है चिड़चिड़ापन? पैरेंट्स इन 5 बातों का रखें ख्याल

News18Hindi
Updated: November 6, 2019, 3:42 PM IST
बच्चों में नजर आ रहा है चिड़चिड़ापन? पैरेंट्स इन 5 बातों का रखें ख्याल
अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा गुस्सा करता है या हर समय रोता रहता है, तो डांटने-मारने के बजाय उसकी समस्या को समझने का प्रयास करें.

पैरेंट्स कई बार गुस्से में या फिर इरिटेट होकर ऐसे बच्चों को मारते-डांटते भी हैं. कई बार बच्चे हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का शिकार होते हैं, इसलिए उनका ऐसा स्वभाव होता है.

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  • Last Updated: November 6, 2019, 3:42 PM IST
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बचपन में कुछ बच्चों का स्वभाव काफी चिड़चिड़ा होता है. इस कारण वह ज्यादातर समय रोते-चीखते रहते हैं, जिद्द करते हैं और बात-बात पर गुस्सा हो जाते हैं. ऐसे बच्चों को संभालना मुश्किल होता है. पैरेंट्स कई बार गुस्से में या फिर इरिटेट होकर ऐसे बच्चों को मारते-डांटते भी हैं. कई बार बच्चे हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का शिकार होते हैं, इसलिए उनका ऐसा स्वभाव होता है. अगर आपका बच्चा भी बहुत ज्यादा गुस्सा करता है या हर समय रोता रहता है, तो डांटने-मारने के बजाय उसकी समस्या को समझने का प्रयास करें. बच्चों को चिड़चिड़ेपन से बचाना है, तो पेरेन्ट्स को इन 5 बातों का ख्याल जरूर रखना चाहिए.

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बच्चों पर हाथ उठाने से बचें

गुस्सा चिड़चिड़े स्वभाव को जन्म देता है. अगर बच्चे के रोने, चिल्लाने पर आप उसे मारते हैं, तो बच्चे को और गुस्सा आता है. लगातार मारने-डांटने पर बच्चे के मन में आपके प्रति गुस्सा घर कर जाता है, जो धीरे-धीरे चिड़चिड़ेपन में बदल जाता है. इसलिए बच्चे पर हाथ उठाने से बचना चाहिए. अगर बच्चा परेशान कर रहा है, तो उसकी बात सुनें और परेशानी दूर करने की कोशिश करें.

दूसरों के सामने बच्चों को बेइज्जत न करें

कई बार मां-बाप गलती करने पर बच्चे को समझाने के बजाय उसे दूसरे लोगों के सामने डांटने-चिल्लाने लगते हैं. आमतौर पर 3-4 साल की उम्र तक बच्चों में आत्मसम्मान की भावना का विकास हो जाता है. ऐसे में दूसरों के सामने डांटने-चिल्लाने से बच्चों को बुरा लगने लगता है और उसमें बदले की भावना घर करने लगती है. ऐसे बच्चे स्वभाव से चिड़चिड़े हो जाते हैं. बच्चों को कोई बात समझानी है, तो अकेले में और प्यार से समझाएं.

भूख के कारण भी आता है गुस्सा
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भूख लगने पर भी छोटे बच्चों में चिड़चिड़ेपन का स्वभाव देखने को मिलता है. इसलिए अगर बहुत छोटा बच्चा बिना कारण रोये या काफी प्रयास के बाद भी चुप न हो, तो उसे दूध जरूर पिलाएं. बच्चे इशारों में अपनी बात कहने की कोशिश करते हैं. मां-बाप धीरे-धीरे जब ये इशारे समझने लगते हैं, तो उन्हें परेशानी नहीं होती है.

बच्चों को क्रिएटिव काम में रखें व्यस्त

बहुत ज्यादा गुस्‍सा करने वाले बच्‍चों को ज्‍यादा से ज्‍यादा खेलकूद और बाहरी गतिविधियों में व्‍यस्‍त रखना जरूरी होता है. बच्चे को डांस या आर्ट क्लास में भेज सकते हैं. ऐसा करने से उनका ध्यान बंटता है. समय-समय पर उन्हें आउटडोर गेम्स खेलने के लिए बाहर ले जाना भी अच्छा रहता है. इससे बच्चे की अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा व्यय होगी और आत्म अभिव्यक्ति व सामाजिक व्यवहार की समझ भी विकसित होगी.

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हॉर्मोनल असंतुल के कारण भी चिड़चिड़ापन

हॉर्मोनल असंतुलन भी बच्चों में चिड़चिड़ेपन का कारण हो सकता है. इससे कई बार बिना किसी वजह के भी बच्चे के व्यवहार में झल्लाहट नजर आ सकती है. टीनएजर्स में बहुत हाई लेवल की एनर्जी होती है पर आधुनिक जीवनशैली से आउटडोर गेम्स और फिजिकल एक्टिविटीज गायब होती जा रही हैं. ऐसे में बच्चे को अपनी एनर्जी रिलीज करने का मौका नहीं मिलता तो इसका असर गुस्से या आक्रामक व्यवहार के रूप में नजर आता है.

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First published: November 6, 2019, 3:38 PM IST
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