शादी के बाहर 'रिश्ता' जुर्म है या सिर्फ 'बेवफाई...'

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 14, 2017, 7:17 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में व्याभिचार याने अडल्ट्री पर बने कानून पर सवाल खड़ा किया है. कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा है कि शादी के बाद बनाए जाने वाले रिश्तों के लिए भारत में सिर्फ पुरुषों को ही सज़ा देने का प्रावधान है. कोर्ट का सवाल था कि अन्य आपराधिक मामलों से अलग अडल्ट्री के केस में क्यों लिंग-भेद किया जाता है. कोर्ट ने कहा कि अगर औरतों को हर क्षेत्र में पुरुषों के समतुल्य माना जा रहा है तो फिर इस मामले में उनसे अलग तरीके से पेश क्यों आया जाता है.

दरअसल भारतीय दंड संहिता के मुताबिक एक शादीशुदा महिला और गैर पुरुष के बीच रज़ामंदी से हुआ शारीरिक संबंध गैर कानूनी है अगर उसमें पति की सहमति शामिल ना हो. लेकिन अगर असहमति के बावजूद भी संबंध बनता है तो पति की शिकायत पर केस उस गैर मर्द के खिलाफ बनता है जिसके साथ पत्नी के संबंध बने हैं. लेकिन पूरे मामले में पत्नी पर कोई मामला दर्ज नहीं होता.

ऐसे में एक सवाल यह खड़ा होता है कि पत्नी की इच्छा या मर्ज़ी के बारे में कानून ने कोई जगह क्यों नहीं छोड़ी है. दूसरा सवाल यह भी कि क्योंकि भारत में अडल्ट्री अपराध है इसलिए इच्छा से बनाए गए इस रिश्ते में अगर पुरुष कटघरे में खड़ा होता है तो औरत क्यों नहीं. कानून में मूलत: इसे दो पुरुषों के बीच का मामला बताया गया है जिसमें औरत से ज्यादा उसके पति की इच्छा पर तवज्जो दी गई है.



अंग्रेज़ों के बनाए इस 150 साल पुराने कानून पर सवाल खड़े होते आए हैं. इस कानून की विवेचना करने वाले समझते हैं कि इसमें महिला को एक ‘सामान’ की तरह समझा गया है जिसे छीने जाने पर उसका मालिक केस दर्ज कर सकता है. वहीं खुद ब्रिटेन की बात करें तो वहां अडल्ट्री को लेकर कानून नर्म पड़ा है. शादी के बाहर रिश्ते को वहां अपराध नहीं माना जाता और उसे एक सामाजिक अशिष्टता के रूप में देखा जाता है.
यूरोपीय देशों में तलाक की सबसे ज्यादा वजह अडल्ट्री पाई जाती है लेकिन उसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है. जानकारों का कहना है कि दो वयस्कों के बीच रज़ामंदी से हुए सेक्स को अपराध की नज़र से देखना जायज़ नहीं है. वहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत अमेरिका के कई राज्यों में अडल्ट्री को घोर पाप की तरह देखा जाता है और इसे एक बड़ा जुर्म मानकर सज़ा दी जाती है. भारत में पांच साल की सज़ा का प्रावधान है.

एक तरफ इस कानून में औरतों को सज़ा दिए जाने और उनकी भागीदारी को कटघरे में खड़ा करने पर बात हो रही है. दूसरी तरफ एक अलग लड़ाई चल रही है जिसमें अडल्ट्री को अपराध की श्रेणी से हटाए जाने की मांग की जी रही है. दलील यह दी जा रही है कि शादी के बाहर बनाए गए इन रिश्तों को अपराध मानने के नाम पर कई देशों में काफी क्रूरतम सज़ाएं दी जाती हैं.

भारत को अलग हटा दें तो कुछ देश ऐसे भी हैं जहां मर्द और औरत दोनों के साथ सज़ा के नाम पर ज्यादती की जाती है. वहीं इस कानून के खिलाफ यह भी कहा जाता है कि दो वयस्क भले ही शादीशुदा क्यों न हो, अगर रज़ामंदी के साथ एक दूसरे से सेक्स कर रहे हैं तो फिर उसे अपराध कैसे कहा जा सकता है. यकीनन यह किसी के साथ बेवफाई हो सकती है लेकिन जुर्म कैसे?
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